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दर्जा सीएचसी का, सुविधाएं नदारद
अमर उजाला बस्ती
Updated Fri, 14 Oct 2016 11:50 PM IST
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लालटेन के उजाले में होती है प्रसूताओं की डिलेवरी
- फोटो : अमर उजाला
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क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र विशेषरगंज को ब्लॉक में सीएचसी का दर्जा प्रदान करके चलाया जा रहा है। सीएचसी के तहत चिलमा व दुबौलिया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भी संबंद्ध हैं। 209 राजस्व गांव के एक लाख 12 हजार 9 सौ आठ के लोगों इलाज की जिम्मेदारी है। अस्पताल में मात्र प्रभारी को लेकर दो डॉक्टर तैनात हैं। रात में कोई भी स्वास्थ्य कर्मी रुकता नहीं है। विभाग के संचालित योजनाओं में टीकाकरण, एंबुलेंस एवं प्रसव सुविधा उपलब्ध है। स्वास्थ्य केन्द्र पर दो बीएमएस की तैनाती है। एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती न होने से मेडिकोलीगल नहीं हो पाता। घायल मरीजों को पुलिस कप्तानगंज सीएचसी पर भेजती है।
दो बेड पर काराई जाती डिलेवरी
अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं की डिलेवरी दो बेड पर लालटेन के उजाले में कराई जाती है। जबकि अस्पताल में जेनरेट लगा हुआ है। प्रसूताओं को देखभाल के लिए एक एएनएम व दो स्टाफ नर्स हैं।बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से कई मासूमों की मौत हो जाती है। महीने में औसतन 50 गर्भवती महिलाओं की डिलेवरी होती है। लेकिन सुविधाओं के अभाव में अस्तपाल बेमतलब साबित हो रहा है। सीएचसी पर 108 एक 102 दो एंबुलेंस चलती है। मरीजों को कप्तानगज भेजा जाता है क्योंकि अस्पताल शाम को चार बजे ही बंद हो जाता है।
वर्जन
लालटेन के उज्जाले में डिलेवरी करना गंभीर मामला है, जांच कराके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सीएमओ डॉ. जेपी सिंह
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दो बेड पर काराई जाती डिलेवरी
अस्पताल में आने वाली प्रसूताओं की डिलेवरी दो बेड पर लालटेन के उजाले में कराई जाती है। जबकि अस्पताल में जेनरेट लगा हुआ है। प्रसूताओं को देखभाल के लिए एक एएनएम व दो स्टाफ नर्स हैं।बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से कई मासूमों की मौत हो जाती है। महीने में औसतन 50 गर्भवती महिलाओं की डिलेवरी होती है। लेकिन सुविधाओं के अभाव में अस्तपाल बेमतलब साबित हो रहा है। सीएचसी पर 108 एक 102 दो एंबुलेंस चलती है। मरीजों को कप्तानगज भेजा जाता है क्योंकि अस्पताल शाम को चार बजे ही बंद हो जाता है।
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लालटेन के उज्जाले में डिलेवरी करना गंभीर मामला है, जांच कराके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
सीएमओ डॉ. जेपी सिंह