{"_id":"69178aa89cc81ede400e92d8","slug":"the-air-quality-is-deteriorating-with-fog-covering-morning-and-evening-basti-news-c-207-1-sgkp1006-147705-2025-11-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: बिगड़ती जा रही हवा की तासीर...सुबह-शाम धुंध का पर्दा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: बिगड़ती जा रही हवा की तासीर...सुबह-शाम धुंध का पर्दा
Sat, 15 Nov 2025 01:31 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 15 Nov 2025 01:31 AM IST
विज्ञापन
भदेश्वरनाथ मार्ग पर छाई धुंध - संवाद
- फोटो : घटना स्थल पर जांच करने पहुंचे एसपी, एएसपी व एसडीएम।
बस्ती। सर्द मौसम की नमी, वाहनों का धुआं और शहरभर में खुले में कूड़ा जलाने की आदत ने मिलकर शहर की हवा को धीरे-धीरे जहरीला बना दिया है। हालात यह हैं कि सुबह और शाम शहर पर धुंध जैसा पर्दा छा जाता है। मौसम विज्ञानी बताते हैं कि यह प्राकृतिक कोहरा नहीं, बल्कि धुआं, धूलकण और प्रदूषित गैसों का खतरनाक मिश्रण है, जो लोगों की सांसों पर सीधा वार कर रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार पिछले कई दिनों से बारिश न होने और तापमान में गिरावट के कारण हवा भारी हो गई है। वातावरण में उठने वाले कण ऊपर नहीं जा पा रहे, और इसी वजह से शहर में लोकल स्मॉग बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति दिसंबर-जनवरी में और खराब हो सकती है। ट्रैफिक वाले क्षेत्र गांधीनगर, बड़ेवन, रोडवेज, पांडेय बाजार से लेकर पुरानी बस्ती रोड तक सुबह-शाम वाहनों का दबाव सबसे ज्यादा रहता है। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जलन, खांसी और आंखों में चुभन जैसी शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, जो प्रदूषण जनित दिक्कतों के कारण पहुंच रहे हैं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र बताते हैं कि हवा में नमी बढ़ने से धूलकण जमीन के पास जम जाते हैं। तेज हवा न चलने के कारण प्रदूषक तैरते रहते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
मौसम विभाग के अनुसार पिछले कई दिनों से बारिश न होने और तापमान में गिरावट के कारण हवा भारी हो गई है। वातावरण में उठने वाले कण ऊपर नहीं जा पा रहे, और इसी वजह से शहर में लोकल स्मॉग बन रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति दिसंबर-जनवरी में और खराब हो सकती है। ट्रैफिक वाले क्षेत्र गांधीनगर, बड़ेवन, रोडवेज, पांडेय बाजार से लेकर पुरानी बस्ती रोड तक सुबह-शाम वाहनों का दबाव सबसे ज्यादा रहता है। इन इलाकों में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई है। लोगों को सांस लेने में दिक्कत, सीने में जलन, खांसी और आंखों में चुभन जैसी शिकायतें बढ़ने लगी हैं।
विज्ञापन
निजी अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है, जो प्रदूषण जनित दिक्कतों के कारण पहुंच रहे हैं। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. अमरनाथ मिश्र बताते हैं कि हवा में नमी बढ़ने से धूलकण जमीन के पास जम जाते हैं। तेज हवा न चलने के कारण प्रदूषक तैरते रहते हैं और सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
विज्ञापन