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Basti News: नागवार लग रही रोक-टोक,जरा सी बात पर घर छोड़ रहे बच्चे

Fri, 23 Sep 2022 12:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती।
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 23 Sep 2022 12:25 PM IST
सार

एसपी आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। सबसे जरूरी है संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। बच्चे से परस्पर संवाद बनाए रखने से इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सकता है।

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There seems to be a nuisance, children leaving the house over the slightest thing
(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social Media

विस्तार

16 साल का किशोर 12 वर्षीय भाई के साथ सिर्फ इसलिए घर छोड़कर भाग गया, क्योंकि घर वालों ने उसकी बात नहीं सुनी। इसी नाराजगी में दोनों रुधौली से भागकर छावनी अपने दोस्त के यहां पहुंच गए और वहां से अपहरण की झूठी कहानी गढ़ ली। बृहस्पतिवार को पुलिस उन्हें ढूंढकर वापस ले आई। इसी महीने हर्रैया से एक किशोर मां की डांट से नाराज होकर लखनऊ भाग गया था। 24 घंटे बाद परिवार के लोग उसे ढूंढकर घर लाए।

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यह दो मामले एक उदाहरण भर हैं। तीन महीने में 14 और हफ्ते भर में इस तरह की दो घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सच्चाई यह है बच्चों व किशोरों को माता-पिता या अभिभावक की डांट फटकार और बंदिशें अब नागवार गुजरने लगी हैं। गुस्सा होकर घर छोड़ने के आंकड़ों पर गौर करें तो पाएंगे खेलने, होमवर्क न करने, वीडियो गेम खेलने से रोकने पर वे घर छोड़ने में जरा भी देर नहीं लगाते। जानकर बताते हैं कि ऐसे कदम न उठाएं इसके लिए बच्चों के मन की बात सुनने की जरूरत है। अभिभावकों को बच्चों के मन की बात सुननी चाहिए और उनसे मित्रवत व्यवहार करने की आवश्यकता है।
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मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्रवक्ता कृष्ण बिहारी उपाध्याय बताते हैं कि पांच वर्ष की उम्र के बाद बच्चे के व्यवहार और मनो स्थिति में परिवर्तन होने लगता है। इस दौरान स्कूल में उनका नए दोस्तों से मेलजोल बढ़ता है। उनके व्यवहार और गतिविधियों में भी परिवर्तन दिखता है। इन पर अभिभावकों की रोकटोक उन्हें बंदिश सी लगने लगती हैं। बार-बार टोकने से बच्चे चिढ़ चिढ़े होने लगते हैं। ऐसे में जरूरी है कि उनसे दूरी बनाने के बजाए मेलजोल बढ़ाएं। उनके मन में हो रही हलचल भांप कर उसी अनुरूप व्यवहार करने की आवश्यकता है। संवाद
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चाचा के टोकने पर छोड़ दिया था घर

शहर के एक व्यवसायी के 13 वर्षीय बेटे को उसके चाचा अक्सर टोकते रहते थे। खेल, पढ़ाई, मित्रों संग घूमने, कपड़े खरीदने जैसी बातों पर वह टीका-टिप्पणी करते थे। यह बात बच्चे को नागवार लगता था, मगर माता-पिता से संकोच वश नहीं बोल पाता था। एक प्रदर्शनी से घूमकर आने के बाद चाचा ने उसे एक थप्पड़ रसीद कर दिया। इसके बाद वह चुपचाप घर से निकल गया। दो दिन ढूंढने के बाद लखनऊ में मिला।

सजा और इनाम दोनों जरूरी
मनोविज्ञान के सेवानिवृत्त प्रवक्ता कृष्ण बिहारी उपाध्याय का कहना है कि सजा और इनाम की तरकीब काफी कारगर है। घरेलू स्तर पर ऐसा माहौल तैयार करें जिसमें अच्छे बर्ताव के लिए इनाम और बुरे बर्ताव के लिए सजा की गुंजाइश हो। सजा का तात्पर्य शारीरिक तकलीफ नहीं, बल्कि उनको मिलने वाली छूट व सुविधा में कटौती है।

बच्चों, किशोरों के नाराज होकर घर छोड़कर भागने की घटनाएं चिंता का विषय है। इसमें पुलिस से ज्यादा परिवार वालों की जिम्मेदारी होती है। सबसे जरूरी है संवादहीनता की स्थिति नहीं बनने देना चाहिए। बच्चे से परस्पर संवाद बनाए रखने से इस तरह की परिस्थितियों से बचा जा सकता है। -आशीष श्रीवास्तव, एसपी
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