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बंधे का ठोकर नंबर एक खतरे में
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Sat, 06 Aug 2016 11:29 PM IST
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गायघाट क्षेत्र मे पानी से डूबा फसल व पशुचारा।
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बाढ़ से निपटने की तैयारी में कमी अफसरों से लेकर गांव वालों तक को मुसीबत में डाल रही है। लोलपुर-विक्रमजोत बंधे का ठोकर नंबर एक खतरे में पड़ गया है। यदि बांध यहां कटा तो 400 मीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग सहित चार गांव संकट में फंस जाएंगे।
सप्ताह भर से खतरे के निशान से औसतन 32 सेमी. ऊपर बह रही घाघरा का जलस्तर घटने लगा है। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय अयोध्या के अनुसार शुक्रवार को जलस्तर 93:068 था जो शनिवार कि सुबह 8 बजे 92:920 मीटर पहुंच गया। वहीं शनिवार सुबह ठोकर नंबर एक के नोज का बड़ा हिस्सा धारा में बह गया। जानकारी होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। 40 किमी प्रति घंटे कि रफ्तार से बह रही नदी में ऊंची ऊंची लहरें उठ रही हैं। पूर्व दिशा में बह रही धारा पर पछुआ हवाएं लहरों को और ताकतवर बना देती हैं स्पर के बचाव में ईट भरे बोरे बोल्डर सब तिनके कि तरह बह जा रहे हैं।
मोटे मोटे रस्से से बांधकर बंबू कैरेट झावा नदी की धारा में लटकाए गए हैं मगर भंवर करती नदी में दो से तीन मीटर दरार लेकर ठोकर के आस पास कि मिट्टी काट दे रही है। बांध कटते ही भीषण तबाही भी तय है। समीप के गांव मुंडेरीपुर, खतमसराय, गौरियानैन, भदोई का एक पुरवा चपेट में आ जाएंगे। महज 400 मीटर दूरी पर नेशनल हाईवे को भी बचा पाना बेहद मुश्किल होगा। केशवपुर, रामनगर, रानीपुर, कठवनिया, पठकापुर, बाघानाला, कल्याणपुर, सहजौरा पाठक, फूलडीह, कौलपुर, विक्रमजोत सहित हाईवे और नदी कि धारा के बीच के बसे लोगों का बेघर होना तय है।
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लोलपुर-विक्रमजोत बंधे और नजदीकी गांवों की सुरक्षा का प्रयास कई दिनों से जारी है लेकिन घाघरा की धारा सारे प्रयासों पर पानी फेर रही है। बांध की सुरक्षा में लगे सभी मजदूरों को एक नंबर ठोकर को बचाने के लिए लगा दिया गया है। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता, अवर अभियंताओं को लेकर जुटे हैं। एसडीएम हर्रैया भी टीम के साथ सुरक्षा का जायजा लगातार ले रहे हैं। बताया जा रहा कि बुधवार को गिरजा बैराज व बनबसा बैराज से 2:45 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है जिसके कारण घाघरा और उफना गई थी।
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सप्ताह भर से खतरे के निशान से औसतन 32 सेमी. ऊपर बह रही घाघरा का जलस्तर घटने लगा है। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय अयोध्या के अनुसार शुक्रवार को जलस्तर 93:068 था जो शनिवार कि सुबह 8 बजे 92:920 मीटर पहुंच गया। वहीं शनिवार सुबह ठोकर नंबर एक के नोज का बड़ा हिस्सा धारा में बह गया। जानकारी होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। 40 किमी प्रति घंटे कि रफ्तार से बह रही नदी में ऊंची ऊंची लहरें उठ रही हैं। पूर्व दिशा में बह रही धारा पर पछुआ हवाएं लहरों को और ताकतवर बना देती हैं स्पर के बचाव में ईट भरे बोरे बोल्डर सब तिनके कि तरह बह जा रहे हैं।
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मोटे मोटे रस्से से बांधकर बंबू कैरेट झावा नदी की धारा में लटकाए गए हैं मगर भंवर करती नदी में दो से तीन मीटर दरार लेकर ठोकर के आस पास कि मिट्टी काट दे रही है। बांध कटते ही भीषण तबाही भी तय है। समीप के गांव मुंडेरीपुर, खतमसराय, गौरियानैन, भदोई का एक पुरवा चपेट में आ जाएंगे। महज 400 मीटर दूरी पर नेशनल हाईवे को भी बचा पाना बेहद मुश्किल होगा। केशवपुर, रामनगर, रानीपुर, कठवनिया, पठकापुर, बाघानाला, कल्याणपुर, सहजौरा पाठक, फूलडीह, कौलपुर, विक्रमजोत सहित हाईवे और नदी कि धारा के बीच के बसे लोगों का बेघर होना तय है।
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लोलपुर-विक्रमजोत बंधे और नजदीकी गांवों की सुरक्षा का प्रयास कई दिनों से जारी है लेकिन घाघरा की धारा सारे प्रयासों पर पानी फेर रही है। बांध की सुरक्षा में लगे सभी मजदूरों को एक नंबर ठोकर को बचाने के लिए लगा दिया गया है। बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता, अवर अभियंताओं को लेकर जुटे हैं। एसडीएम हर्रैया भी टीम के साथ सुरक्षा का जायजा लगातार ले रहे हैं। बताया जा रहा कि बुधवार को गिरजा बैराज व बनबसा बैराज से 2:45 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हुआ है जिसके कारण घाघरा और उफना गई थी।