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Basti News: मर्ज से ज्यादा मरीज माफिया से खतरा
Sun, 16 Mar 2025 12:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 16 Mar 2025 12:03 AM IST
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बस्ती। मरीज माफियाओं की करतूत मरीजों और तीमारदारों को मर्ज से ज्यादा भारी पड़ रही है। कभी सरकारी अस्पतालों से वरगलाकर वे उन्हें निजी अस्पतालों में कमीशन लेकर बेच रहे हैं तो कई बार मरीजों को निजी एंबुलेंस वाले ही मनमाने अस्पताल पहुंचा दे रहे हैं।
यहां उनसे जांच और इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें मरीज माफियाओं ने रेफर मरीजों को निजी अस्पताल के हवाले कर दिया, बाद में या तो मरीज की जान चली गई या कई गुना रकम चुकानी पड़ी।
अस्पतालों से लामा (बिना चिकित्सकीय सलाह के जाने वाले) मरीजों के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। जिला महिला चिकित्सालय में तीन महीने में लामा मरीजों की संख्या 104 है। जबकि जिला अस्पताल में इस तरह के मरीजों की संख्या एक महीने में पांच सौ से ज्यादा है। वहीं, तीन महीने में ओपेक कैली से 610 मरीज बिना किसी सूचना के अस्पताल से चले गए। पड़ताल में सामने आया कि इस कारगुजारी में अस्पताल के लोग भी मरीज माफिया का बखूबी साथ दे रहे हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय और जिला अस्पताल दोनों जगहों पर यह खेल चल रहा है। इन मरीज माफिया के जाल में फंसने वाले ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले होते हैं। इनके बहकावे में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज आते हैं। झांसे में आकर निजी अस्पताल पहुंचे मरीज के तीमारदारों से इलाज के नाम पर जमकर उगाही की जाती है। इसमें इन दलालों का अच्छा खासा कमीशन शामिल रहता है।
ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवा तक कैरियर के रूप में दलाल घूम रहे हैं। डॉक्टरों एवं चिकित्सकीय स्टाफ के इर्द-गिर्द इन्हें अक्सर देखा जाता है। अस्पताल में नए मरीज के आते ही यह सक्रिय हो जाते हैं। पहले तीमारदारों के करीब पहुंचकर सेवा भाव का दिखावा करते हैं। विश्वास जमते ही अमुक निजी अस्पताल में चलने का सुझाव देते हैं।
झांसे में आने का कारण ये भी ः सरकारी अस्पताल में मरीज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर इलाज करने से हाथ खड़े कर देते हैं। इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के साथ रेफर कागज तैयार कर दिया जाता है। अधिकांश मामलों में गंभीर रोगियों को भर्ती भी नहीं किया जाता है। इसी तरह जिला महिला चिकित्सालय में प्रसूताओं के आने पर पहले अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड जांच की रिपोर्ट देखी जाती है।
गर्भाशय में पानी की कमी, खून की कमी या हाई ब्लड प्रेशर होने पर मरीज को भर्ती न करके मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दे दी जाती है। इस स्थिति का मरीज माफिया पूरा लाभ उठाते हैं। ऐसा ही नेटवर्क जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के ओपेक कैली में भी सक्रिय है।
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यहां उनसे जांच और इलाज के नाम पर मनमानी वसूली की जा रही है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जिसमें मरीज माफियाओं ने रेफर मरीजों को निजी अस्पताल के हवाले कर दिया, बाद में या तो मरीज की जान चली गई या कई गुना रकम चुकानी पड़ी।
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अस्पतालों से लामा (बिना चिकित्सकीय सलाह के जाने वाले) मरीजों के आंकड़े इसकी गवाही दे रहे हैं। जिला महिला चिकित्सालय में तीन महीने में लामा मरीजों की संख्या 104 है। जबकि जिला अस्पताल में इस तरह के मरीजों की संख्या एक महीने में पांच सौ से ज्यादा है। वहीं, तीन महीने में ओपेक कैली से 610 मरीज बिना किसी सूचना के अस्पताल से चले गए। पड़ताल में सामने आया कि इस कारगुजारी में अस्पताल के लोग भी मरीज माफिया का बखूबी साथ दे रहे हैं।
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जिला महिला चिकित्सालय और जिला अस्पताल दोनों जगहों पर यह खेल चल रहा है। इन मरीज माफिया के जाल में फंसने वाले ज्यादातर मरीज ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले होते हैं। इनके बहकावे में प्रतिदिन 20 से 25 मरीज आते हैं। झांसे में आकर निजी अस्पताल पहुंचे मरीज के तीमारदारों से इलाज के नाम पर जमकर उगाही की जाती है। इसमें इन दलालों का अच्छा खासा कमीशन शामिल रहता है।
ओपीडी से लेकर इमरजेंसी सेवा तक कैरियर के रूप में दलाल घूम रहे हैं। डॉक्टरों एवं चिकित्सकीय स्टाफ के इर्द-गिर्द इन्हें अक्सर देखा जाता है। अस्पताल में नए मरीज के आते ही यह सक्रिय हो जाते हैं। पहले तीमारदारों के करीब पहुंचकर सेवा भाव का दिखावा करते हैं। विश्वास जमते ही अमुक निजी अस्पताल में चलने का सुझाव देते हैं।
झांसे में आने का कारण ये भी ः सरकारी अस्पताल में मरीज की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर इलाज करने से हाथ खड़े कर देते हैं। इमरजेंसी में प्राथमिक उपचार के साथ रेफर कागज तैयार कर दिया जाता है। अधिकांश मामलों में गंभीर रोगियों को भर्ती भी नहीं किया जाता है। इसी तरह जिला महिला चिकित्सालय में प्रसूताओं के आने पर पहले अल्ट्रासाउंड एवं ब्लड जांच की रिपोर्ट देखी जाती है।
गर्भाशय में पानी की कमी, खून की कमी या हाई ब्लड प्रेशर होने पर मरीज को भर्ती न करके मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दे दी जाती है। इस स्थिति का मरीज माफिया पूरा लाभ उठाते हैं। ऐसा ही नेटवर्क जिला चिकित्सालय एवं मेडिकल कॉलेज के ओपेक कैली में भी सक्रिय है।