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Basti News: छोटे भाई की मौत के सदमे में बहन ने जहर खाकर दी जान
Tue, 24 Sep 2024 03:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 24 Sep 2024 03:24 AM IST
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कैंसर से पीड़ित भाई की 16 सितंबर को हो गई थी मौत
कलवारी क्षेत्र के फेटवा गांव का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरपुर। कैंसर से छोटे भाई की मौत के सदमे में बहन ने घर में रखा कीटनाशक खा लिया। रविवार की रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना कलवारी थाना क्षेत्र के फेंटवा गांव का है।
पिता बलवंत उपाध्याय ने बताया कि उनका छोटो बेटा 21 वर्षीय अभिषेक उपाध्याय कैंसर से पीड़ित था। उनकी 16 सितंबर को मुंबई के टाटा अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। भाई की मौत खबर सुनकर 23 वर्षीय बेटी रानी सदमे में आ गई। बार-बार बेहोश होने पर इलाज कराया गया। इससे उसे आराम हो गया था। दो दिन वह गुमसुम सी अस्पताल में पड़ी रही। शुक्रवार को दवा से आराम होने पर परिवार के लोग घर ले लाए।
उसी दिन शाम को वह फिर बेहोश हो गई। उसके मुंह से गन्ने की फसल में अच्छी उपज के लिए प्रयोग किए जाने वाले कीटनाशक की दुर्गंध आ रही थी। उसे इलाज के लिए सीएचसी बहादुरपुर ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया। बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के राममनोहर लोहिया अस्पताल में ले गए, जहां इलाज से आराम न होने पर डाॅक्टरों ने जवाब दे दिया।
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शनिवार से बस्ती के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। रविवार की रात करीब 12 बजे उसकी मौत हो गई। बलवंत ने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ी पीड़ा और क्या हो सकती है कि पहले बेटे की अर्थी को कंधा दिया। अब जिस बेटी को डोली में विदा करना था, उसकी अर्थी को भी कंधा देना पड़ रहा है।
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कलवारी क्षेत्र के फेटवा गांव का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरपुर। कैंसर से छोटे भाई की मौत के सदमे में बहन ने घर में रखा कीटनाशक खा लिया। रविवार की रात इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना कलवारी थाना क्षेत्र के फेंटवा गांव का है।
पिता बलवंत उपाध्याय ने बताया कि उनका छोटो बेटा 21 वर्षीय अभिषेक उपाध्याय कैंसर से पीड़ित था। उनकी 16 सितंबर को मुंबई के टाटा अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। भाई की मौत खबर सुनकर 23 वर्षीय बेटी रानी सदमे में आ गई। बार-बार बेहोश होने पर इलाज कराया गया। इससे उसे आराम हो गया था। दो दिन वह गुमसुम सी अस्पताल में पड़ी रही। शुक्रवार को दवा से आराम होने पर परिवार के लोग घर ले लाए।
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उसी दिन शाम को वह फिर बेहोश हो गई। उसके मुंह से गन्ने की फसल में अच्छी उपज के लिए प्रयोग किए जाने वाले कीटनाशक की दुर्गंध आ रही थी। उसे इलाज के लिए सीएचसी बहादुरपुर ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद रेफर कर दिया गया। बेहतर इलाज के लिए लखनऊ के राममनोहर लोहिया अस्पताल में ले गए, जहां इलाज से आराम न होने पर डाॅक्टरों ने जवाब दे दिया।
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शनिवार से बस्ती के निजी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। रविवार की रात करीब 12 बजे उसकी मौत हो गई। बलवंत ने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ी पीड़ा और क्या हो सकती है कि पहले बेटे की अर्थी को कंधा दिया। अब जिस बेटी को डोली में विदा करना था, उसकी अर्थी को भी कंधा देना पड़ रहा है।