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Basti News: सलाखों के पीछे सौहार्द की खुशबू, मुस्लिम बंदी रख रहे नवरात्र का व्रत
Fri, 20 Oct 2023 12:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 20 Oct 2023 12:40 AM IST
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पांच मुस्लिम बंदियों ने रखा व्रत, कर रहे भजन-कीर्तन
इस बार 334 बंदियों को दी गई है व्रत रखने की अनुमति
मैनुअल के हिसाब से जेल प्रशासन सुविधाएं देने में जुटा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जेल की सलाखों के पीछे से आ रही बयार में सामाजिक सौहार्द की भीनी-भीनी खुशबू घुली हुई है, जो संदेश दे रही है कि मजहब के नाम पर खड़ी की जाने वाली दीवार के कोई मायने नहीं होते। जेल में कैद पांच मुस्लिम बंदी इस खूबसूरत एहसास के वाहक बने हुए हैं। इन्होने नवरात्र में हिंदू बंदियों के साथ उपवास का व्रत लिया है। पांचों बंदी बाकी 329 हिंदू बंदियों के साथ सुबह-शाम आदि शक्ति की न केवल आराधना कर रहे हैं, बल्कि बैरकों में होने वाली दुर्गा आरती में हिस्सा भी ले रहे हैं। भजन-कीर्तन में भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। जेल प्रशासन इस सौहार्दपूर्ण माहौल से गदगद है। वह भी व्रतियों की सुविधा के लिए जेल मैनुअल के हिसाब से प्रबंध करने में जुटा है।
जनपद कारागार में इस समय 737 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें से 334 बंदियों ने नवरात्र में इस बार व्रत रखा है। इनमें पांच मुस्लिम बंदी भी शामिल हैं। नवरात्र व्रत रखने वालों में 31 महिलाएं भी हैं जिसमें 17 विचाराधीन महिला बंदी व 14 सिद्धदोष कैदी हैं। व्रत रखने वालों में 120 सिद्धदोष पुरुष कैदी और 179 विचाराधीन बंदी शामिल हैं।
जेल अधीक्षक विवेकशील त्रिपाठी ने बताया व्रत रखने वाले बंदियों को जेल मैनुअल के हिसाब से फलाहार, दूध आदि के अलावा पूजा-पाठ की सामग्री मुहैया कराई जा रही है। व्रत रखने वाले मुस्लिम बंदियों में गोली उर्फ हफीज, इरफान, फरियाद, साहिल और वसीम नाम के शामिल हैं। इनमें गोली उर्फ अजीज और निसार पूरे नौ दिन का व्रत रखे हुए हैं,जबकि अन्य तीनों पहले और अंतिम दिन का व्रत रख रहे हैं।
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काम का दबाव नहीं, मिल रहा फलाहार
जेल प्रशासन की तरफ से मेडिकल चेकअप में शारीरिक रूप से फिट पाए गए बंदियों को ही व्रत रखने की अनुमति दी गई है। व्रत रहने वालों के लिए केला, आधा लीटर दूध, शक्कर, गुड़, आलू आदि फलाहार के रूप में दिया जा रहा है। साथ ही, सुबह-शाम पूजा-अर्चना के लिए सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। व्रत के दौरान उन पर काम करने का भी दबाव नहीं बनाया जाता है।
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पहुंचा गायत्री परिवार, दिए उपहार
बृहस्पतिवार को गायत्री परिवार के परिब्राजक और अन्य प्रचारक कारागार में बंदियों के साथ भजन-कीर्तन करने पहुंचे। जेल परिसर में प्रवचन का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें बंदियों व कैदियों को सामाजिक समरसता, धर्म और सच्चाई पर कायम रहने की सीख दी गई। उन्हें धार्मिक पुस्तकें और सामान रखने के लिए आलमारी दी गई।
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इस बार 334 बंदियों को दी गई है व्रत रखने की अनुमति
मैनुअल के हिसाब से जेल प्रशासन सुविधाएं देने में जुटा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जेल की सलाखों के पीछे से आ रही बयार में सामाजिक सौहार्द की भीनी-भीनी खुशबू घुली हुई है, जो संदेश दे रही है कि मजहब के नाम पर खड़ी की जाने वाली दीवार के कोई मायने नहीं होते। जेल में कैद पांच मुस्लिम बंदी इस खूबसूरत एहसास के वाहक बने हुए हैं। इन्होने नवरात्र में हिंदू बंदियों के साथ उपवास का व्रत लिया है। पांचों बंदी बाकी 329 हिंदू बंदियों के साथ सुबह-शाम आदि शक्ति की न केवल आराधना कर रहे हैं, बल्कि बैरकों में होने वाली दुर्गा आरती में हिस्सा भी ले रहे हैं। भजन-कीर्तन में भी बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। जेल प्रशासन इस सौहार्दपूर्ण माहौल से गदगद है। वह भी व्रतियों की सुविधा के लिए जेल मैनुअल के हिसाब से प्रबंध करने में जुटा है।
जनपद कारागार में इस समय 737 बंदी निरुद्ध हैं। इनमें से 334 बंदियों ने नवरात्र में इस बार व्रत रखा है। इनमें पांच मुस्लिम बंदी भी शामिल हैं। नवरात्र व्रत रखने वालों में 31 महिलाएं भी हैं जिसमें 17 विचाराधीन महिला बंदी व 14 सिद्धदोष कैदी हैं। व्रत रखने वालों में 120 सिद्धदोष पुरुष कैदी और 179 विचाराधीन बंदी शामिल हैं।
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जेल अधीक्षक विवेकशील त्रिपाठी ने बताया व्रत रखने वाले बंदियों को जेल मैनुअल के हिसाब से फलाहार, दूध आदि के अलावा पूजा-पाठ की सामग्री मुहैया कराई जा रही है। व्रत रखने वाले मुस्लिम बंदियों में गोली उर्फ हफीज, इरफान, फरियाद, साहिल और वसीम नाम के शामिल हैं। इनमें गोली उर्फ अजीज और निसार पूरे नौ दिन का व्रत रखे हुए हैं,जबकि अन्य तीनों पहले और अंतिम दिन का व्रत रख रहे हैं।
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काम का दबाव नहीं, मिल रहा फलाहार
जेल प्रशासन की तरफ से मेडिकल चेकअप में शारीरिक रूप से फिट पाए गए बंदियों को ही व्रत रखने की अनुमति दी गई है। व्रत रहने वालों के लिए केला, आधा लीटर दूध, शक्कर, गुड़, आलू आदि फलाहार के रूप में दिया जा रहा है। साथ ही, सुबह-शाम पूजा-अर्चना के लिए सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। व्रत के दौरान उन पर काम करने का भी दबाव नहीं बनाया जाता है।
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पहुंचा गायत्री परिवार, दिए उपहार
बृहस्पतिवार को गायत्री परिवार के परिब्राजक और अन्य प्रचारक कारागार में बंदियों के साथ भजन-कीर्तन करने पहुंचे। जेल परिसर में प्रवचन का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इसमें बंदियों व कैदियों को सामाजिक समरसता, धर्म और सच्चाई पर कायम रहने की सीख दी गई। उन्हें धार्मिक पुस्तकें और सामान रखने के लिए आलमारी दी गई।