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Basti News: अजगैवा जंगल के 42 पुरवों में नहीं दूर हुई पेयजल की किल्लत
Sat, 20 May 2023 01:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 20 May 2023 01:00 AM IST
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टिनिच। बढ़ती गर्मी से जहां लोग बेहाल हैं, वहीं सल्टौआ ब्लाक के अजगैवा जंगल ग्राम में हर घर जल योजना धराशायी है। मोटर की खराबी व ऑपरेटर की लापरवाही के चलते लोगों को पीने का पानी नसीब नहीं हो रहा है। इस मुद्दे पर गांव वालों ने प्रदर्शन भी किया था। जिलाधिकारी ने टीम गणित कर रिपोर्ट मांगी थी। बीडीओ के जरिए एडीओ पंचायत अरुणेश पाल ने जांच कर रिपोर्ट भेजी थी। रिपोर्ट में मोटर की खराबी बताई गई थी। तब से कोई सुध लेने वाला नहीं है।
लोगों को पेयजल मुहैया कराने के उद्देश्य से 1.44 करोड़ की लागत से वर्ष 2010 में जल निगम ने पानी की टंकी का निर्माण कराया था। ग्राम सभा के 42 पुरवों में पानी की सप्लाई दी गई। जब तक इस टंकी की जिम्मेदारी जल निगम के पास थी, तब तक इसका जैसे-तैसे पानी की आपूर्ति होती रही। वर्ष 2018 में इसको ग्राम पंचायत को हैंडओवर कर दिया गया। तब से ग्रामीणों को पानी की दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
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अंतिम छोर तक कभी नहीं पहुंचा पानी
- गांव निवासी इसरार अली खान का कहना है इस ग्राम पंचायत में 56 पुरवे हैं। मगर 42 पुरवे तक ही पानी की पाइप लाइन बिछाई गई है। उसमें भी गांव के अंतिम छोर तक आज तक पानी नहीं पहुचा। गणेश मौर्य कहते है कि डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी न मिल पाना दुर्भाग्य पूर्ण है। क्षेत्र पंचायत सदस्य रवींद्र यादव का कहना है कि सरकार की हर घर जल योजना केवल कागजों में है। ऑपरेटर हमेशा मोटर खराबी का रोना रोते हैं।
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जिम्मेदारों के अपने-अपने तर्क
एडीओ पंचायत अरुणेश पाल ने बताया कि मौके पर जांच में मोटर की खराबी मिली थी। ठेकेदार ने बताया था कि तीन दिन में मोटर सही हो जाएगा। रही बात मानदेय की तो वह प्रधान व सचिव की जिम्मेदारी है। ऑपरेटर आदित्य पांडेय ने बताया कि 2018 से ऑपरेटर का काम कर रहे हैं, परंतु अब तक मानदेय नहीं मिला है। अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि चंद्रशेखर चौधरी ने बताया कि बिल की वसूली से मानदेय देने की व्यवस्था है।
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लोगों को पेयजल मुहैया कराने के उद्देश्य से 1.44 करोड़ की लागत से वर्ष 2010 में जल निगम ने पानी की टंकी का निर्माण कराया था। ग्राम सभा के 42 पुरवों में पानी की सप्लाई दी गई। जब तक इस टंकी की जिम्मेदारी जल निगम के पास थी, तब तक इसका जैसे-तैसे पानी की आपूर्ति होती रही। वर्ष 2018 में इसको ग्राम पंचायत को हैंडओवर कर दिया गया। तब से ग्रामीणों को पानी की दिक्कत झेलनी पड़ रही है।
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अंतिम छोर तक कभी नहीं पहुंचा पानी
- गांव निवासी इसरार अली खान का कहना है इस ग्राम पंचायत में 56 पुरवे हैं। मगर 42 पुरवे तक ही पानी की पाइप लाइन बिछाई गई है। उसमें भी गांव के अंतिम छोर तक आज तक पानी नहीं पहुचा। गणेश मौर्य कहते है कि डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को पानी न मिल पाना दुर्भाग्य पूर्ण है। क्षेत्र पंचायत सदस्य रवींद्र यादव का कहना है कि सरकार की हर घर जल योजना केवल कागजों में है। ऑपरेटर हमेशा मोटर खराबी का रोना रोते हैं।
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जिम्मेदारों के अपने-अपने तर्क
एडीओ पंचायत अरुणेश पाल ने बताया कि मौके पर जांच में मोटर की खराबी मिली थी। ठेकेदार ने बताया था कि तीन दिन में मोटर सही हो जाएगा। रही बात मानदेय की तो वह प्रधान व सचिव की जिम्मेदारी है। ऑपरेटर आदित्य पांडेय ने बताया कि 2018 से ऑपरेटर का काम कर रहे हैं, परंतु अब तक मानदेय नहीं मिला है। अधिकारी केवल आश्वासन देते हैं। ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि चंद्रशेखर चौधरी ने बताया कि बिल की वसूली से मानदेय देने की व्यवस्था है।