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Basti News: सोनहा थाने के एसओ व विवेचक से सीडब्लूसी ने मांगा स्पष्टीकरण
Sat, 11 Nov 2023 01:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 11 Nov 2023 01:02 AM IST
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एक वर्ष चार दिन बाद सीडब्लूसी के समक्ष पेश की गई पीड़िता
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पाॅक्सो पीड़ित बालिकाओं को लेकर प्रशासन व सरकार भले गंभीर हो, पर पुलिस पर इसका असर नहीं है। बाल अधिकारों के प्रति लापरवाह सोनहा पुलिस ने पाॅक्सो पीड़िता को सीडब्लूसी के समक्ष प्रस्तुत किए बिना ही मामले को रफादफा कर दिया था। मामला सीडब्लूसी के संज्ञान में आने के बाद सोनहा पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा गया है। पुलिस के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर न्याय पीठ विधिक कार्रवाई करेगी।
उपरोक्त प्रकरण में एक बालिका के पिता ने मुकामी थाने में दो नवंबर 2022 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में 354 के साथ ही पाॅक्सो एक्ट लगाया था। विवेचना के दौरान तत्कालीन विवेचक ने फाइनल रिपोर्ट लग कर मामला समाप्त कर दिया था। मामला सीओ के संज्ञान में आया तो दोबारा जांच शुरू की गई। मामले में दुष्कर्म की धारा की बढ़ोत्तरी हुई और प्रकरण के विवेचक ने बालिका को सीडब्लूसी के समक्ष प्रस्तुत किया।
सीडब्लूसी के चेयर पर्सन प्रेरक मिश्रा ने जब पत्रावली का अवलोकन किया गया तब पता चला कि बालिका को न्याय पीठ के समक्ष एक वर्ष चार दिन बाद प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, डाॅ. संतोष श्रीवास्तव, मंजू त्रिपाठी ने सप्ष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। चेयर पर्सन ने बताया कि इस प्रकार के मामले को सीडब्लूसी के समक्ष कम से कम समय में प्रस्तुत करना चाहिए। इससे बालिका के बाल अधिकार का संरक्षण होता है। ऐसा नहीं करना बाल अधिनियम की मंशा के विपरीत है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। पाॅक्सो पीड़ित बालिकाओं को लेकर प्रशासन व सरकार भले गंभीर हो, पर पुलिस पर इसका असर नहीं है। बाल अधिकारों के प्रति लापरवाह सोनहा पुलिस ने पाॅक्सो पीड़िता को सीडब्लूसी के समक्ष प्रस्तुत किए बिना ही मामले को रफादफा कर दिया था। मामला सीडब्लूसी के संज्ञान में आने के बाद सोनहा पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा गया है। पुलिस के जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर न्याय पीठ विधिक कार्रवाई करेगी।
उपरोक्त प्रकरण में एक बालिका के पिता ने मुकामी थाने में दो नवंबर 2022 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले में 354 के साथ ही पाॅक्सो एक्ट लगाया था। विवेचना के दौरान तत्कालीन विवेचक ने फाइनल रिपोर्ट लग कर मामला समाप्त कर दिया था। मामला सीओ के संज्ञान में आया तो दोबारा जांच शुरू की गई। मामले में दुष्कर्म की धारा की बढ़ोत्तरी हुई और प्रकरण के विवेचक ने बालिका को सीडब्लूसी के समक्ष प्रस्तुत किया।
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सीडब्लूसी के चेयर पर्सन प्रेरक मिश्रा ने जब पत्रावली का अवलोकन किया गया तब पता चला कि बालिका को न्याय पीठ के समक्ष एक वर्ष चार दिन बाद प्रस्तुत किया जा रहा है। इस पर नाराजगी जताते हुए न्याय पीठ के अध्यक्ष प्रेरक मिश्रा, सदस्य अजय श्रीवास्तव, डाॅ. संतोष श्रीवास्तव, मंजू त्रिपाठी ने सप्ष्टीकरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। चेयर पर्सन ने बताया कि इस प्रकार के मामले को सीडब्लूसी के समक्ष कम से कम समय में प्रस्तुत करना चाहिए। इससे बालिका के बाल अधिकार का संरक्षण होता है। ऐसा नहीं करना बाल अधिनियम की मंशा के विपरीत है।
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