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Basti News: रोडवेज से बड़ा बस स्टैंड हाईवे की सर्विस रोड
Sun, 23 Jul 2023 11:19 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 23 Jul 2023 11:19 PM IST
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बस्ती। यातायात पुलिस की मेहरबानी हो तो शहर के किसी भी मुहाने पर टैक्सी स्टैंड बन सकता है। इसके लिए योजनाबद्ध ढंग से टैक्सी वाहन चालकों को चढ़ावा चढ़ाना पड़ेगा। इसके बाद कोई रोकटोक नहीं है।
जब तक मन करें सड़क पर ही गाड़ी खड़ी कर सवारियों को भरते रहें। सफेदवर्दी वाले के सामने से गुजरने पर भी नहीं बोलते हैं। शहर के आधा दर्जन स्थल विभिन्न रूटों की सवारियां को भरने के लिए चर्चित हो गए हैं। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, गुजरात के लिए हाईवे का सर्विस रोड तो रोडवेज से बड़ा स्टैंड बन गया है। यहां से चौबीस घंटे में औसतन दो सौ गाड़ियां महानगरों के लिए निकल रही है।
पूर्वांचल का मध्य भूभाग होने के नाते मंडल मुख्यालय यात्रियों का बड़ा हब बन चुका है। यहां से लोकल रूट के अलावा महानगरों के लिए हजारों यात्रियों की आवाजाही प्रतिदिन है। निजी ट्रांसपोर्ट एजेंसियों ने इसे कमाई का जरिया बनाया तो यातायात पुलिस की भी चांदी हो गई। केवल महानगरों के लिए चलने वाली टूरिस्ट बसों से ही प्रतिदिन अच्छी खासी वसूली हो रही है। हाईवे की सर्विस रोड पर यह खेल अक्सर देखा जा सकता है।
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रोडवेज डिपो से कहीं ज्यादा बड़ी मंडी यहां सज रही है। बड़ेवन सर्विस रोड, टोल प्लाजा, मूड़घाट, फुटहिया सर्विस रोड पर भोर से ही वाेल्वो, डबल डेकर एवं अन्य वातानुकूलित बसों का डेरा लग जाता है। इन जगहों से लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, गुजरात तक की बसें सवारियां भरकर प्रतिदिन जाती है। इन जगहों पर निजी क्षेत्र से ही बाकायदा एजेंट मुस्तैद हैं, जिनकी पैठ यातायात एवं लोकल पुलिस में रहती है।
सवारियां भी इन्हीं के इशारे पर भरी जाती हैं। यह एजेंट निर्धारित रेट के मुताबिक अलग-अलग रूटों की बसों से पहले ही चढ़ावा चढ़ाने वाली धनराशि वसूल कर लेते हैं। इसके बाद बस चालक को सवारी भरकर चल देना होता है। बाद में एजेंट जिम्मेदारों को खुश करता है और स्वयं भी हिस्सा लेकर चल देता है।
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केवल लखनऊ के लिए चलती है डेढ़ सौ बसें
बस्ती हाईवे और शहर से मिलाकर केवल लखनऊ के लिए छोटी बड़ी डेढ़ सौ निजी बस संचालित हो रही हैं। इसमें अधिकांश वातानुकूलित बस शामिल हैं। रोडवेज डिपो के पास भी इतनी बड़ी संख्या में बस नहीं हैं। डिपो के पास कुल 86 बसें है। इसमें एसी बस एक भी नहीं शामिल है। लखनऊ, कानपुर के लिए स्थानीय डिपो से प्रतिदिन 15 से 16 बसें चलाई जा रही है। इसके अलावा मथुरा, दिल्ली, प्रयागराज तक के लिए दो-दो बसों की सेवा है।
नाॅन एसी इन बसों का किराया निजी वातानुकूलित बसों से ज्यादा है। इसलिए सवारियां प्राइवेट बसों को ही सफर का हिस्सा बना रही है। शहर के रोडवेज, कंपनीबाग, बड़ेवन, पटेल चौक, मूड़घाट चौराहे पर इन बसों को सुबह दस बजे के पहले कभी भी देखा जा सकता है।
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लग्जरी वाहनों का भी अवैध स्टैंड
यातायात पुलिस की मेहरबानी पर लग्जरी वाहनों का भी अवैध स्टैंड शहर के कई स्थानों पर है। रोडवेज नेहरू प्रतिमा के निकट गांधी नगर मार्ग के दोनों पटरियों पर किराए पर उपलब्ध होने वाली कार की मंडी सजती है। खास बात यह है इनमें से अधिकांश लग्जरी वाहनों को पंजीकरण टैक्सी में भी नहीं है। निजी उपयोग में पंजीकृत यह वाहन टैक्सी में चलाए जा रहे हैं, फिर यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग की चुप्पी नहीं टूटती है। जानकार बताते हैं कि इस अवैध स्टैंड से प्रतिमाह अच्छा खासा चढ़ावा पहुंचता है। इसीलिए जिम्मेदारों के आंख के सामने ही वाहनों की बुकिंग की जाती है। इसी तरह सुबह के समय मूड़घाट चौराहे पर लगभग एक दर्जन सीएनजी बेस्ड कार लखनऊ के लिए सवारियां भरती है। पुलिस इन्हें भी नहीं रोकती टोकती है। प्राइवेट वाहन में पंजीकत यह गाड़ियां प्रतिदिन लखनऊ तक पुलिस की रहमोकरम पर सवारियां ढोकर अच्छी कमाई कर रही है।
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अस्पताल चौराहा, कंपनीबाग भी बना अवैध स्टैंड
रोडवेज नेहरू तिराहा के निकट मालवीय रोड, अस्पताल चौराहा से जामडीह, अमहट, कचहरी चौराहा और कंपनीबाग चौराहा भी अवैध टैक्सी स्टैंड बन गया है। यहां से लोकल रूट की सवारियां भरी जाती है। मैजिक, जीप, टैम्पू आदि टैक्सी वाहनों की भरमार रहती है। डुमरियागंज, रुधौली, बांसी, महुली, बनकटी, कलवारी, कप्तानगंज आदि जगहों के यात्रियों को टैक्सी वाहन सुलभ होते है।-- -- -- -- -- -- -- --
दादागिरी से होती है वसूली, एक चालक की हो चुकी है मौत
इन अवैध टैक्सी स्टैंडों पर वसूली का खेल दादागिरी के साथ चलता है। प्रत्येक स्टैंड पर एक मुख्य एजेंट होता है। उसका हल्के के यातायात एवं सिविल पुलिस से चोली दामन का साथ होता है। मुख्य एजेंट के नीचे एक से दो कार्यकर्ता होते हैं, जो दिन भर हाथ में डंडा लेकर टैक्सी चालकों से सवारी बैठाने के नाम पर जबरन वसूली करते हैं। अभी पिछले माह इसी दादागिरी के चक्कर में एक टैक्सी चालक की जान भी चली गई थी। मनौरी चौराहे पर बगैर एजेंट को खुश किए सवारी भरने पर ऑटो चालक को मारा पीटा गया, जिससे बाद में उसकी मौत हो गई थी।
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अवैध स्टैंड कहीं नहीं बनने दिया गया है। यदि प्राइवेट लग्जरी कार टैक्सी में चल रही है तो यह नियम विरुद्ध है। अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। बसों की भी चेकिंग की जाती है। बिना परमिट के निर्धारित रूट की सवारी बैठाना गलत है।
-पंकज सिंह, एआरटीओ।
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टैक्सी स्टैंड के स्थल निर्धारण का अधिकार बीडीए या नगर पालिका के पास है। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती है। फिर भी यदि अवैध रूप से वाहन खड़े किए जा रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-आलोक सिंह, सीओ, यातायात।
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जब तक मन करें सड़क पर ही गाड़ी खड़ी कर सवारियों को भरते रहें। सफेदवर्दी वाले के सामने से गुजरने पर भी नहीं बोलते हैं। शहर के आधा दर्जन स्थल विभिन्न रूटों की सवारियां को भरने के लिए चर्चित हो गए हैं। लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, गुजरात के लिए हाईवे का सर्विस रोड तो रोडवेज से बड़ा स्टैंड बन गया है। यहां से चौबीस घंटे में औसतन दो सौ गाड़ियां महानगरों के लिए निकल रही है।
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पूर्वांचल का मध्य भूभाग होने के नाते मंडल मुख्यालय यात्रियों का बड़ा हब बन चुका है। यहां से लोकल रूट के अलावा महानगरों के लिए हजारों यात्रियों की आवाजाही प्रतिदिन है। निजी ट्रांसपोर्ट एजेंसियों ने इसे कमाई का जरिया बनाया तो यातायात पुलिस की भी चांदी हो गई। केवल महानगरों के लिए चलने वाली टूरिस्ट बसों से ही प्रतिदिन अच्छी खासी वसूली हो रही है। हाईवे की सर्विस रोड पर यह खेल अक्सर देखा जा सकता है।
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रोडवेज डिपो से कहीं ज्यादा बड़ी मंडी यहां सज रही है। बड़ेवन सर्विस रोड, टोल प्लाजा, मूड़घाट, फुटहिया सर्विस रोड पर भोर से ही वाेल्वो, डबल डेकर एवं अन्य वातानुकूलित बसों का डेरा लग जाता है। इन जगहों से लखनऊ, दिल्ली, मुंबई, गुजरात तक की बसें सवारियां भरकर प्रतिदिन जाती है। इन जगहों पर निजी क्षेत्र से ही बाकायदा एजेंट मुस्तैद हैं, जिनकी पैठ यातायात एवं लोकल पुलिस में रहती है।
सवारियां भी इन्हीं के इशारे पर भरी जाती हैं। यह एजेंट निर्धारित रेट के मुताबिक अलग-अलग रूटों की बसों से पहले ही चढ़ावा चढ़ाने वाली धनराशि वसूल कर लेते हैं। इसके बाद बस चालक को सवारी भरकर चल देना होता है। बाद में एजेंट जिम्मेदारों को खुश करता है और स्वयं भी हिस्सा लेकर चल देता है।
केवल लखनऊ के लिए चलती है डेढ़ सौ बसें
बस्ती हाईवे और शहर से मिलाकर केवल लखनऊ के लिए छोटी बड़ी डेढ़ सौ निजी बस संचालित हो रही हैं। इसमें अधिकांश वातानुकूलित बस शामिल हैं। रोडवेज डिपो के पास भी इतनी बड़ी संख्या में बस नहीं हैं। डिपो के पास कुल 86 बसें है। इसमें एसी बस एक भी नहीं शामिल है। लखनऊ, कानपुर के लिए स्थानीय डिपो से प्रतिदिन 15 से 16 बसें चलाई जा रही है। इसके अलावा मथुरा, दिल्ली, प्रयागराज तक के लिए दो-दो बसों की सेवा है।
नाॅन एसी इन बसों का किराया निजी वातानुकूलित बसों से ज्यादा है। इसलिए सवारियां प्राइवेट बसों को ही सफर का हिस्सा बना रही है। शहर के रोडवेज, कंपनीबाग, बड़ेवन, पटेल चौक, मूड़घाट चौराहे पर इन बसों को सुबह दस बजे के पहले कभी भी देखा जा सकता है।
लग्जरी वाहनों का भी अवैध स्टैंड
यातायात पुलिस की मेहरबानी पर लग्जरी वाहनों का भी अवैध स्टैंड शहर के कई स्थानों पर है। रोडवेज नेहरू प्रतिमा के निकट गांधी नगर मार्ग के दोनों पटरियों पर किराए पर उपलब्ध होने वाली कार की मंडी सजती है। खास बात यह है इनमें से अधिकांश लग्जरी वाहनों को पंजीकरण टैक्सी में भी नहीं है। निजी उपयोग में पंजीकृत यह वाहन टैक्सी में चलाए जा रहे हैं, फिर यातायात पुलिस एवं परिवहन विभाग की चुप्पी नहीं टूटती है। जानकार बताते हैं कि इस अवैध स्टैंड से प्रतिमाह अच्छा खासा चढ़ावा पहुंचता है। इसीलिए जिम्मेदारों के आंख के सामने ही वाहनों की बुकिंग की जाती है। इसी तरह सुबह के समय मूड़घाट चौराहे पर लगभग एक दर्जन सीएनजी बेस्ड कार लखनऊ के लिए सवारियां भरती है। पुलिस इन्हें भी नहीं रोकती टोकती है। प्राइवेट वाहन में पंजीकत यह गाड़ियां प्रतिदिन लखनऊ तक पुलिस की रहमोकरम पर सवारियां ढोकर अच्छी कमाई कर रही है।
अस्पताल चौराहा, कंपनीबाग भी बना अवैध स्टैंड
रोडवेज नेहरू तिराहा के निकट मालवीय रोड, अस्पताल चौराहा से जामडीह, अमहट, कचहरी चौराहा और कंपनीबाग चौराहा भी अवैध टैक्सी स्टैंड बन गया है। यहां से लोकल रूट की सवारियां भरी जाती है। मैजिक, जीप, टैम्पू आदि टैक्सी वाहनों की भरमार रहती है। डुमरियागंज, रुधौली, बांसी, महुली, बनकटी, कलवारी, कप्तानगंज आदि जगहों के यात्रियों को टैक्सी वाहन सुलभ होते है।
दादागिरी से होती है वसूली, एक चालक की हो चुकी है मौत
इन अवैध टैक्सी स्टैंडों पर वसूली का खेल दादागिरी के साथ चलता है। प्रत्येक स्टैंड पर एक मुख्य एजेंट होता है। उसका हल्के के यातायात एवं सिविल पुलिस से चोली दामन का साथ होता है। मुख्य एजेंट के नीचे एक से दो कार्यकर्ता होते हैं, जो दिन भर हाथ में डंडा लेकर टैक्सी चालकों से सवारी बैठाने के नाम पर जबरन वसूली करते हैं। अभी पिछले माह इसी दादागिरी के चक्कर में एक टैक्सी चालक की जान भी चली गई थी। मनौरी चौराहे पर बगैर एजेंट को खुश किए सवारी भरने पर ऑटो चालक को मारा पीटा गया, जिससे बाद में उसकी मौत हो गई थी।
अवैध स्टैंड कहीं नहीं बनने दिया गया है। यदि प्राइवेट लग्जरी कार टैक्सी में चल रही है तो यह नियम विरुद्ध है। अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। बसों की भी चेकिंग की जाती है। बिना परमिट के निर्धारित रूट की सवारी बैठाना गलत है।
-पंकज सिंह, एआरटीओ।
टैक्सी स्टैंड के स्थल निर्धारण का अधिकार बीडीए या नगर पालिका के पास है। इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती है। फिर भी यदि अवैध रूप से वाहन खड़े किए जा रहे हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी।
-आलोक सिंह, सीओ, यातायात।