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बसपा की खिसकती जमीन से पहले भाजपा अब सपा हुई मजबूत
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बसपा की खिसकती जमीन से पहले भाजपा अब सपा हुई मजबूत
बस्ती। बसपा की खिसकती सियासी जमीन का लाभ 2017 में भाजपा तो अब समाजवादी पार्टी को मिला है। विधानसभा चुनाव -2022 के दौरान जिले में बसपा मुकाबले में ही नहीं दिखी। यह हश्र उस पार्टी का है, जिसने 1996 और 2007 के विधानसभा चुनाव में दो बार पांच में से चार सीटों पर कब्जा किया था। 2012 में दो सीटों पर जीत दर्ज कर अस्तित्व तो बचाए रखा, लेकिन 2017 के चुनाव में बसपा का जिले से सुपड़ा ही साफ हो गया। यही हाल इस बार के चुनाव में भी हुआ।
बहुजन समाज पार्टी के जिले में सियासी सफर पर नजर डालें तो वर्ष 1996 और 2007 के चुनाव दो बसपा को बड़ी जीत मिली थी। 1996 के विधानसभा चुनाव में हर्रैया से सुखपाल पांडेय विधायक बने और मंत्री पद भी संभाला। इसी चुनाव में कप्तानगंज से रामप्रसाद चौधरी, नगर पूरब विधानसभा सीट ( अब महादेवा सुरक्षित) से वेद प्रकाश और रामनगर विधानसभा सीट (अब रुधौली ) से राम ललित चौधरी हाथी पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे थे।
इस चुनाव में बसपा को पांच में से चार सीटें मिली थीं। जबकि, बस्ती सदर की सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। वर्ष 2002 के चुनाव में हर्रैया से राज किशोर सिंह और कप्तानगंज से राम प्रसाद चौधरी ही बसपा के टिकट पर चुनाव जीत सके। यानी दो सीटें कम हो गईं। इस चुनाव में नगर पूरब और रामनगर की सीट सपा के खाते में चली गई थी, जबकि बस्ती सदर की सीट कांग्रेस के ही पास रही। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने फिर वापसी की और दूसरी बार पांच में से चार सीटों पर जीत दर्ज की। तब कप्तानगंज से राम प्रसाद चौधरी, नगर पूरब से दूधराम, बस्ती सदर सीट से जितेंद्र चौधरी उर्फ नंदू चौधरी और रामनगर से राजेंद्र प्रसाद चौधरी को बसपा के टिकट पर विधानसभा में जाने का मौका मिला था।
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इस चुनाव में सपा को एकमात्र हर्रैया की सीट मिली थी, तब राजकिशोर सिंह सपा से चुनाव जीते थे। 2012 के चुनाव से बसपा के जनाधार में गिरावट शुरू हुई। इस चुनाव में बसपा के टिकट पर रामप्रसाद चौधरी कप्तानगंज से और बस्ती सदर सीट से जितेंद्र चौधरी उर्फ नंदू चौधरी ही चुनाव जीत पाए थे। 2017 के चुनाव में तो बसपा के हाथ से यह दोनों सीटें भी निकल गईं। इस चुनाव में सभी सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी, लेकिन भाजपा भी इस चुनाव में अपना किला ढहने से नहीं बचा पाई। नतीजा यह हुआ कि 2022 का परिणाम सपा के पक्ष में गया और उसे पहली बार जिले में चार सीटें मिलीं। जबकि भाजपा के खाते में एकमात्र हर्रैया की ही सीट आई।
विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा प्रत्याशियों को मिले मत
क्षेत्र, प्रत्याशी, मिले मत
बस्ती सदर, आलोक रंजन वर्मा, 36429
हर्रैया, राजकिशोर सिंह, 55697
कप्तानगंज, जहीर अहमद, 40381
रुधौली, अशोक मिश्रा, 37618
महादेवा सुरक्षित, लक्ष्मी चंद्र खरवार, 40207
बोले- बसपा के जिलाध्यक्ष
बसपा जिलाध्यक्ष जय हिंद गौतम ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवारों ने मेहनत की, हर सीट पर पार्टी को अच्छी संख्या में मत मिले, लेकिन परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आया। जनादेश का सम्मान है। इसकी समीक्षा की जा रही है कि कहां क्या कमी रह गई।
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बस्ती। बसपा की खिसकती सियासी जमीन का लाभ 2017 में भाजपा तो अब समाजवादी पार्टी को मिला है। विधानसभा चुनाव -2022 के दौरान जिले में बसपा मुकाबले में ही नहीं दिखी। यह हश्र उस पार्टी का है, जिसने 1996 और 2007 के विधानसभा चुनाव में दो बार पांच में से चार सीटों पर कब्जा किया था। 2012 में दो सीटों पर जीत दर्ज कर अस्तित्व तो बचाए रखा, लेकिन 2017 के चुनाव में बसपा का जिले से सुपड़ा ही साफ हो गया। यही हाल इस बार के चुनाव में भी हुआ।
बहुजन समाज पार्टी के जिले में सियासी सफर पर नजर डालें तो वर्ष 1996 और 2007 के चुनाव दो बसपा को बड़ी जीत मिली थी। 1996 के विधानसभा चुनाव में हर्रैया से सुखपाल पांडेय विधायक बने और मंत्री पद भी संभाला। इसी चुनाव में कप्तानगंज से रामप्रसाद चौधरी, नगर पूरब विधानसभा सीट ( अब महादेवा सुरक्षित) से वेद प्रकाश और रामनगर विधानसभा सीट (अब रुधौली ) से राम ललित चौधरी हाथी पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे थे।
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इस चुनाव में बसपा को पांच में से चार सीटें मिली थीं। जबकि, बस्ती सदर की सीट कांग्रेस के खाते में गई थी। वर्ष 2002 के चुनाव में हर्रैया से राज किशोर सिंह और कप्तानगंज से राम प्रसाद चौधरी ही बसपा के टिकट पर चुनाव जीत सके। यानी दो सीटें कम हो गईं। इस चुनाव में नगर पूरब और रामनगर की सीट सपा के खाते में चली गई थी, जबकि बस्ती सदर की सीट कांग्रेस के ही पास रही। 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने फिर वापसी की और दूसरी बार पांच में से चार सीटों पर जीत दर्ज की। तब कप्तानगंज से राम प्रसाद चौधरी, नगर पूरब से दूधराम, बस्ती सदर सीट से जितेंद्र चौधरी उर्फ नंदू चौधरी और रामनगर से राजेंद्र प्रसाद चौधरी को बसपा के टिकट पर विधानसभा में जाने का मौका मिला था।
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इस चुनाव में सपा को एकमात्र हर्रैया की सीट मिली थी, तब राजकिशोर सिंह सपा से चुनाव जीते थे। 2012 के चुनाव से बसपा के जनाधार में गिरावट शुरू हुई। इस चुनाव में बसपा के टिकट पर रामप्रसाद चौधरी कप्तानगंज से और बस्ती सदर सीट से जितेंद्र चौधरी उर्फ नंदू चौधरी ही चुनाव जीत पाए थे। 2017 के चुनाव में तो बसपा के हाथ से यह दोनों सीटें भी निकल गईं। इस चुनाव में सभी सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी, लेकिन भाजपा भी इस चुनाव में अपना किला ढहने से नहीं बचा पाई। नतीजा यह हुआ कि 2022 का परिणाम सपा के पक्ष में गया और उसे पहली बार जिले में चार सीटें मिलीं। जबकि भाजपा के खाते में एकमात्र हर्रैया की ही सीट आई।
विधानसभा चुनाव 2022 में बसपा प्रत्याशियों को मिले मत
क्षेत्र, प्रत्याशी, मिले मत
बस्ती सदर, आलोक रंजन वर्मा, 36429
हर्रैया, राजकिशोर सिंह, 55697
कप्तानगंज, जहीर अहमद, 40381
रुधौली, अशोक मिश्रा, 37618
महादेवा सुरक्षित, लक्ष्मी चंद्र खरवार, 40207
बोले- बसपा के जिलाध्यक्ष
बसपा जिलाध्यक्ष जय हिंद गौतम ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवारों ने मेहनत की, हर सीट पर पार्टी को अच्छी संख्या में मत मिले, लेकिन परिणाम हमारे पक्ष में नहीं आया। जनादेश का सम्मान है। इसकी समीक्षा की जा रही है कि कहां क्या कमी रह गई।