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Basti News: बाढ़ में फिर बेघर होने का सता रहा डर, सरयू की कृपा पर टिकी निगाहें
Tue, 01 Aug 2023 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 01 Aug 2023 01:05 AM IST
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विक्रमजोत क्षेत्र में सरयू नदी कर रही कटान।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। विक्रमजोत विकास क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित व तटबंध विहीन गांवों में बेघर होने का डर सता रहा है। सरयू नदी के हल्की कटान से यहां ग्रामीणों की हलचल बढ़ गई है। बाढ़ बचाव का कोई प्रशासनिक इंतजाम इन गांवों में नहीं है। ग्रामीण सरयू मैया की कृपा पर ही निगाहें टिकाए हुए हैं।
विक्रमजोत ब्लॉक के भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव, संदलपुर आदि गांव तटबंध विहीन है। नदी कटान करते हुए इन गांवों के करीब पहुंच गई है। अब यहां लोगों की घर-गृहस्थी सरयू नदी की कृपा पर ही निर्भर है। 14 साल से सरयू नदी की लहरें इन गांवों से टकराकर लौट जाती हैं। मानसून आते ही यहां के नागरिकों को बाढ़ का भय सताने लगता है। सरयू नदी ने कई बार इन ग्रामीणों को बेघर कर दिया है। बाढ़ से इन गांवों को सुरक्षित करने के नाम पर केवल अलग- अलग जगहों पर तीन डैंपनर बनाए गए हैं। जिन पर चार गांवों के करीब दो हजार लोगों के आशियाने को कटान से बचाने की जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों की मानें तो प्रशासन की ओर से किया गया यह इंतजाम नाकाफी है।
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बाढ़ में बह चुके हैं आधा दर्जन गांव
पिछले दो दशक के दौरान यहां के नागरिकों को कई बार भीषण बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ी है। कुछ गांवों के अस्तित्व ही खत्म हो चुके हैं। कुछ गांव उसी कगार पर पहुंच चुके हैं। क्षेत्र के सीतारामपुर, सहजौरा पाठक, पीतपुर, पिकौरा, शिवपुर आदि गांव बाढ़ की त्रासदी में सरयू की धारा में विलीन हो चुके हैं। वर्तमान में इन गांवों का अस्तित्व नहीं है। सैकड़ों एकड़ जमीन रेत में तब्दील हो गई है। यहां के नागरिकों को आसपास के दूसरे गांवों में जाकर बसना पड़ा। इसी तरह भरथापुर, कल्याणपुर, संदलपुर समेत आधा दर्जन गांव कटान के मुहाने पर है। तीन साल पहले सरयू के बढ़े जलस्तर के दौरान यहां भीषण कटान हुई थी। इन गावों में तबाही का मंजर था। लोगों को अन्यत्र शरणार्थी बनना पड़ा था।
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बस्ती। विक्रमजोत विकास क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित व तटबंध विहीन गांवों में बेघर होने का डर सता रहा है। सरयू नदी के हल्की कटान से यहां ग्रामीणों की हलचल बढ़ गई है। बाढ़ बचाव का कोई प्रशासनिक इंतजाम इन गांवों में नहीं है। ग्रामीण सरयू मैया की कृपा पर ही निगाहें टिकाए हुए हैं।
विक्रमजोत ब्लॉक के भरथापुर, कल्यानपुर, पड़ाव, संदलपुर आदि गांव तटबंध विहीन है। नदी कटान करते हुए इन गांवों के करीब पहुंच गई है। अब यहां लोगों की घर-गृहस्थी सरयू नदी की कृपा पर ही निर्भर है। 14 साल से सरयू नदी की लहरें इन गांवों से टकराकर लौट जाती हैं। मानसून आते ही यहां के नागरिकों को बाढ़ का भय सताने लगता है। सरयू नदी ने कई बार इन ग्रामीणों को बेघर कर दिया है। बाढ़ से इन गांवों को सुरक्षित करने के नाम पर केवल अलग- अलग जगहों पर तीन डैंपनर बनाए गए हैं। जिन पर चार गांवों के करीब दो हजार लोगों के आशियाने को कटान से बचाने की जिम्मेदारी है।
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ग्रामीणों की मानें तो प्रशासन की ओर से किया गया यह इंतजाम नाकाफी है।
बाढ़ में बह चुके हैं आधा दर्जन गांव
पिछले दो दशक के दौरान यहां के नागरिकों को कई बार भीषण बाढ़ की त्रासदी झेलनी पड़ी है। कुछ गांवों के अस्तित्व ही खत्म हो चुके हैं। कुछ गांव उसी कगार पर पहुंच चुके हैं। क्षेत्र के सीतारामपुर, सहजौरा पाठक, पीतपुर, पिकौरा, शिवपुर आदि गांव बाढ़ की त्रासदी में सरयू की धारा में विलीन हो चुके हैं। वर्तमान में इन गांवों का अस्तित्व नहीं है। सैकड़ों एकड़ जमीन रेत में तब्दील हो गई है। यहां के नागरिकों को आसपास के दूसरे गांवों में जाकर बसना पड़ा। इसी तरह भरथापुर, कल्याणपुर, संदलपुर समेत आधा दर्जन गांव कटान के मुहाने पर है। तीन साल पहले सरयू के बढ़े जलस्तर के दौरान यहां भीषण कटान हुई थी। इन गावों में तबाही का मंजर था। लोगों को अन्यत्र शरणार्थी बनना पड़ा था।
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