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Basti News: मिलावट की गणित बिगाड़ रही सेहत... महंगा दूध, सस्ता खोआ
Fri, 25 Oct 2024 12:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 25 Oct 2024 12:45 AM IST
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दूध से बनने वाली मिठाई-पनीर में हो रही मिलावट, स्वास्थ्य के लिए खतरा
दुकानों पर हो रही विभागीय टीम की धमक, नमूने भरने में भी रहम और सितम का खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बाजार में मिलावट की गणित सेहत बिगाड़ रही है। धंधेबाजों का अपना अलग नुस्खा है। दुकानों पर किस्म-किस्म की मिठाई, खोआ, पनीर, घी दिखने में ताजा तो हैं। मगर, यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी है। जब तक धंधेबाजों के इस गणित को समझेंगे तब तक काफी कुछ गंवा चुके होंगे। शुद्ध दूध महंगा है और उत्पादन कम है फिर भी बाजार में इससे निर्मित उत्पादों की भरमार है। यकीन, मानिए दाल में कुछ काला है। आप स्वयं सजग रहिए, यही आपका बचाव है।
यदि आप इस मुगालते में हैं कि दुकान पर मिलने वाला खोआ, मिठाई, पनीर सब शुद्ध है तो धोखा खा जाएंगे। कटरा के उमाशंकर कहते हैं कि मिलावटी खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण रखने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम शहर से लेकर कस्बों तक दौड़ भाग भले ही तेज किए हुए है। मगर, इन सामग्रियों की शुद्धता पर आंख मूंदकर भरोसा कतई न करिए।
बाजार में आए राम प्रताप ने कहा कि धंधेबाजों के इस खेल में जिम्मेदार भी बचते-बचाते शामिल रहते हैं। यही वजह है कि छापे के दौरान कहीं रहम तो कहीं सितम का खेला चल रहा है। रहम बरसाने के बदले अलग खुशी मिलती है और सितम ढाने पर कार्रवाई की जिम्मेदारी पूरी हो रही है। इस दोनों ही खेल में जिम्मेदारों का फायदा है। अब धंधेबाज पर निर्भर है कि वह किस खांचे में खुद को सेट कर पाएगा।
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यदि ऐसा न होता तो सोचिए, पशुपालक के यहां शुद्ध दूध 60 रुपये लीटर मिल रहा और बाजार में खोआ 200 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि एक लीटर शुद्ध दूध से महज 200 से 250 ग्राम खोआ तैयार होता है। गैस एवं मजूदरी का खर्च जोड़ लिया जाए तो एक किलो शुद्ध खोआ की लागत केवल 300 रुपये है। मुनाफा जोड़ने पर इसकी कीमत और बढ़ जाएगी।
पिकौरा दत्तूराय के केशव राम बताते हैं कि जितनी मात्रा में पनीर बिक रही है, उतने मात्रा में दूध का उत्पादन ही नहीं है। चार लीटर दूध फाड़ने पर करीब 900 ग्राम पनीर तैयार होता है। अपने जिले में बड़ा डेयरी उद्योग अभी नहीं है। फिर भी 10 से 15 क्विंटल पनीर की खपत रोजाना हो रही है। इससे काफी हद तक स्पष्ट है कि बिना मिलावट के दूध से बने इन उत्पादों की मांग नहीं पूरी की जा सकती है।
यह हकीकत जिम्मेदार खुद जानते हैं। मगर, धंधेबाजों की सेटिंग के चलते उनकी भी मौन सहमति रहती है। शासन से मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का जब दबाव बढ़ता है तो विभागीय हलचल बढ़ जाती है। नए धंधेबाज कार्रवाई के लपेटे में आ जाते हैं। पुराने एवं रसूखदार लोग आसानी से बच जाते हैं।
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थोक भाव में पहुंचाई जा रही पनीर की खेप
पड़ोसी जनपद अयोध्या एवं बाराबंकी से प्रतिदिन 10 से 15 क्विंटल पनीर की खेप आ रही है। स्थानीय स्तर पर भी कुछ धंधेबाज पनीर तैयार कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि सिंथेटिक दूध एवं विशेष किस्म की लिक्विड से तैयार होने वाली पनीर पानी में रखकर खुले बाजार में बेची जा रही है। इसी तरह मिलावट खोआ की भी खेप इन दिनों बड़े पैमाने पर नवाबगंज और कानपुर से मंगाया जा रहा है।
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मिठाई के निर्माण में उपयोग हो रहा मिलावटी खोआ
छोटी-बड़ी हर तरह की दुकानों पर विभिन्न तरह के मिठाई के निर्माण मिलावटी खोआ का उपयोग किया जा रहा है। मिठाई के कारीगर राम प्रकाश ने बताया कि त्योहार में बर्फी, पेड़ा, लड्डू की मांग बढ़ जाती है। मांग के अनुसार शुद्ध खोआ उपलब्ध नहीं हो पाता है। ऐसे में मिलावटी खोआ ही प्रयोग में लाना पड़ता है। इससे लागत भी कम पड़ती है। मिठाई को दिखने में आकर्षित करने के लिए कलर भी इस्तेमाल किए जाते हैं। कुछ शुद्धता के नाम पर कुछ मेवा के टुकड़े डाल दिए जाते हैं।
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डेकोरेशन पर निर्भर हैं मिठाई की कीमत
मिठाई की कीमत दुकानों के डेकोरेशन और लोकेशन पर निर्भर है। बीच बाजार की दुकान यदि काफी सुसज्जित है तो वहां लड्डू 400 से 700 रुपये किलो बिक रहा है। शहर के कुछ माॅर्डन रेस्टोरेंट में दूध से बने छेना, काजू बर्फी, मेवा बाइट आदि मिठाई 500 से 1700 रुपये किलो तक बिक रही है। इस पर जीएसटी अलग से लगाया जा रहा है। जबकि इनके निर्माण में भी शुद्धता की गारंटी नहीं है। हर जगह मौखिक दावे ही किए जाते हैं।
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14 कारोबारियों पर लगे थे जुर्माने
दुध, पनीर समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के 14 कारोबारियों के नमूने फेल पाए जाने पर केस दर्ज हुआ था। हाल ही में एडीएम न्यायालय में सुनवाई के दौरान इन कारोबारियों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बावजूद इसके विभाग की तरफ से ऐसे मिलावटी उत्पादों की बिक्री पर कोई ठोस रोकथाम नहीं कर सका हैं।
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कोट
मिठाई, दूध, पनीर समेत अन्य खाद्य पदार्थों की चेकिंग कराई जा रही है। नमूने भी भरे जा रहे हैं। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई भी होगी।
-धर्मराज मिश्र, अभिहित अधिकारी
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दुकानों पर हो रही विभागीय टीम की धमक, नमूने भरने में भी रहम और सितम का खेल
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बाजार में मिलावट की गणित सेहत बिगाड़ रही है। धंधेबाजों का अपना अलग नुस्खा है। दुकानों पर किस्म-किस्म की मिठाई, खोआ, पनीर, घी दिखने में ताजा तो हैं। मगर, यह सेहत के लिए नुकसानदेह भी है। जब तक धंधेबाजों के इस गणित को समझेंगे तब तक काफी कुछ गंवा चुके होंगे। शुद्ध दूध महंगा है और उत्पादन कम है फिर भी बाजार में इससे निर्मित उत्पादों की भरमार है। यकीन, मानिए दाल में कुछ काला है। आप स्वयं सजग रहिए, यही आपका बचाव है।
यदि आप इस मुगालते में हैं कि दुकान पर मिलने वाला खोआ, मिठाई, पनीर सब शुद्ध है तो धोखा खा जाएंगे। कटरा के उमाशंकर कहते हैं कि मिलावटी खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण रखने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम शहर से लेकर कस्बों तक दौड़ भाग भले ही तेज किए हुए है। मगर, इन सामग्रियों की शुद्धता पर आंख मूंदकर भरोसा कतई न करिए।
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बाजार में आए राम प्रताप ने कहा कि धंधेबाजों के इस खेल में जिम्मेदार भी बचते-बचाते शामिल रहते हैं। यही वजह है कि छापे के दौरान कहीं रहम तो कहीं सितम का खेला चल रहा है। रहम बरसाने के बदले अलग खुशी मिलती है और सितम ढाने पर कार्रवाई की जिम्मेदारी पूरी हो रही है। इस दोनों ही खेल में जिम्मेदारों का फायदा है। अब धंधेबाज पर निर्भर है कि वह किस खांचे में खुद को सेट कर पाएगा।
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यदि ऐसा न होता तो सोचिए, पशुपालक के यहां शुद्ध दूध 60 रुपये लीटर मिल रहा और बाजार में खोआ 200 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि एक लीटर शुद्ध दूध से महज 200 से 250 ग्राम खोआ तैयार होता है। गैस एवं मजूदरी का खर्च जोड़ लिया जाए तो एक किलो शुद्ध खोआ की लागत केवल 300 रुपये है। मुनाफा जोड़ने पर इसकी कीमत और बढ़ जाएगी।
पिकौरा दत्तूराय के केशव राम बताते हैं कि जितनी मात्रा में पनीर बिक रही है, उतने मात्रा में दूध का उत्पादन ही नहीं है। चार लीटर दूध फाड़ने पर करीब 900 ग्राम पनीर तैयार होता है। अपने जिले में बड़ा डेयरी उद्योग अभी नहीं है। फिर भी 10 से 15 क्विंटल पनीर की खपत रोजाना हो रही है। इससे काफी हद तक स्पष्ट है कि बिना मिलावट के दूध से बने इन उत्पादों की मांग नहीं पूरी की जा सकती है।
यह हकीकत जिम्मेदार खुद जानते हैं। मगर, धंधेबाजों की सेटिंग के चलते उनकी भी मौन सहमति रहती है। शासन से मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने का जब दबाव बढ़ता है तो विभागीय हलचल बढ़ जाती है। नए धंधेबाज कार्रवाई के लपेटे में आ जाते हैं। पुराने एवं रसूखदार लोग आसानी से बच जाते हैं।
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थोक भाव में पहुंचाई जा रही पनीर की खेप
पड़ोसी जनपद अयोध्या एवं बाराबंकी से प्रतिदिन 10 से 15 क्विंटल पनीर की खेप आ रही है। स्थानीय स्तर पर भी कुछ धंधेबाज पनीर तैयार कर रहे हैं। जानकार बताते हैं कि सिंथेटिक दूध एवं विशेष किस्म की लिक्विड से तैयार होने वाली पनीर पानी में रखकर खुले बाजार में बेची जा रही है। इसी तरह मिलावट खोआ की भी खेप इन दिनों बड़े पैमाने पर नवाबगंज और कानपुर से मंगाया जा रहा है।
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मिठाई के निर्माण में उपयोग हो रहा मिलावटी खोआ
छोटी-बड़ी हर तरह की दुकानों पर विभिन्न तरह के मिठाई के निर्माण मिलावटी खोआ का उपयोग किया जा रहा है। मिठाई के कारीगर राम प्रकाश ने बताया कि त्योहार में बर्फी, पेड़ा, लड्डू की मांग बढ़ जाती है। मांग के अनुसार शुद्ध खोआ उपलब्ध नहीं हो पाता है। ऐसे में मिलावटी खोआ ही प्रयोग में लाना पड़ता है। इससे लागत भी कम पड़ती है। मिठाई को दिखने में आकर्षित करने के लिए कलर भी इस्तेमाल किए जाते हैं। कुछ शुद्धता के नाम पर कुछ मेवा के टुकड़े डाल दिए जाते हैं।
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डेकोरेशन पर निर्भर हैं मिठाई की कीमत
मिठाई की कीमत दुकानों के डेकोरेशन और लोकेशन पर निर्भर है। बीच बाजार की दुकान यदि काफी सुसज्जित है तो वहां लड्डू 400 से 700 रुपये किलो बिक रहा है। शहर के कुछ माॅर्डन रेस्टोरेंट में दूध से बने छेना, काजू बर्फी, मेवा बाइट आदि मिठाई 500 से 1700 रुपये किलो तक बिक रही है। इस पर जीएसटी अलग से लगाया जा रहा है। जबकि इनके निर्माण में भी शुद्धता की गारंटी नहीं है। हर जगह मौखिक दावे ही किए जाते हैं।
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14 कारोबारियों पर लगे थे जुर्माने
दुध, पनीर समेत विभिन्न खाद्य पदार्थों के 14 कारोबारियों के नमूने फेल पाए जाने पर केस दर्ज हुआ था। हाल ही में एडीएम न्यायालय में सुनवाई के दौरान इन कारोबारियों पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। बावजूद इसके विभाग की तरफ से ऐसे मिलावटी उत्पादों की बिक्री पर कोई ठोस रोकथाम नहीं कर सका हैं।
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कोट
मिठाई, दूध, पनीर समेत अन्य खाद्य पदार्थों की चेकिंग कराई जा रही है। नमूने भी भरे जा रहे हैं। प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई भी होगी।
-धर्मराज मिश्र, अभिहित अधिकारी