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सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा

Sat, 20 Nov 2021 11:09 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Nov 2021 11:09 PM IST
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shortage of doctors in government hospitals
हरदी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन। - फोटो : BASTI
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों का टोटा
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14 सीएचसी-पीएचसी पर कहीं एक तो कहीं दो डॉक्टरों की नियुक्ति
बस्ती। डॉक्टरों की कमी की मार जिले के सरकारी अस्पताल झेल रहे हैैं। अस्पतालों में मानक के अनुसार डॉक्टर तैनात नहीं हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर इलाज के दावे पर सवाल उठने लगा हैं। हालांकि सीएमओ डॉ. अनूप कुमार कहते हैं कि सभी अस्पतालों में मानक के अनुसार डॉक्टर न होने के बावजूद मरीजों को शत-प्रतिशत इलाज मिल रहा है।
जिले में कुल 14 सीएचसी व 39 अतिरिक्त पीएचसी हैं। नियमानुसार सीएचसी पर छह एमबीबीएस, जबकि पीएचसी पर दो और अतिरिक्त पीएचसी पर एक एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती होनी चाहिए, मगर सीएचसी पर दो या तीन तथा पीएचसी पर एक-एक डॉक्टर तैनात हैं। हालांकि कई अस्पतालों में आयुष चिकित्सक भी हैं, जो पूरी व्यवस्था संचालित कर रहे हैं।
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अस्पतालों में विशेषज्ञ तो दूर तमाम स्थानों पर एमबीबीएस डॉक्टरों की तैनाती ही नहीं है। कई अस्पतालों में डॉक्टर रात्रि निवास भी नहीं करते। हरदी सहित कई अस्पताल होम्योपैथिक चिकित्सक के हवाले हैं। यही हाल कप्तानगंज का भी है। हाईवे पर पड़ने वाले इन अस्पतालों में चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगा है। हृदयरोग विशेषज्ञ जिले में करीब दो दशक से नहीं हैं, जिनकी तैनाती होती है वे आने से पहले अवकाश ल लेेते हैं। यही हाल अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों का है।
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सीएमओ डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि यह सही है कि जिले में 165 के स्थान पर 109 डॉक्टर तैनात हैं। 56 डॉक्टरों की जरूरत अभी भी है, मगर जो व्यवस्था है, उसी में काम चलाया जा रहा है। हृदय रोग के डॉक्टर तो हैं ही नहीं। इसके लिए शासन को पत्र लिखा गया है। सप्ताह में एक दिन रविवार को सभी 39 पीएचसी पर स्वास्थ्य मेला लगता है। इसके माध्यम से मरीजों व गर्भवती का इलाज हो रहा है। मुख्यमंत्री जन आरोग्य मेला लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं देने में सफल है।
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