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Basti News: अब भी हवा में जहर... एक्यूआई में महज हल्की सी गिरावट, सेहत को खतरा
Tue, 05 Nov 2024 12:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 05 Nov 2024 12:43 AM IST
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180 से 163 पर पहुंचा एयर क्वालिटी इंडेक्स, महसूस की जा रही घुटन
दीपावली के पटाखों से बढ़ा प्रदूषण, वायुमंडल स्वच्छ होने में लगेंगे चार से पांच दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दीपावली की आतिशबाजी से बिगड़ी हवा की तासीर अभी सुधरी नहीं है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बिगड़ा हुआ है। सुबह कोहरे के बीच जहरीली हवा सांसों में जा रही है। इससे घुटन महसूस हो रही है। पटाखों से निकले धुओंं का असर अभी कम नहीं हुआ है। दिन में छाया हुआ धुंध हवा में प्रदूषण का असर माना जा रहा है। दीपावली के बाद 180 पर पहुंचा एक्यूआई सोमवार को 163 पर दर्ज किया गया।
पर्यावरण के जानकार बताते हैं कि जब तक एक्यूआई 100 के आसपास नहीं पहुंचता, तब तक चैन की सांस लेने की स्थिति नहीं बन पाएगी। स्वस्थ शरीर के लिए जहरीली हवा खतरनाक है। सामान्य लोग खुले में रहने के दौरान घुटन महसूस कर रहे हैं। दमा रोगियों को सर्वाधिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है। सुबह टहलने वाले लोग हवा में बढ़े हुए प्रदूषण का एहसास भी कर रहे हैं।
शहर के रहने वाले संतोष कुमार बताते हैं कि स्वच्छ हवा सुबह टहलने के दौरान नहीं मिल पा रही है। प्राकृतिक कोहरे का आवरण नहीं है। दिखने में कोहरे जैसा वायुमंडल प्रदूषित है। इसमें बारूद के धुएं घुले होने से दिन में आठ बजे तक धुंध छाया रहता है। इस दौरान हवा के संपर्क में आने पर कपड़ों में काले-काले कण भी लग जा रहे हैं।
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वहीं दीपावली में लंदन से घर आए आवास विकास कॉलोनी शुभम शुक्ला कहते हैं कि यहां एक्यूआई काफी बढ़ा हुआ है। हमें इससे दिक्कत महसूस हो रही है। लंदन में एक्यूआई सौ से कम रहता है। वहां प्रदूषण पर पूरी तरह नियंत्रण है। एक्यूआई बढ़ने के कारण हम ज्यादातर घर के अंदर रह रहे हैं।
पर्यावरण के जानकार अजीत कुमार ने बताया कि हवा में प्रदूषण कम होने में अभी सप्ताह भर कम से कम लगेंगे। क्योंकि दीपावली की धूम में आतिशबाजी बहुत हुई है। इसका असर अभी रहेगा। हमें यह भी ध्यान देना होगा कि इस बीच हम प्लॉस्टिक एवं टायर आदि न जलाएं।
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दिवाली में डेढ़ सौ क्विंटल बारूद हुआ था धुआं
अनुमान के मुताबिक इस बार दीपावली पर्व के दौरान जिले में भर में करीब डेढ़ सौ क्विंटल बारूद से बने पटाखे धुआं हो गए। इनके घुलने से हवा भी जहरीली हो गई। दीपावली के तत्काल बाद तो एक्यूआई 180 पर पहुंच गया था। हालांकि, दो दिन बाद से इसमें गिटावट दर्ज की जाने लगी है। शहर में धूल के कण और वाहनों से निकले धुएं से दशहरा के बाद से ही प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। लगातार 100 के आसपास रहने वाला एक्यूआई का स्तर 140 के पार तक पहुंचा हुआ था, लेकिन पिछले सप्ताह बुधवार को इसमें और इजाफा होने लगा। शनिवार को एक्यूआई 180 पर पहुंच गया था। पिछले पांच वर्षों में एयर क्वालिटी इंडेक्स इतने ऊपर कभी नहीं पहुंचा था। 2019 में 165 तक एक्यूआई पहुंचा था।
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पर्यावरण में घुल जाते हैं हानिकारक प्रदूषक
पर्यावरण के जानकार अजीत कुमार ने बताया कि बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइडस, क्लोराइडूस, अमोनिया के जल में घुलनशील तत्व उत्पन्न होते हैं। साथ ही विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते हैं ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है। जल में घुलन शील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है।
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बढ़ गए एलर्जी, अस्थमा के मरीज
जिला एवं ओपेक चिकित्सालय कैली में प्रदूषण जनित बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। एलर्जी, अस्थमा के रोगी ज्यादा पहुंच रहे हैं। सांस लेने में लोगों को तकलीफ हो रही है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी के मुताबिक दीपावली के बाद हर वर्ष की तरह इस बार भी एलर्जी, अस्थमा के मरीज बढ़ गए हैं। असल में पटाखे जलाने पर उनसे गंधक और पोटेशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैस निकलती है। एक साथ चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। सबसे अधिक परेशानी एलर्जी व अस्थमा मरीजों को होती है। शोर और प्रदूषण से तनाव होता है, जो ब्लड प्रेशर और शुगर के अलावा हृदय रोगियों के लिए हानिकारक है। अचानक तेज आवाज के पटाखे बजने पर ह्दय रोगियों को जो झटका लगा है, इससे उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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अभी भी बरतें सावधानी
- अस्थमा के रोगी अभी अगले एक सप्ताह तक विशेष सावधानी बरतें
- सुबह- सुबह खुले में टहलने एवं सांस लेने से बचा जाए।
- शाम के बाद घर से निकले तो गर्म कपड़े पहने।
- हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के कारण नुकसान पहुंच सकता है।
- अचानक तापमान बदलने के दौरान पहनावें में सावधानी बरते।
- सुबह- शाम भाप जरूर लें, गर्म पानी का सेवन करें।
- गर्म भोजन करें, सलाद और फल का अधिक सेवन करें।
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कोट
पराली जलाने पर पूरी तरह रोक हैं। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बावजूद इसके यदि लोग खेतों में पराली जलाएंगे तो संबंधित पर कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रतिपाल सिंह चौहान, एडीएम।
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दीपावली के पटाखों से बढ़ा प्रदूषण, वायुमंडल स्वच्छ होने में लगेंगे चार से पांच दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दीपावली की आतिशबाजी से बिगड़ी हवा की तासीर अभी सुधरी नहीं है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) बिगड़ा हुआ है। सुबह कोहरे के बीच जहरीली हवा सांसों में जा रही है। इससे घुटन महसूस हो रही है। पटाखों से निकले धुओंं का असर अभी कम नहीं हुआ है। दिन में छाया हुआ धुंध हवा में प्रदूषण का असर माना जा रहा है। दीपावली के बाद 180 पर पहुंचा एक्यूआई सोमवार को 163 पर दर्ज किया गया।
पर्यावरण के जानकार बताते हैं कि जब तक एक्यूआई 100 के आसपास नहीं पहुंचता, तब तक चैन की सांस लेने की स्थिति नहीं बन पाएगी। स्वस्थ शरीर के लिए जहरीली हवा खतरनाक है। सामान्य लोग खुले में रहने के दौरान घुटन महसूस कर रहे हैं। दमा रोगियों को सर्वाधिक दिक्कत झेलनी पड़ रही है। सुबह टहलने वाले लोग हवा में बढ़े हुए प्रदूषण का एहसास भी कर रहे हैं।
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शहर के रहने वाले संतोष कुमार बताते हैं कि स्वच्छ हवा सुबह टहलने के दौरान नहीं मिल पा रही है। प्राकृतिक कोहरे का आवरण नहीं है। दिखने में कोहरे जैसा वायुमंडल प्रदूषित है। इसमें बारूद के धुएं घुले होने से दिन में आठ बजे तक धुंध छाया रहता है। इस दौरान हवा के संपर्क में आने पर कपड़ों में काले-काले कण भी लग जा रहे हैं।
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वहीं दीपावली में लंदन से घर आए आवास विकास कॉलोनी शुभम शुक्ला कहते हैं कि यहां एक्यूआई काफी बढ़ा हुआ है। हमें इससे दिक्कत महसूस हो रही है। लंदन में एक्यूआई सौ से कम रहता है। वहां प्रदूषण पर पूरी तरह नियंत्रण है। एक्यूआई बढ़ने के कारण हम ज्यादातर घर के अंदर रह रहे हैं।
पर्यावरण के जानकार अजीत कुमार ने बताया कि हवा में प्रदूषण कम होने में अभी सप्ताह भर कम से कम लगेंगे। क्योंकि दीपावली की धूम में आतिशबाजी बहुत हुई है। इसका असर अभी रहेगा। हमें यह भी ध्यान देना होगा कि इस बीच हम प्लॉस्टिक एवं टायर आदि न जलाएं।
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दिवाली में डेढ़ सौ क्विंटल बारूद हुआ था धुआं
अनुमान के मुताबिक इस बार दीपावली पर्व के दौरान जिले में भर में करीब डेढ़ सौ क्विंटल बारूद से बने पटाखे धुआं हो गए। इनके घुलने से हवा भी जहरीली हो गई। दीपावली के तत्काल बाद तो एक्यूआई 180 पर पहुंच गया था। हालांकि, दो दिन बाद से इसमें गिटावट दर्ज की जाने लगी है। शहर में धूल के कण और वाहनों से निकले धुएं से दशहरा के बाद से ही प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ है। लगातार 100 के आसपास रहने वाला एक्यूआई का स्तर 140 के पार तक पहुंचा हुआ था, लेकिन पिछले सप्ताह बुधवार को इसमें और इजाफा होने लगा। शनिवार को एक्यूआई 180 पर पहुंच गया था। पिछले पांच वर्षों में एयर क्वालिटी इंडेक्स इतने ऊपर कभी नहीं पहुंचा था। 2019 में 165 तक एक्यूआई पहुंचा था।
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पर्यावरण में घुल जाते हैं हानिकारक प्रदूषक
पर्यावरण के जानकार अजीत कुमार ने बताया कि बारूद के द्वारा पर्यावरण में सूक्ष्म कणों की मात्रा ज्यादा हो जाती है और हानिकारक प्रदूषक जैसे नाइट्रेट्स, सल्फर ऑक्साइडस, क्लोराइडूस, अमोनिया के जल में घुलनशील तत्व उत्पन्न होते हैं। साथ ही विभिन्न धातु जैसे की मैग्नीशियम, क्रोमियम, कैल्शियम, बेरियम जो की कैंसर जैसे रोगों के कारण होते हैं ये भी हानिकारक मात्रा में बढ़ जाती है। जल में घुलन शील होने के कारण इनका दीर्घ काल तक प्रभाव बना रहता है।
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बढ़ गए एलर्जी, अस्थमा के मरीज
जिला एवं ओपेक चिकित्सालय कैली में प्रदूषण जनित बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। एलर्जी, अस्थमा के रोगी ज्यादा पहुंच रहे हैं। सांस लेने में लोगों को तकलीफ हो रही है। जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी के मुताबिक दीपावली के बाद हर वर्ष की तरह इस बार भी एलर्जी, अस्थमा के मरीज बढ़ गए हैं। असल में पटाखे जलाने पर उनसे गंधक और पोटेशियम नाइट्रेट समेत कई हानिकारक गैस निकलती है। एक साथ चारों तरफ इन गैसों की मात्रा बढ़ने से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ जाता है। जहरीली गैसों के चलते सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। सबसे अधिक परेशानी एलर्जी व अस्थमा मरीजों को होती है। शोर और प्रदूषण से तनाव होता है, जो ब्लड प्रेशर और शुगर के अलावा हृदय रोगियों के लिए हानिकारक है। अचानक तेज आवाज के पटाखे बजने पर ह्दय रोगियों को जो झटका लगा है, इससे उनकी तबीयत बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है।
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अभी भी बरतें सावधानी
- अस्थमा के रोगी अभी अगले एक सप्ताह तक विशेष सावधानी बरतें
- सुबह- सुबह खुले में टहलने एवं सांस लेने से बचा जाए।
- शाम के बाद घर से निकले तो गर्म कपड़े पहने।
- हवा में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने के कारण नुकसान पहुंच सकता है।
- अचानक तापमान बदलने के दौरान पहनावें में सावधानी बरते।
- सुबह- शाम भाप जरूर लें, गर्म पानी का सेवन करें।
- गर्म भोजन करें, सलाद और फल का अधिक सेवन करें।
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कोट
पराली जलाने पर पूरी तरह रोक हैं। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। बावजूद इसके यदि लोग खेतों में पराली जलाएंगे तो संबंधित पर कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रतिपाल सिंह चौहान, एडीएम।