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Basti News: पार्किंग है नहीं, सड़क पर खड़ी गाड़ी के चालान पर लोग उठाते हैं सवाल
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गांधीनगर हनुमान गढ़ी के पास बेतरतीब खड़ी गाड़ियों के बीच से बहाल हो रहा आवागमन।
बस्ती। शहर में पार्किंग की व्यवस्था न होने से वाहन चालक ही नहीं, पुलिस भी परेशान है। कचहरी से अस्पताल और रोडवेज से रेलवे स्टेशन तक कहीं भी व्यवस्थित पार्किंग स्थल नहीं है। इससे अक्सर जाम की स्थिति बनती है।
मुख्य बाजार गांधीनगर, पुरानी बस्ती, मंगलबाजार, पांडेय बाजार और करूआ बाबा जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लोग मजबूरी में सड़क और पटरियों पर वाहन खड़ा कर रहे हैं। सड़क किनारे वाहन खड़ा करने पर ट्रैफिक या सिविल पुलिस चालान करती है तो वाहन स्वामियों से कहासुनी होने लगती है। वाहन चालक पुलिस से ही सवाल करते हैं कि आखिर गाड़ी खड़ी कहां करें।
पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से पुलिसकर्मी भी निरुत्तर हो जाते हैं। गांधीनगर बाजार में कंपनीबाग से रोडवेज तक सड़क के दोनों ओर दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े रहते हैं। सुबह 11 बजे के बाद बाजार में भीड़ बढ़ने के साथ समस्या गंभीर होने लगती है और रात करीब आठ बजे तक यही स्थिति रहती है। सड़क संकरी होने से वाहनों का दबाव बढ़ते ही जाम लग जाता है।
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बृहस्पतिवार को हनुमानगढ़ी के पास जाम में फंसी स्कूटी सवार रिंकी ने बताया कि गांधीनगर में रोज जाम की समस्या रहती है। टाउन क्लब से एसबीआई मुख्य शाखा तक करीब एक किलोमीटर के रास्ते में अक्सर जाम से जूझना पड़ता है। बाइक सवार राजेश ने बताया कि फुटपाथ और सड़क के किनारे वाहन खड़े होने से रास्ता संकरा हो जाता है। इससे यातायात बढ़ते ही जाम लग जाता है।
रोडवेज के पास नेहरू तिराहे पर ट्रैफिक पुलिस दिनभर सड़क किनारे वाहन खड़ा करने से रोकती है। यहां भी पार्किंग को लेकर वाहन चालकों और पुलिस के बीच कहासुनी होती रहती है। पुरानी बस्ती के मंगलबाजार, करूआ बाबा और पांडेय बाजार में भी स्थिति इससे अलग नहीं है। कचहरी क्षेत्र में पार्किंग न होने से वादकारियों और अन्य लोगों को वाहन खड़ा करने में परेशानी होती है।
जाम में घंटों फंसी रहती हैं स्कूली बसें : दोपहर बाद निजी स्कूलों की छुट्टी के समय शहर में यातायात का दबाव अचानक बढ़ जाता है। गांधीनगर, पुरानी बस्ती और अस्पताल चौराहे पर जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है। बच्चों से भरी स्कूली बसें भी घंटों जाम में फंसी रहती हैं। स्कूल बस चालक राजू ने बताया कि गांधीनगर में सबसे अधिक परेशानी होती है। छुट्टी के समय बाजार में भीड़ रहती है और सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े होने से रास्ता काफी संकरा हो जाता है। ऐसे में बस निकालने में अधिक समय लगता है और दुर्घटना से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
10 साल से पार्किंग स्थल बनाने की कवायद : शहर में पार्किंग स्थल विकसित करने की कवायद करीब 10 साल से चल रही है, लेकिन अब तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। नगर पालिका ने सबसे पहले गांधीनगर स्थित टाउन क्लब में भूमिगत पार्किंग बनाने की योजना तैयार की थी।
बजट के अभाव में योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने पहल की। करीब दो साल पहले बोर्ड की बैठक में उसी स्थान पर भूमिगत पार्किंग बनाने का प्रस्ताव शामिल किया गया। हालांकि, यह योजना भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।
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मुख्य बाजार गांधीनगर, पुरानी बस्ती, मंगलबाजार, पांडेय बाजार और करूआ बाबा जैसे भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लोग मजबूरी में सड़क और पटरियों पर वाहन खड़ा कर रहे हैं। सड़क किनारे वाहन खड़ा करने पर ट्रैफिक या सिविल पुलिस चालान करती है तो वाहन स्वामियों से कहासुनी होने लगती है। वाहन चालक पुलिस से ही सवाल करते हैं कि आखिर गाड़ी खड़ी कहां करें।
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पार्किंग की व्यवस्था नहीं होने से पुलिसकर्मी भी निरुत्तर हो जाते हैं। गांधीनगर बाजार में कंपनीबाग से रोडवेज तक सड़क के दोनों ओर दोपहिया और चारपहिया वाहन खड़े रहते हैं। सुबह 11 बजे के बाद बाजार में भीड़ बढ़ने के साथ समस्या गंभीर होने लगती है और रात करीब आठ बजे तक यही स्थिति रहती है। सड़क संकरी होने से वाहनों का दबाव बढ़ते ही जाम लग जाता है।
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बृहस्पतिवार को हनुमानगढ़ी के पास जाम में फंसी स्कूटी सवार रिंकी ने बताया कि गांधीनगर में रोज जाम की समस्या रहती है। टाउन क्लब से एसबीआई मुख्य शाखा तक करीब एक किलोमीटर के रास्ते में अक्सर जाम से जूझना पड़ता है। बाइक सवार राजेश ने बताया कि फुटपाथ और सड़क के किनारे वाहन खड़े होने से रास्ता संकरा हो जाता है। इससे यातायात बढ़ते ही जाम लग जाता है।
रोडवेज के पास नेहरू तिराहे पर ट्रैफिक पुलिस दिनभर सड़क किनारे वाहन खड़ा करने से रोकती है। यहां भी पार्किंग को लेकर वाहन चालकों और पुलिस के बीच कहासुनी होती रहती है। पुरानी बस्ती के मंगलबाजार, करूआ बाबा और पांडेय बाजार में भी स्थिति इससे अलग नहीं है। कचहरी क्षेत्र में पार्किंग न होने से वादकारियों और अन्य लोगों को वाहन खड़ा करने में परेशानी होती है।
जाम में घंटों फंसी रहती हैं स्कूली बसें : दोपहर बाद निजी स्कूलों की छुट्टी के समय शहर में यातायात का दबाव अचानक बढ़ जाता है। गांधीनगर, पुरानी बस्ती और अस्पताल चौराहे पर जाम की स्थिति और गंभीर हो जाती है। बच्चों से भरी स्कूली बसें भी घंटों जाम में फंसी रहती हैं। स्कूल बस चालक राजू ने बताया कि गांधीनगर में सबसे अधिक परेशानी होती है। छुट्टी के समय बाजार में भीड़ रहती है और सड़क के दोनों ओर वाहन खड़े होने से रास्ता काफी संकरा हो जाता है। ऐसे में बस निकालने में अधिक समय लगता है और दुर्घटना से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
10 साल से पार्किंग स्थल बनाने की कवायद : शहर में पार्किंग स्थल विकसित करने की कवायद करीब 10 साल से चल रही है, लेकिन अब तक इसे अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। नगर पालिका ने सबसे पहले गांधीनगर स्थित टाउन क्लब में भूमिगत पार्किंग बनाने की योजना तैयार की थी।
बजट के अभाव में योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने पहल की। करीब दो साल पहले बोर्ड की बैठक में उसी स्थान पर भूमिगत पार्किंग बनाने का प्रस्ताव शामिल किया गया। हालांकि, यह योजना भी अभी तक धरातल पर नहीं उतर सकी है।