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Basti News: उल्टी-दस्त के रोगियों की भरमार, चिल्ड्रेन वार्ड फुल
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जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती बच्चे संवाद
बस्ती। मौसम में बदलाव के साथ जिले में बुखार और डायरिया के मरीज बढ़ गए हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। बृहस्पतिवार को बाल रोग विभाग की ओपीडी में 200 से अधिक बच्चे उपचार के लिए पहुंचे। इनमें 12 बच्चों को गंभीर हालत में भर्ती करना पड़ा। चिल्ड्रेन वार्ड के 24 बेड पर 30 बच्चे भर्ती हैं। वहीं, पीआईसीयू के 10 बेड में चार बच्चे भर्ती हैं। इनमें सभी हाईग्रेड फीवर से पीड़ित बताए गए।
चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में उल्टी-दस्त, पेट में मरोड़, बुखार, भूख न लगना और मिचली की शिकायत अधिक मिल रही है। कुछ बच्चों में पीलिया के लक्षण भी मिले हैं। दूषित पानी और मौसम में बदलाव को बीमारी बढ़ने की प्रमुख वजह माना जा रहा है। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती शिवम, मीनाक्षी, आयांश और अंकित डायरिया से पीड़ित हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि बच्चे बुखार के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। समय पर देखभाल न मिलने पर कुछ बच्चों में तेज बुखार की स्थिति बन जा रही है। ओपीडी में आने वाले बच्चों में डायरिया और बुखार के मरीज अधिक हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह ने बताया कि डायरिया में बुखार के साथ बदहजमी, भूख न लगना, मिचली, पतले दस्त और कई बार उल्टी-दस्त की समस्या एक साथ होती है। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने के साथ समय पर चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
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तेज बुखार के साथ डेंगू के मरीजों की भी बढ़ी संख्या
जिला अस्पताल में तेज बुखार के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की सैंपलिंग कराई जा रही है। मेडिसिन ओपीडी के तीन फिजिशियन कक्षों में बृहस्पतिवार को करीब 346 मरीजों को परामर्श दिया गया। इनमें बुखार और दस्त के मरीज अधिक रहे। फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है।
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चार दिन में नहीं सुधरा पीलिया-बुखार, बच्चे को किया रेफर
चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती 13 वर्षीय सिकंदर निवासी उचवा टोला, नगर पालिका बस्ती को छह सितंबर को बुखार की शिकायत पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन चार दिन बाद भी उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। पीलिया बढ़ने और बुखार कम न होने पर 10 सितंबर को उसे रेफर कर दिया गया। परिजन उसे मेडिकल कॉलेज बस्ती ले गए।
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14 से 15 सौ जांच रोजाना, स्वाइन फ्लू के सैंपल भी लिए
बदले मौसम का असर जिला अस्पताल के क्षेत्रीय निदान केंद्र की पैथोलॉजी में भी दिख रहा है। यहां रोजाना करीब 250 से 300 सैंपल लिए जा रहे हैं और 1400 से 1500 प्रकार की जांच हो रही हैं। इनमें सीबीसी, एलएफटी, केएफटी और शुगर की जांच प्रमुख हैं। डेंगू की रोजाना आठ से 10 जांच की जा रही हैं। स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों के भी सैंपल लिए जा रहे हैं। बुधवार को तीन सैंपल मेडिकल कॉलेज बस्ती भेजे गए थे। बृहस्पतिवार को तीनों की रिपोर्ट निगेटिव आई।
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तीन लावारिस मरीज, अपनों की तलाश में आंखें
जिला अस्पताल में तीन अज्ञात मरीज भर्ती हैं। मेडिकल वार्ड में भर्ती 70 वर्षीय बुजुर्ग एक जुलाई 2026 से, 35 वर्षीय पुरुष पांच मई 2026 से और 30 वर्षीय महिला बृहस्पतिवार से भर्ती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार तीनों के बारे में अभी तक कोई परिजन जानकारी लेने नहीं पहुंचा है। एसआईसी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि तीनों मरीज अज्ञात हैं। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। परिजनों की तलाश के प्रयास किए जा रहे हैं।
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संक्रामक रोगों के आंकड़े पर एक नजर
रोग
मरीज
डेंगू
11
हाईग्रेड जेई
03
एईएस
09
चिकनगुनिया
01
स्क्रब टाइफस 12
मलेरिया
07
लेप्टोस्पायरोसिस
04
हाईग्रेड फीवर
636
नोट : आंकड़े जनवरी 2026 से अब तक के हैं।
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कोट
डायरिया होने पर मरीज को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें। बुखार होने पर माथे पर पानी की भीगी पट्टी रख सकते हैं। तली-भुनी और बासी चीजों से परहेज करें। ठंडा पानी न पिएं और दूषित पानी से बचें। हालत बिगड़ने पर मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल ले जाएं।
-डॉ. अनिल शर्मा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
कोट
संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए टीमें लगाई गई हैं। जहां भी रोगी मिल रहे हैं, वहां तत्काल टीम भेजकर निरोधात्मक कार्रवाई कराई जा रही है।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती
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चिकित्सकों के अनुसार, बच्चों में उल्टी-दस्त, पेट में मरोड़, बुखार, भूख न लगना और मिचली की शिकायत अधिक मिल रही है। कुछ बच्चों में पीलिया के लक्षण भी मिले हैं। दूषित पानी और मौसम में बदलाव को बीमारी बढ़ने की प्रमुख वजह माना जा रहा है। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती शिवम, मीनाक्षी, आयांश और अंकित डायरिया से पीड़ित हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि बच्चे बुखार के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं। समय पर देखभाल न मिलने पर कुछ बच्चों में तेज बुखार की स्थिति बन जा रही है। ओपीडी में आने वाले बच्चों में डायरिया और बुखार के मरीज अधिक हैं।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एके सिंह ने बताया कि डायरिया में बुखार के साथ बदहजमी, भूख न लगना, मिचली, पतले दस्त और कई बार उल्टी-दस्त की समस्या एक साथ होती है। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देने के साथ समय पर चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
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तेज बुखार के साथ डेंगू के मरीजों की भी बढ़ी संख्या
जिला अस्पताल में तेज बुखार के मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की सैंपलिंग कराई जा रही है। मेडिसिन ओपीडी के तीन फिजिशियन कक्षों में बृहस्पतिवार को करीब 346 मरीजों को परामर्श दिया गया। इनमें बुखार और दस्त के मरीज अधिक रहे। फिजिशियन डॉ. एसडी ओझा ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी है।
चार दिन में नहीं सुधरा पीलिया-बुखार, बच्चे को किया रेफर
चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती 13 वर्षीय सिकंदर निवासी उचवा टोला, नगर पालिका बस्ती को छह सितंबर को बुखार की शिकायत पर परिजन जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन चार दिन बाद भी उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। पीलिया बढ़ने और बुखार कम न होने पर 10 सितंबर को उसे रेफर कर दिया गया। परिजन उसे मेडिकल कॉलेज बस्ती ले गए।
14 से 15 सौ जांच रोजाना, स्वाइन फ्लू के सैंपल भी लिए
बदले मौसम का असर जिला अस्पताल के क्षेत्रीय निदान केंद्र की पैथोलॉजी में भी दिख रहा है। यहां रोजाना करीब 250 से 300 सैंपल लिए जा रहे हैं और 1400 से 1500 प्रकार की जांच हो रही हैं। इनमें सीबीसी, एलएफटी, केएफटी और शुगर की जांच प्रमुख हैं। डेंगू की रोजाना आठ से 10 जांच की जा रही हैं। स्वाइन फ्लू के लक्षण वाले मरीजों के भी सैंपल लिए जा रहे हैं। बुधवार को तीन सैंपल मेडिकल कॉलेज बस्ती भेजे गए थे। बृहस्पतिवार को तीनों की रिपोर्ट निगेटिव आई।
तीन लावारिस मरीज, अपनों की तलाश में आंखें
जिला अस्पताल में तीन अज्ञात मरीज भर्ती हैं। मेडिकल वार्ड में भर्ती 70 वर्षीय बुजुर्ग एक जुलाई 2026 से, 35 वर्षीय पुरुष पांच मई 2026 से और 30 वर्षीय महिला बृहस्पतिवार से भर्ती है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार तीनों के बारे में अभी तक कोई परिजन जानकारी लेने नहीं पहुंचा है। एसआईसी डॉ. अनिल कुमार ने बताया कि तीनों मरीज अज्ञात हैं। इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दे दी गई है। परिजनों की तलाश के प्रयास किए जा रहे हैं।
संक्रामक रोगों के आंकड़े पर एक नजर
रोग
मरीज
डेंगू
11
हाईग्रेड जेई
03
एईएस
09
चिकनगुनिया
01
स्क्रब टाइफस 12
मलेरिया
07
लेप्टोस्पायरोसिस
04
हाईग्रेड फीवर
636
नोट : आंकड़े जनवरी 2026 से अब तक के हैं।
कोट
डायरिया होने पर मरीज को लगातार ओआरएस का घोल पिलाते रहें। बुखार होने पर माथे पर पानी की भीगी पट्टी रख सकते हैं। तली-भुनी और बासी चीजों से परहेज करें। ठंडा पानी न पिएं और दूषित पानी से बचें। हालत बिगड़ने पर मरीज को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या जिला अस्पताल ले जाएं।
-डॉ. अनिल शर्मा, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
कोट
संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए टीमें लगाई गई हैं। जहां भी रोगी मिल रहे हैं, वहां तत्काल टीम भेजकर निरोधात्मक कार्रवाई कराई जा रही है।
-डॉ. राजीव निगम, सीएमओ, बस्ती