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खतरे के निशान की तरफ बढ़ी सरयू, दहशत में ग्रामीण

Sun, 18 Jul 2021 11:09 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jul 2021 11:09 PM IST
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Saryu moves towards danger mark
खतरे के निशान की तरफ बढ़ी सरयू
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तटबंध के अधूरा होने से इलाके में मंडरा रहा खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी
विक्रमजोत। मानसून के फिर से सक्रिय होने के साथ ही विक्रमजोत क्षेत्र के दर्जनों गांवों के बाशिंदों के चेहरे पर चिंता की लकीरें बढ़ने लगी हैं। इन गांवों को सरयू के कहर से बचाने के लिए बाढ़ खंड ने 2013 से बनाया जा रहा 8.1 किलोमीटर लंबा विक्रमजोत लोलपुर तटबंध अभी भी अधूरा है।
सरयू नदी का जलस्तर फिर से बढ़ने लगा है। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार रविवार को सरयू नदी का जलस्तर 92.130 रिकॉर्ड किया गया जो कि खतरे के निशान से अभी 60 सेंटीमीटर कम है। करीब एक सप्ताह से चेतावनी लेबल से नीचे बह रही नदी के जलस्तर में रुक-रुक इजाफा होना शुरू हो गया है। नदी के बढ़ रहे पानी को लेकर नदी किनारे बसे विक्रमजोत ब्लॉक के तट विहीन गांवों के किसानों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। पिछले साल आई बाढ़ व पानी के ठहराव से जूझे ग्रामीण सहमें हैं। वहीं, अधूरा लोलपुर विक्रमजोत तटबंध आसपास के ग्रामीणों के लिए मुसीबत बना हुआ है। उपजिलाधिकारी हर्रैया सुखबीर सिंह ने बताया कि उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार ग्रामीणों से बातचीत करके भूमि का बैनामा कराया जा रहा है। बारिश से चलते तटबंध का कार्य प्रभावित हो गया है। जल्द ही बांध का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।
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सात वर्षों में पूरा नहीं हो सका तटबंध
सात वर्ष पहले जब इस तटबंध का निर्माण शुरू हुआ तो इसकी अनुमानित लागत 80 करोड़ थी, नदी तटबंध के एलाइमेंट से करीब चार किमी दूर थी। इन सात वर्षों में बांध की लागत भी बढ़ गई और नदी चार किमी आबादी की तरफ आकर तटबंध से सट कर बहने लगी। अभी भी बांध का भरथापुर के करीब से विक्रमजोत के बीच में करीब दो किमी हिस्सा अधूरा है। सात वर्ष में बाढ़ खंड मात्र छह किमी तटबंध का निर्माण करा पाया है। विकास क्षेत्र के माझा क्षेत्र के कई गांव बीते 47 वर्षों से सरयू के कहर को झेलने को मजबूर है। प्रशासन की लापरवाही व उदासीनता के चलते अभी तक लगभग 50 से अधिक बसे बसाए गांव सरयू की धारा में समा कर गैर चिरागी हो गए हैं।
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लोलपुर तटबंध बनने में अवरोध
विक्रमजोत लोलपुर तटबंध के नहीं बनने का कारण पहले धन था। यह धन केंद्र सरकार से मिलना था। जब विभाग को धन मिल गया तो अब ग्रामीणों ने बांध निर्माण कार्य रोक दिया। बाढ़ प्रभावित गांव कल्यानपुर व भरथापुर के निवासी किसान सतीशचंद्र पांडेय, अखिलेश चंद्र पांडेय, जीतेंद्र सिंह, अभिषेक शर्मा, हेमंत पांडेय, पूर्व प्रधान संजय यादव का कहना है कि बांध के बनने से हमारा कोई लाभ नहीं है। हमारी खेती योग्य जमीन पहले ही नदी में समा चुकी है। जो है प्रशासन तटबंध का निर्माण के लिए मांग रहा है। नया एलाइमेंट बनाकर बांध निर्माण कर रहा है। उससे हमारा गांव बांध और नदी के बीच में आ जा रहा है। नदी गांव से सट कर बह रही सरयू ने विगत वर्षों की तरह कटान की तो कभी भी हमारे घर भी नदी में समा जाएंगे। इसलिए या तो पुराने एलाइमेंट पर बांध बनाएं या रिंगबांध बनाकर हमारे गांव व घरों को सुरक्षित करें तभी हम बांध को बनने देंगे और अपनी जमीन बांध बनाने के लिए देंगे।

बन जाता बांध तो बच जाता सहजौरा का अस्तित्व
विक्रमजोत लोलपुर तटबंध 2013 में जिस एलाइमेंट पर प्रस्तावित था उस समय नदी बांध से तीन किमी दूर अयोध्या की तरफ थी। अगर उसी समय बांध बन गया होता, तो सैकड़ों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि के साथ रानीपुर, कठवनियां और सहजौरा पाठक गांव का अस्तित्व बच जाता। इन गांवों में बसे करीब 200 परिवार बेघर होने से बच जाते। 2017 में आई भीषण बाढ़ में इन गांवों में बने घर नदी की धारा में समा गए। इसके साथ ही भरथापुर, कल्याणपुर, पड़ाव, चांदपुर एवं संदलपुर गांव भी सुरक्षित हो जाते।
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