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Basti News: श्रीगंगा कलश यात्रा का हुआ भव्य स्वागत
Sat, 09 Nov 2024 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 09 Nov 2024 12:32 AM IST
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गंगोत्री धाम से चलकर नेपाल स्थित काठमांडू के पशुपतिनाथ जी का अभिषेक करने के लिए ले जाए जा रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। श्रीगंगा कलश यात्रा का हाईवे स्थित संसारीपुर चौराहे पर समाजसेवी लक्ष्मीकांत ओझा की अगुवाई में शुक्रवार को भव्य स्वागत किया गया। क्षेत्रवासियों ने गंगोत्री धाम से चलकर नेपाल स्थित काठमांडू के पशुपतिनाथ के जलाभिषेक के लिए जाने वाली श्रीगंगा कलश यात्रा का फूल-मालाओं के साथ ही विधि-विधान से पूजन और आरती की।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां गंगा से विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हुए हर-हर गंगे, जय मां गंगे के जयकारे लगाए। गंगोत्री धाम के रावल शिव प्रकाश महाराज ने कहा कि यह विश्व का सबसे बड़ा कलश है, जिसकी क्षमता 1100 लीटर है। यह यात्रा सनातन धर्म की पवित्रता और सद्भावना को समर्पित है। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद हर साल गंगा जल से भरा कलश नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर तक पहुंचाया जाता है।
पूरे साल इसी जल से पशुपतिनाथ का विशेष जलाभिषेक किया जाता है। उन्होंने बताया कि पूर्व काल से ही सनातन धर्म में यह वैदिक परंपरा चली आ रही है। कहा कि विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए इस कलश यात्रा का अपना एक अलग महत्व है। नेपाल और भारत की मैत्री और अखंडता को बरकरार रखने का भी यह एक संदेश देता है।
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इस अवसर पर राम सिंगार ओझा, अंबिका प्रसाद ओझा, माधव दास ओझा, उमाकांत तिवारी, प्रेम नारायण पांडेय, अनिल सिंह, राकेश तिवारी, आशुतोष आदि मौजूद रहे।
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बस्ती। श्रीगंगा कलश यात्रा का हाईवे स्थित संसारीपुर चौराहे पर समाजसेवी लक्ष्मीकांत ओझा की अगुवाई में शुक्रवार को भव्य स्वागत किया गया। क्षेत्रवासियों ने गंगोत्री धाम से चलकर नेपाल स्थित काठमांडू के पशुपतिनाथ के जलाभिषेक के लिए जाने वाली श्रीगंगा कलश यात्रा का फूल-मालाओं के साथ ही विधि-विधान से पूजन और आरती की।
इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां गंगा से विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हुए हर-हर गंगे, जय मां गंगे के जयकारे लगाए। गंगोत्री धाम के रावल शिव प्रकाश महाराज ने कहा कि यह विश्व का सबसे बड़ा कलश है, जिसकी क्षमता 1100 लीटर है। यह यात्रा सनातन धर्म की पवित्रता और सद्भावना को समर्पित है। गंगोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद हर साल गंगा जल से भरा कलश नेपाल के पशुपतिनाथ मंदिर तक पहुंचाया जाता है।
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पूरे साल इसी जल से पशुपतिनाथ का विशेष जलाभिषेक किया जाता है। उन्होंने बताया कि पूर्व काल से ही सनातन धर्म में यह वैदिक परंपरा चली आ रही है। कहा कि विश्व कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए इस कलश यात्रा का अपना एक अलग महत्व है। नेपाल और भारत की मैत्री और अखंडता को बरकरार रखने का भी यह एक संदेश देता है।
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इस अवसर पर राम सिंगार ओझा, अंबिका प्रसाद ओझा, माधव दास ओझा, उमाकांत तिवारी, प्रेम नारायण पांडेय, अनिल सिंह, राकेश तिवारी, आशुतोष आदि मौजूद रहे।