फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   A great-grandson arrived home from Fiji in search of loved ones in Basti district news in hindi

अपनों से मिलने की कसक: अंग्रेजों ने छुड़ाया गरीब का वतन...अपनों को ढूंढ़ते फिजी से बस्ती आया परपोता

Mon, 08 Dec 2025 01:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 08 Dec 2025 01:08 AM IST
सार

पूर्वांचल में गिरिमिटिया की अपनी अलग दास्तान हैं। ब्रिटिश हुकूमत ने तमाम गरीबों को गिरमिटिया बनाकर उन्हें उनकी मिट्टी और अपनों से हमेशा के लिए अलग कर दिया। बस्ती जिले के बनकटी ब्लॉक क्षेत्र के कबरा गांव के रहने वाले गरीब राम भी इनमें शामिल रहे। 115 बरस पहले फिजी भेजे गए गरीब राम फिर अपने वतन और अपनों के बीच नहीं लौट सके।

विज्ञापन
A great-grandson arrived home from Fiji in search of loved ones in Basti district news in hindi
अपनों के बीच फिजी से आया - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

फिजी में रह रहे रवींद्र को अपनी मिट्टी और भारत में रह रहे अपनों से मिलने की कसक सताती रहती थी। दरअसल, उनके परदादा गरीब राम को साल 1910 में ब्रिटिश हुकूमत ने गिरमिटिया के तौर पर फिजी भेज दिया था।
विज्ञापन


गरीब राम लौट नहीं सके और उन्होंने वहीं गृहस्थी बसा ली। इंटरनेट और अन्य माध्यमों से जानकारियां जुटाने के बाद रवींद्र बनकटी ब्लॉक क्षेत्र के कबरा गांव में अपनों के बीच पहुंचे तो खुशी में आंखें छलक उठीं।
विज्ञापन

खून के रिश्ते भी अजीब होते हैं, वर्षों बाद भी अपनों से मिलने के लिए बेचैन कर देते हैं।

पूर्वांचल में गिरिमिटिया की अपनी अलग दास्तान हैं। ब्रिटिश हुकूमत ने तमाम गरीबों को गिरमिटिया बनाकर उन्हें उनकी मिट्टी और अपनों से हमेशा के लिए अलग कर दिया। बस्ती जिले के बनकटी ब्लॉक क्षेत्र के कबरा गांव के रहने वाले गरीब राम भी इनमें शामिल रहे। 115 बरस पहले फिजी भेजे गए गरीब राम फिर अपने वतन और अपनों के बीच नहीं लौट सके।
विज्ञापन
विज्ञापन


अपनों की तलाश में पत्नी केशनी के साथ कबरा गांव पहुंचे गरीब राम के परपोते रवींद्र दत्त ने बताया कि उन्हें बचपन से ही बताया गया था उनके अपने भारत में हैं। अपने वतन और अपनों से बिछड़ने की परदादा की तकलीफ का एहसास उन्हें बेचैन करता रहा।


बड़े होने पर उन्होंने अपने पुरखों के बारे में जानकारियां जुटाने के साथ अपनी जड़ें तलाशने की मुहिम शुरू की जो शुक्रवार को बनकटी के कबरा गांव पहुंचकर पूरी हुई। मुद्दताें की तलाश के बाद मिले अपनों बीच पहुंचकर रवि और उनकी पत्नी केशनी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। दो दिन परिवार के बीच गुजारने के बाद रविवार को पति-पत्नी फिजी लौट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed