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सोलर प्लांट : कभी दे रहा था 200 केवी बिजली, 12 साल से बहा रहा आंसू
Tue, 01 Aug 2023 11:36 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 01 Aug 2023 11:36 PM IST
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झाड़ियों में दबकर रह गया है हर्रैया विद्युत उपकेंद्र के बगल स्थापित सौ मेगावाट सोलर प्लांट
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बस्ती। सरकार वैकल्पिक ऊर्जा माध्यमों को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। ताकि लोगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े। बिजली खपत को देखते हुए हर्रैया विद्युत उपकेंद्र परिसर में तीन करोड़ रुपये की लागत से दो सौ किलोवाट का सोलर पाॅवर प्लांट-2001 में लगाया गया। यह प्लांट करीब 12 सालों से बंद है। रख-रखाव न होने से संयंत्र झाड़ियाें में दबकर रह गया है।
उल्लेखनीय है कि 2001 में प्रमुख सचिव रहे माता प्रसाद के प्रयास से विद्युत उपकेंद्र के ठीक बगल एक एकड़ जमीन पर 200 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित कराया था। इस संयंत्र से उत्पादित बिजली को विद्युत उपकेंद्र के सहारे सीधे उपभोक्ताओं को दी जाती थी, जिससे उपभोक्ताओं को गर्मी में ओवर लोड की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता था। 2010 तक इस प्लांट के रख-रखाव की जिम्मेदारी टाटा कंपनी के पास थी, तब तक यह संचालित होता रहा। कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद प्लांट पर ग्रहण लग गया।
2011 में इससे बिजली उत्पादन ठप हो गया। आलम यह है कि सौर ऊर्जा संयंत्र में लगे महंगे उपकरण, प्लेटें व बैटरियों को चोर उठा ले गए। सूत्र बताते हैं कि 2010 में यह प्लांट बिजली विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बाद से ही इसके बुरे दिन शुरू हो गए। 2011 के बाद इसे दोबारा ठीक कराकर संचालित करने का विभागीय स्तर पर कभी प्रयास नहीं किया गया।
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बिजली निगम के एक पुराने कर्मी ने बताया कि संयंत्र में कुछ तकनीकी खामी आ गई थी। जिसे कभी ठीक ही नहीं कराया गया। समय बीतने के साथ संयंत्र में लगे पैनल व उपकरण सड़कर खत्म होने के कगार पर पहुंच गए।
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250 केवीए का लगाया गया ट्रांसफाॅर्मर
सोलर प्लांट से लोगों को बिजली आपूर्ति देने के लिए 250 केवीए का ट्रांसफॉर्मर लगाया गया। इसे सोलर प्लांट से जोड़कर 150 उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति दी जा रही थी। सोलर प्लांट के बंद होने से इन उपभोक्ताओं के सामने भी बिजली का संकट उत्पन्न हो गया। हालांकि बाद में इन उपभोक्ताओं ने बिजली आपूर्ति के लिए दूसरी व्यवस्था की।
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विद्युत उपकेंद्र का प्रभार मिलने के बाद संयंत्र को ठीक कराने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। जल्द ही संयंत्र दुरुस्त कराने का आश्वासन मिला है।
-एकेएम यादव, अवर अभियंता, हर्रैया।
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उल्लेखनीय है कि 2001 में प्रमुख सचिव रहे माता प्रसाद के प्रयास से विद्युत उपकेंद्र के ठीक बगल एक एकड़ जमीन पर 200 किलोवाट का सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित कराया था। इस संयंत्र से उत्पादित बिजली को विद्युत उपकेंद्र के सहारे सीधे उपभोक्ताओं को दी जाती थी, जिससे उपभोक्ताओं को गर्मी में ओवर लोड की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता था। 2010 तक इस प्लांट के रख-रखाव की जिम्मेदारी टाटा कंपनी के पास थी, तब तक यह संचालित होता रहा। कंपनी का अनुबंध समाप्त होने के बाद प्लांट पर ग्रहण लग गया।
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2011 में इससे बिजली उत्पादन ठप हो गया। आलम यह है कि सौर ऊर्जा संयंत्र में लगे महंगे उपकरण, प्लेटें व बैटरियों को चोर उठा ले गए। सूत्र बताते हैं कि 2010 में यह प्लांट बिजली विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया। इसके बाद से ही इसके बुरे दिन शुरू हो गए। 2011 के बाद इसे दोबारा ठीक कराकर संचालित करने का विभागीय स्तर पर कभी प्रयास नहीं किया गया।
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बिजली निगम के एक पुराने कर्मी ने बताया कि संयंत्र में कुछ तकनीकी खामी आ गई थी। जिसे कभी ठीक ही नहीं कराया गया। समय बीतने के साथ संयंत्र में लगे पैनल व उपकरण सड़कर खत्म होने के कगार पर पहुंच गए।
250 केवीए का लगाया गया ट्रांसफाॅर्मर
सोलर प्लांट से लोगों को बिजली आपूर्ति देने के लिए 250 केवीए का ट्रांसफॉर्मर लगाया गया। इसे सोलर प्लांट से जोड़कर 150 उपभोक्ताओं को बिजली आपूर्ति दी जा रही थी। सोलर प्लांट के बंद होने से इन उपभोक्ताओं के सामने भी बिजली का संकट उत्पन्न हो गया। हालांकि बाद में इन उपभोक्ताओं ने बिजली आपूर्ति के लिए दूसरी व्यवस्था की।
विद्युत उपकेंद्र का प्रभार मिलने के बाद संयंत्र को ठीक कराने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। जल्द ही संयंत्र दुरुस्त कराने का आश्वासन मिला है।
-एकेएम यादव, अवर अभियंता, हर्रैया।