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Basti News: फिर बढ़ने लगी सरयू, बांधों पर नदी का दबाव
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पकड़ी संग्राम गांव के पास कटान करती नदी संवाद
बस्ती। पांच दिन तक घटने के बाद सरयू नदी का जलस्तर बुधवार को फिर बढ़ने लगा। 24 घंटे में जलस्तर 15 सेंटीमीटर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित और तटबंध विहीन गांवों में फिर हलचल बढ़ गई है। हालांकि, नदी अभी खतरे के निशान से 17 सेंटीमीटर नीचे है। केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार बुधवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.56 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 92.73 मीटर है।
जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बसे गांवों के आसपास पानी फिर पहुंचने लगा है। खेतों में जलभराव और रास्तों पर कीचड़ से ग्रामीणों की मुश्किलें बनी हुई हैं। सुविका बाबू समेत कई गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। ग्रामीण नाव और मोटरबोट के सहारे जरूरी सामान लाने-ले जाने को मजबूर हैं। पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहराता जा रहा है। पशुपालक नाव से तटबंध तक पहुंचकर हरा चारा लेकर गांव लौट रहे हैं। पानी से घिरे गांवों में गृहस्थी सहेजने के साथ ग्रामीण पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था में जुटे हैं।
दुबौलिया संवाद के अनुसार सरयू का जलस्तर बढ़ने से तटबंध विहीन सतहा, बलुईया, भुवरिया और जेठूपुरवा समेत कई गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। मैरुंड गांव सुविका बाबू में लोगों की दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई हैं। दैनिक जरूरतों के लिए ग्रामीण मोटरबोट के सहारे आवागमन कर रहे हैं। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में नदी का दबाव बढ़ गया है। उमरिया रिंग बांध पर भी नदी का दबाव बढ़ने से आसपास के ग्रामीणों में चिंता है।
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कटान प्रभावित गांवों में घर और खेत बचाने की चिंता
विक्रमजोत। सरयू का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान प्रभावित गांवों में भी बेचैनी बढ़ गई है। बीडी तटबंध के अंदर बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों में ग्रामीण घर और खेत बचाने को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के साथ ही नदी ने कटान शुरू कर दिया था। अब जलस्तर बढ़ने से कटान तेज होने की आशंका है। खेतों में सड़ रही फसलों और वनस्पतियों से दुर्गंध उठने लगी है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में दवा का छिड़काव कराने, बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और कटान पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की मांग की है।
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महुआपार कला समेत कई गांवों पर कटान का खतरा
कुदरहा। कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण तरफ बसे महुआपार कला, मईपुर, बैडारी एहतमाली और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों पर सरयू की कटान का खतरा बना हुआ है। जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता फिर बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर नदी की धारा घरों के करीब पहुंच गई है। नदी किनारे की मिट्टी लगातार कट रही है। इससे घर और खेत नदी में समाने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों के सामने घर और कृषि भूमि दोनों को बचाने की चुनौती है।
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कोट
कटान प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है। कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। तटबंध विहीन गांवों के लोगों को अलर्ट किया गया है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड, बस्ती
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जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में बसे गांवों के आसपास पानी फिर पहुंचने लगा है। खेतों में जलभराव और रास्तों पर कीचड़ से ग्रामीणों की मुश्किलें बनी हुई हैं। सुविका बाबू समेत कई गांव अभी भी बाढ़ के पानी से घिरे हैं। ग्रामीण नाव और मोटरबोट के सहारे जरूरी सामान लाने-ले जाने को मजबूर हैं। पशुओं के लिए चारे का संकट भी गहराता जा रहा है। पशुपालक नाव से तटबंध तक पहुंचकर हरा चारा लेकर गांव लौट रहे हैं। पानी से घिरे गांवों में गृहस्थी सहेजने के साथ ग्रामीण पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था में जुटे हैं।
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दुबौलिया संवाद के अनुसार सरयू का जलस्तर बढ़ने से तटबंध विहीन सतहा, बलुईया, भुवरिया और जेठूपुरवा समेत कई गांवों के ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। मैरुंड गांव सुविका बाबू में लोगों की दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई हैं। दैनिक जरूरतों के लिए ग्रामीण मोटरबोट के सहारे आवागमन कर रहे हैं। कटरिया-चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर से खलवा गांव तक करीब दो किलोमीटर के दायरे में नदी का दबाव बढ़ गया है। उमरिया रिंग बांध पर भी नदी का दबाव बढ़ने से आसपास के ग्रामीणों में चिंता है।
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कटान प्रभावित गांवों में घर और खेत बचाने की चिंता
विक्रमजोत। सरयू का जलस्तर बढ़ने के साथ कटान प्रभावित गांवों में भी बेचैनी बढ़ गई है। बीडी तटबंध के अंदर बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों में ग्रामीण घर और खेत बचाने को लेकर चिंतित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बाढ़ के साथ ही नदी ने कटान शुरू कर दिया था। अब जलस्तर बढ़ने से कटान तेज होने की आशंका है। खेतों में सड़ रही फसलों और वनस्पतियों से दुर्गंध उठने लगी है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रभावित इलाकों में दवा का छिड़काव कराने, बाढ़ प्रभावित किसानों को मुआवजा देने और कटान पीड़ित परिवारों के पुनर्वास की मांग की है।
महुआपार कला समेत कई गांवों पर कटान का खतरा
कुदरहा। कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण तरफ बसे महुआपार कला, मईपुर, बैडारी एहतमाली और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों पर सरयू की कटान का खतरा बना हुआ है। जलस्तर बढ़ने से ग्रामीणों की चिंता फिर बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि कई स्थानों पर नदी की धारा घरों के करीब पहुंच गई है। नदी किनारे की मिट्टी लगातार कट रही है। इससे घर और खेत नदी में समाने का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों के सामने घर और कृषि भूमि दोनों को बचाने की चुनौती है।
कोट
कटान प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है। कटानरोधी कार्य कराए जा रहे हैं। तटबंध विहीन गांवों के लोगों को अलर्ट किया गया है।
-दिनेश कुमार, एक्सईएन, बाढ़ खंड, बस्ती