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Basti News: सरयू का जलस्तर घटा, कई गांवों में कटान तेज
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मईपुर में कटान करती सरयू संवाद
बस्ती। सरयू नदी का जलस्तर बृहस्पतिवार को घटकर खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया, लेकिन तटवर्ती गांवों में मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। जलस्तर घटने के साथ कई स्थानों पर कटान तेज हो गई है। कुदरहा, दुबौलिया और विक्रमजोत क्षेत्र के करीब 25 से 30 बाढ़ प्रभावित गांवों में कटान का खतरा बना हुआ है। कुछ तटबंधों पर भी नदी का दबाव बढ़ गया है।
केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार बृहस्पतिवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.49 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। दुबौलिया संवाद के अनुसार गांव सुविका बाबू में बाढ़ का पानी उतरने के बावजूद ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार हैं। आवागमन के लिए अभी भी मोटरबोट का सहारा लेना पड़ रहा है। घरों में पानी और कीचड़ जमा होने से लोगों को रोजमर्रा के काम में परेशानी हो रही है। माझा क्षेत्र के कई गांवों में भी पानी फैला हुआ है। कटरिया-चांदपुर तटबंध के ठोकर नंबर एक पर नदी का दबाव बना हुआ है।
कुदरहा संवाद के अनुसार क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण तरफ बसे महुआपार कला, मईपुर, बैडारी एहतमाली और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों में कटान का खतरा बढ़ गया है। कुछ स्थानों पर नदी तेजी से किनारे की मिट्टी काट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के दौरान नदी की धारा घरों के करीब पहुंच गई थी। अब पानी घटने के साथ कटान तेज होने से घर और खेत नदी में समाने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने कटान प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और बचाव कार्य तेज करने की मांग की है।
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घर और खेतों पर मंडरा रहा संकट
विक्रमजोत क्षेत्र में बीडी तटबंध और नदी के बीच बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों में कटान का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ शुरू होने के साथ ही कई स्थानों पर नदी ने कटान शुरू कर दिया था। जलस्तर घटने के साथ कटान बढ़ने की आशंका से तटवर्ती परिवार चिंतित हैं।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में सड़ रही फसल और वनस्पतियों से दुर्गंध उठने लगी है। इससे ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियां फैलने की भी चिंता है। उनका कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान के बाद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
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सरयू का जलस्तर घट रहा है। संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल कहीं कोई समस्या नहीं है। कटान से बचाव के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
-बृजेश सोनी, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड।
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केंद्रीय जल आयोग, अयोध्या कार्यालय के अनुसार बृहस्पतिवार शाम पांच बजे सरयू का जलस्तर 92.49 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 92.73 मीटर है। दुबौलिया संवाद के अनुसार गांव सुविका बाबू में बाढ़ का पानी उतरने के बावजूद ग्रामीणों की दुश्वारियां बरकरार हैं। आवागमन के लिए अभी भी मोटरबोट का सहारा लेना पड़ रहा है। घरों में पानी और कीचड़ जमा होने से लोगों को रोजमर्रा के काम में परेशानी हो रही है। माझा क्षेत्र के कई गांवों में भी पानी फैला हुआ है। कटरिया-चांदपुर तटबंध के ठोकर नंबर एक पर नदी का दबाव बना हुआ है।
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कुदरहा संवाद के अनुसार क्षेत्र में कलवारी-रामपुर तटबंध के दक्षिण तरफ बसे महुआपार कला, मईपुर, बैडारी एहतमाली और टेंगरिहा राजा समेत कई गांवों में कटान का खतरा बढ़ गया है। कुछ स्थानों पर नदी तेजी से किनारे की मिट्टी काट रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के दौरान नदी की धारा घरों के करीब पहुंच गई थी। अब पानी घटने के साथ कटान तेज होने से घर और खेत नदी में समाने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने कटान प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और बचाव कार्य तेज करने की मांग की है।
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घर और खेतों पर मंडरा रहा संकट
विक्रमजोत क्षेत्र में बीडी तटबंध और नदी के बीच बसे शंभूपुर, पकड़ी संग्राम, लकड़ी पांडेय, लकड़ी दूबे और अर्जुनपुर समेत कई गांवों में कटान का खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार बाढ़ शुरू होने के साथ ही कई स्थानों पर नदी ने कटान शुरू कर दिया था। जलस्तर घटने के साथ कटान बढ़ने की आशंका से तटवर्ती परिवार चिंतित हैं।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद खेतों में सड़ रही फसल और वनस्पतियों से दुर्गंध उठने लगी है। इससे ग्रामीणों को संक्रामक बीमारियां फैलने की भी चिंता है। उनका कहना है कि बाढ़ से हुए नुकसान के बाद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है।
सरयू का जलस्तर घट रहा है। संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी की जा रही है। फिलहाल कहीं कोई समस्या नहीं है। कटान से बचाव के लिए भी आवश्यक इंतजाम किए गए हैं।
-बृजेश सोनी, सहायक अभियंता, बाढ़ खंड।