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ठेकेदारों ने हंगामा किया
अमर उजाला बस्ती
Updated Fri, 26 Aug 2016 11:36 PM IST
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टेंडर निकाला।
- फोटो : अमर उजाला
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ठेकेदारों के विरोध और चीफ इंजीनियर के आदेश के बावजूद भी करोड़ों रुपये का टेंडर शनिवार को खोला गया। इसे लेकर ठेकेदारों ने खूब हंगामा किया और विभाग पर चोरी छिपे टेंडर फार्म बेचने का आरोप लगाते हुए जांच कराने की मांग की है। मुख्यमंत्री को फैक्स भेजकर निविदा प्रक्रिया को निरस्त करने और इसकी उच्च स्तरीय जांच कराने की अपील की है। दावा किया गया है कि पिछले तीन सालों में अधिकारियों ने मिलकर पांस सौ करोड़ रुपये का गोलमाल टेंडर में किया गया।
ठेकेदार पिछले तीन दिन से चोरी छिपे और अनियमित रूप से टेंडर फार्म बेचे जाने को लेकर को विरोध जता रहे हैं। मुख्यमंत्री सहित विभाग के आला अधिकारियों और विभागीय मंत्री को पत्रों के जरिए सूचित भी कर चुके हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि विभाग जब टेंडर फार्म ही नहीं बेचा तो टेंडर कैसे निकाल दिया। विरोध कर रहे ठेकेदार रवींद्र मिश्र, ओम प्रकाश पांडेय, ज्ञानेंद्र पांडेय, संतोष कुमार पाठक, वीके श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र चौधरी, अजमतुल्लाह, हरिनरायन द्विवेदी, राम सूरत सिंह, अजय वर्मा, उमेश चंद्र त्रिपाठी, अशोक कुमार सिंह, घनश्याम तिवारी और शत्रुघन पाल सहित अन्य ने बताया कि जब पीडब्लूडी निर्माण खंड का टेंडर निकला तो लाट संख्या 11 के लिए 17 और 12 के लिए 16 टेंडर निकला। टेंडर 35 से 37 फीसदी विभागीय रेट से कम रेट डाला गया। मगर जब प्रांतीय खंड का टेंडर निकला तो किसी में दो तो किसी में तीन टेंडर निकला। वह भी माइनस 17 फीसदी रेट निकला। बताया कि इससे पता चलता है कि प्रांतीय खंड के टेंडर में फार्म बिका ही नहीं। बताया कि कम टेंडर डालने से जहां सरकार का लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान वहीं निर्माण खंड में कम दर पर टेंडर डालने से लाखों रुपये का फायदा हुआ। बताया कि जब कहीं पर टेंडर फार्म बेचा ही नहीं गया तो कैसे टेंडर खुल गया। इससे पता चलता है कि सब कुछ पहले से निर्धारित था। इस मामले में एडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि ठेकेदारों की ओर से शिकायत मिली है, जांच की प्रक्रिया जारी है।
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ठेकेदार पिछले तीन दिन से चोरी छिपे और अनियमित रूप से टेंडर फार्म बेचे जाने को लेकर को विरोध जता रहे हैं। मुख्यमंत्री सहित विभाग के आला अधिकारियों और विभागीय मंत्री को पत्रों के जरिए सूचित भी कर चुके हैं। ठेकेदारों का आरोप है कि विभाग जब टेंडर फार्म ही नहीं बेचा तो टेंडर कैसे निकाल दिया। विरोध कर रहे ठेकेदार रवींद्र मिश्र, ओम प्रकाश पांडेय, ज्ञानेंद्र पांडेय, संतोष कुमार पाठक, वीके श्रीवास्तव, सुरेश चंद्र चौधरी, अजमतुल्लाह, हरिनरायन द्विवेदी, राम सूरत सिंह, अजय वर्मा, उमेश चंद्र त्रिपाठी, अशोक कुमार सिंह, घनश्याम तिवारी और शत्रुघन पाल सहित अन्य ने बताया कि जब पीडब्लूडी निर्माण खंड का टेंडर निकला तो लाट संख्या 11 के लिए 17 और 12 के लिए 16 टेंडर निकला। टेंडर 35 से 37 फीसदी विभागीय रेट से कम रेट डाला गया। मगर जब प्रांतीय खंड का टेंडर निकला तो किसी में दो तो किसी में तीन टेंडर निकला। वह भी माइनस 17 फीसदी रेट निकला। बताया कि इससे पता चलता है कि प्रांतीय खंड के टेंडर में फार्म बिका ही नहीं। बताया कि कम टेंडर डालने से जहां सरकार का लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान वहीं निर्माण खंड में कम दर पर टेंडर डालने से लाखों रुपये का फायदा हुआ। बताया कि जब कहीं पर टेंडर फार्म बेचा ही नहीं गया तो कैसे टेंडर खुल गया। इससे पता चलता है कि सब कुछ पहले से निर्धारित था। इस मामले में एडीएम राकेश कुमार सिंह ने बताया कि ठेकेदारों की ओर से शिकायत मिली है, जांच की प्रक्रिया जारी है।
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