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शहर से गायब हो गए लाखों के पौधे
basti
Updated Fri, 27 Jul 2018 11:45 PM IST
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मालवीय राोड पर लगाए गए थ्ाे पाौघ्ाे।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। शासन ने वर्ष 2015-16 में एक ही दिन में पांच करोड़ पौधों का रोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरा प्रदेश जुट गया। उसी में नगर पालिका परिषद भी शामिल रहा है।
तत्कालीन जिम्मेदारों ने शहर मेें पौधरोपण के लिए जमीन की तलाश शुरू की तो मालवीय रोड के दोनों ओर जमीन मिल गई। यहां पालिका ने सबसे महंगे अलंकृत पाम का पौधा रोपित कराया। औपचारिकता पूरी हो गई और पालिका ने पौधे के एवज में करीब दो लाख रुपये भी भुगतान कर दिए। दो-चार दिन तो ये पौधे नजर आए, मगर उसके बाद अधिकांश पौधे गायब हो गए। माह भर के अंदर ही यहां के सारे पौधे गायब हो गए। इन पौधों की न तो पालिका ने सुध ली, न उन लोगों ने जिनके आवास के सामने पौधों का रोपण हुआ था।
पालिका के अभिलेखों में दर्ज ये पौधे आज भी मौजूद हैं, मगर धरातल पर उनका अस्तित्व नहीं है। विभागीय जानकारों की मानें तो यहां कुल एक हजार पौधे लगाए गए थे, जिनकी कीमत दो लाख रुपये के आसपास थी। तय हुआ था कि इसके रोपण के बाद उसकी सुरक्षा भी की जाएगी। इसके लिए ट्री गार्ड लगाए जाएंगे, मगर न तो पौधे ही कहीं हैं और न ट्री गार्ड। खबर तो यह भी है कि पौधे की खरीद में भी खेल हुआ। जिस दर पर पौधों की खरीद की गई उससे कम में यह पौधे बाजार में मौजूद थे, मगर तत्कालीन जिम्मेदारों ने अधिक धन खर्च कर इनको खरीदा, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं की गई। अधिशासी अधिकारी डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी कहते हैं कि पौध रोपण का मामला संज्ञान में नहीं है। चूंकि यह तीन वर्ष पुरानी बात है। ऐसे में इसके अभिलेखों की जांच कराई जाएगी।
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तत्कालीन जिम्मेदारों ने शहर मेें पौधरोपण के लिए जमीन की तलाश शुरू की तो मालवीय रोड के दोनों ओर जमीन मिल गई। यहां पालिका ने सबसे महंगे अलंकृत पाम का पौधा रोपित कराया। औपचारिकता पूरी हो गई और पालिका ने पौधे के एवज में करीब दो लाख रुपये भी भुगतान कर दिए। दो-चार दिन तो ये पौधे नजर आए, मगर उसके बाद अधिकांश पौधे गायब हो गए। माह भर के अंदर ही यहां के सारे पौधे गायब हो गए। इन पौधों की न तो पालिका ने सुध ली, न उन लोगों ने जिनके आवास के सामने पौधों का रोपण हुआ था।
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पालिका के अभिलेखों में दर्ज ये पौधे आज भी मौजूद हैं, मगर धरातल पर उनका अस्तित्व नहीं है। विभागीय जानकारों की मानें तो यहां कुल एक हजार पौधे लगाए गए थे, जिनकी कीमत दो लाख रुपये के आसपास थी। तय हुआ था कि इसके रोपण के बाद उसकी सुरक्षा भी की जाएगी। इसके लिए ट्री गार्ड लगाए जाएंगे, मगर न तो पौधे ही कहीं हैं और न ट्री गार्ड। खबर तो यह भी है कि पौधे की खरीद में भी खेल हुआ। जिस दर पर पौधों की खरीद की गई उससे कम में यह पौधे बाजार में मौजूद थे, मगर तत्कालीन जिम्मेदारों ने अधिक धन खर्च कर इनको खरीदा, लेकिन उनकी सुरक्षा को लेकर कोई चिंता नहीं की गई। अधिशासी अधिकारी डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी कहते हैं कि पौध रोपण का मामला संज्ञान में नहीं है। चूंकि यह तीन वर्ष पुरानी बात है। ऐसे में इसके अभिलेखों की जांच कराई जाएगी।
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