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Basti News: अव्यवस्था की ‘बीमारी’ ले रही गर्भवतियों व नवजातों की जान

Sun, 31 May 2026 01:46 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 31 May 2026 01:46 AM IST
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The 'disease' of chaos is taking the lives of pregnant women and newborns.
महिला अस्पताल की ओपीडी के बाहर भीड़।
बस्ती। मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी आए इसके लिए सरकार कई योजनाएं चला रही है। सुरक्षित प्रसव कराकर मृत्यु दर कम करने के लिए भी तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अव्यवस्था की बीमारी महिलाओं के साथ उसके नवजात की भी जान ले ले रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो 12 माह में 583 नवजातों और 50 गर्भवतियों ने जान गंवाई हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में 43 महिलाओं ने प्रसव के दौरान दम तोड़ दिया। 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 50 पहुंच गया। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग मौत के पीछे प्रसव में जटिलता बताकर इतिश्री कर दी है।
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सीएचसी और पीएचसी पर सुरक्षित प्रसव के तमाम दावे फिलहाल बेमानी साबित हो रहे हैं। जिले में संचालित 14 सीएचसी और 39 पीएचसी में सिर्फ चार सीएचसी पर स्थायी रूप से स्त्री रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। अक्सर उसमें से कई डॉक्टर छुट्टी पर भी चले जाते हैं। इससे सांसत और बढ़ जाती है। जांच और इलाज के अभाव में गर्भवतियों और नवजातों की मौत के साल-दर-साल बढ़ते आंकड़े स्वास्थ्य महकमे की अव्यवस्था की तस्वीर पेश कर रहे हैं। बताते हैं कि यही कारण है कि सरकार की ओर से चलाई जा रही राहत की योजनाएं भी दम तोड़ती नजर आ रही है। साल 2024-25 में जिले में 500 नवजातों की मौत हुई थी, 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 583 तक पहुंच गई। वहीं, व्यवस्था का आलम यह है कि केवल फस्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) हर्रैया, भानपुर और रुधौली व पीएचसी बहादुरपुर में ही स्थायी तौर पर स्त्री रोग विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।
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विशेषज्ञ डॉक्टर के अभाव में महिलाओं को इलाज में रोजाना मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें गांव-कस्बे के करीब के सीएचसी-पीएचसी को छोड़कर जिला महिला अस्पताल की लंबी यात्रा करनी पड़ती है या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना मजबूरी हो जाती है। मजबूर परिवार बीआरडी, कैली रेफर होने के झमेले से बचने को प्राइवेट की ओर रुख करता है।

जिला महिला अस्पताल में नौ में छह पद खाली : जिला महिला अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में स्त्री रोग विशेषज्ञ के नौ पद हैं, जिसमें छह पद खाली है। इसमें सिर्फ तीन पद पर स्थायी विशेषज्ञ की तैनाती है। विशेषज्ञ के रूप में डॉ. संतोष मौर्य, डॉ. सुभाष और डॉ. ममता रानी नियमित पद पर सेवा दे रही हैं। वहीं, एनएचएम से संविदा पर डॉ. सीमा चौधरी की तैनाती है। काम चलाने के लिए डॉ. रंजू कन्नौजिया और डॉ. अनीता वर्मा को 100 बेड हर्रैया महिला अस्पताल से तीन-तीन दिन के लिए अटैच किया गया है। शेष पद रिक्त हैं। इसके अलावा सीएमएस डॉ. अनिल कुमार, इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (ईएमओ) के तीन पद में दो खाली पड़े हुए हैं। एक पर डॉ. आशुतोष शर्मा कार्य कर रहे हैं। सीएचसी-पीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से गांवों से महिलाएं इलाज के लिए यहां पहुंचती हैं और आंकड़ों में रोजाना ढाई से तीन सौ तक की ओपीडी दर्ज होती है। अमूमन सामान्य और सिजेरियन मिलाकर आठ से 10 प्रसव भी रोजाना महिला अस्पताल में कराए जाते हैं। ओटी टेक्निशियन में एक और दो एनेस्थीसिया तैनात हैं।
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