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Basti News: ...तब कारसेवकों के खून से लाल हो गई थी अवध की धरा

Tue, 23 Jan 2024 02:43 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Tue, 23 Jan 2024 02:43 AM IST
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...then the blood of kar sevaks
- प्रत्यक्षदर्शियों के मुख से आपबीती सुनकर खड़े हो जाते हैं रोंगटे
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- आंदोलन में किसी सिर फटा था तो किसी का टूटा था हाथ
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 30 अक्टूबर 1990 का दिन कारसेवक और रामदूत शायद ही कभी भूल पाएं। पेंदा निवासी बम बहादुर सिंह उन दिनों कारसेवक रहे। वह बताते हैं कि अयोध्या में गोलीकांड के बाद कारसेवकों के खून के छींटे से अवध की धरा लाल हो गई थी। जहां कारसेवक दिख जाते थे, वहीं पुलिस बंदूक तान देती थी। जो जहां मिला उसे वहीं मारना शुरू कर देती थी। किसी का सिर फट जाता था तो किसी के हाथ-पांव टूट जाते थे।
स्थिति यह थी कि अयोध्या के बाहर भी गांव, कस्बों, चौराहों पर भी कारसेवकों के खून से सनी मिट्टी दिख जाती थी। पुलिस से बचने के लिए मनोरमा नदी के तट पर झाड़ियों में रात काटनी पड़ती थी। पुलिस का खौफ ऐसा था कि लोग घरों के बाहर नहीं निकलते थे।
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बताते हैं कि हमने तबाही का मंजर देखा है। पुलिस कारसेवकों को अयोध्या जाने से रोकने के लिए पहरा देती थी। हम लोगों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस रात-रात में चुपके से घर पर दबिश देती थी। गिरफ्तारी से बचने के लिए गांव के बगल से बह रही मनोरमा नदी के तट पर झाड़ियों में रात काटनी पड़ती थी। अन्य कारसेवकों को साथ लेकर रामबाग चकोही से छावनी के गुंडा कुंवर प्रतापपुर, बभनगांवा होकर ठोकर नंबर 10 से अयोध्या के लिए रवाना होते थे।
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यहां से कुछ कारसेवक नाव और कुछ तैर कर सरयू नदी पार करते थे। हमारे दल को पुलिस ने राम जन्म भूमि से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तमाम यातनाएं भी मिलीं लेकिन हम हे राम कहकर सहते रहे। अब रामलला अपने महल में विराजमान हो गए हैं। ऐसे लग रहा है कि सारे तीर्थ पूरे हो गए। खरका निवासी कमलेश सिंह हमारे गांव से हम तीन लोग आंदोलन में गए थे। पुलिस ने लाठी से पीटा था। खून बहाया, भूखे रहे फिर भी राम के ही रहे। अब सब बातें कहानी लगती हैं। जल्दी ही प्रभू के दर्शन करने जाऊंगा। खरका निवासी हरिनाथ सिंह बताते हैं कि वह मंजर यादकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लाठियां हमने भी खाई, खून बहाया लेकिन मंदिर की मांग को लेकर डटे रहे। आज जब रामलला मंदिर में विराजमान हो गए हैं तो ऐसा लग रहा है कि जीवन सफल हो गया।
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