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Basti News: कार में तीर की तरह घुसा शामियाने का पाइप, डिब्बे जैसी चपटी हो गई कार

Sun, 16 Feb 2025 12:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 16 Feb 2025 12:33 AM IST
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The canopy pipe entered the car like an arrow, the car became flat like a box
 सोमनाथ व मोनू निषाद के घर पर स्थानीय लोगों की भीड़ हुआ जुटे रिश्तेदार
ट्रॉली के पीछे करीब 10 फीट बाहर निकला हुआ था टेंंट तानने वाला पाइप
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। दिल दहला देने वाले हादसे की वीभत्सता इतनी नहीं होती, यदि ट्रॉली के पीछे करीब 10 फीट बाहर शामियाना तानने वाला पाइप न निकला होता। कार की हालत देख लगता है कि अगला हिस्सा ट्रॉली में टकराने से उतना नुकसान नहीं हुआ, जितना पाइप के चलते। मौके पर जुटे राहगीरों का कहना है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली अगर सीधे जा रही होती तो कार अनियंत्रित ही नहीं होती। उसके बेनीपुर गांव की तरफ मुड़ने की वजह से पाइप सड़क पर घूम जाने से कार उसमें जा घुसी। वही पाइप कार के शीशे वाले हिस्से को टिन के डिब्बे की तरह चपटा करने का कारण बना।
नगर पंचायत के बागेश्वर नाथ वार्ड निवासी बाबूलाल निषाद का परिवार कुल्फी बेचता है। उनके बेटे रामजी निषाद भी नान खटाई और कुल्फी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। हादसे में जान गंवाने वाले मोनू और सोमनाथ के पिता रामजी निषाद ने फफकते हुए बताया कि दोनों बेटे कब घर से निकल गए मुझे मालूम ही नहीं चला। उसकी मां सत्यभामा ने बताया कि 10 बजे तक घर पर ही थे।
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मोनू डीजे और सोमनाथ फुल्की बेचकर चलाते थे घर

बभनान। हादसे में जान गंवाने वाले 25 वर्षीय मोनू निषाद दो साल से डीजे की बुकिंग कर चलाता था। जबकि उसका छोटा भाई 22 वर्षीय सोमनाथ फुलकी का ठेला लगाकर परिवार को आर्थिक मदद दे रहा था। दोनों भाइयों में किसी की शादी नहीं हुई थी। सोमनाथ लगन के सीजन के अलावा चौराहे पर फुल्की का ठेला लगाता था। उसकी फुल्की खाने वाले लोगों की लाइन लग जाती थी। मोनू ने दो साल पहले डीजे का काम शुरू किया था। मौजूदा समय में दोनों भाई डीजे पर ही काम करते थे। बुकिंग होने पर दोनों एक साथ आते-जाते थे। दोनों में तालमेल काफी बेहतर था। बड़ी बहन निशा और छोटी बहन मनीषा का रो-रोकर बुरा हाल है। बाबा बाबूलाल ने कहा कि यह सपने में नहीं सोचा था कि हमारे दोनों नाती के साथ ऐसा हादसा होगा। भतीजों की मौत की सूचना के बाद बस्ती से पहुंची बुआ बेबी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। बताया कि भतीजे हमेशा हंस कर बात करते थे। दोनों बहुत खुशहाल रहते थे। उसके घर के आसपास पूरी तरह से सन्नाटा पसर गया है। संवाद
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खाना बनाकर मां करती रही इंतजार



सोमनाथ निषाद व उसका बड़ा भाई मोनू निषाद शुक्रवार की रात 10 बजे तक घर पर ही थे। उनकी मां सत्यभामा ने बताया कि कल कोई बुकिंग नहीं थी। खाना बनकर तैयार था। सत्यभामा ने बताया कि दोनों से खाना खाने को कहा तो बेटे ने कहा कि पड़ोसी की दवा लाकर दे दूं , इसके बाद में खाना खाऊंगा। पड़ोसी की दवा लाकर दिया, मगर घर नहीं आए। वहीं से कब कार से दोनों बेटे निकल गए यह जान नहीं पाई। खाना खाने के लिए जब काफी देर बीतने के बाद फोन किया तो पुलिस ने फोन रिसीव किया और हादसे की जानकारी दी। इसके बाद से घर में कोहराम मच गया। मां सत्यभामा दहाडे़ मारकर कहती है कि अगर बेटा मेरी बात मानकर खाना खाने के लिए रुक जाता तो अनहोनी टल सकती थी।
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