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राइस मिलरों ने मांगा पूर्वांचल पैकेज
basti
Updated Tue, 02 Oct 2018 11:56 PM IST
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बैठक करते राइस मिलर्स।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। राइस मिलर्स एसोसिएशन इस बार धान खरीद में तब तक नहीं सहयोग करेगा जब तक सरकार पूर्वांचल पैकेज को नहीं स्वीकारती। यदि जबरन उसे धान खरीद में शामिल किया गया तो मिलर्स एक साथ मंडी को अपना लाइसेंस सरेंडर कर देंगे। राइस मिलरों की यह बात अब सरकार तक पहुंचाई जाएगी। ये उद्गार राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष उमेश चंद्र मिश्र ने व्यक्त किए। वह हाईवे स्थित एक रेस्टोरेंट में मंगलवार को आयोजित राइस मिलर्स एसोसिएशन की बैठक में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम के मानक के अनुसार धान की रिकवरी करीब 52-55 प्रतिशत तक आती है। खंडा आदि लेकर यह करीब 58 से 60 फीसदी पहुंच जाती है। बावजूद इसके सरकार मिलरों से 67 प्रतिशत धान की रिकवरी करती है। यानी हर साल करीब 12 प्रतिशत नुकसान में मिलर काम कर रहा है। अब यह संभव नहीं होगा। रिकवरी का प्रतिशत घटाया जाए, जिससे मिलें धान खरीद में सहयोग कर सकें। यही नहीं कुटाई की कीमत बीस वर्ष से दस रुपये ही है। इसमें इस बार बीस रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि भी सरकार ने जोड़ी है, मगर कुटाई की यह कीमत फिर भी कम है। क्योंकि पिछले वर्षों में महंगाई कई गुना बढ़ी है। संसाधन महंगे हुए हैं। फिर भी सरकार अब तक इसे लेकर चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में यदि मिलरों से काम लेना है तो सरकार इसे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार मिलों को नोडल एजेंसी अथवा आढ़त के माध्यम से कार्य कराए तो भी मिलें धान खरीद में सहयोग कर सकती हैं। बैठक में मिलर्स एसोसिएशन के रीजनल चेयरमैन जयेंद्र प्रताप सिंह ने पूर्वांचल पैकेज की मांग रखी। कहा सरकार यह जानते हुए कि पूर्वांचल में धान की रिकवरी अच्छी नहीं है, फिर भी मिलरों पर बेवजह दबाव बनाती है। अब मांग पूरी न हुई तो इस बार राइस मिलर्स बाराबंकी की तर्ज पर अपना लाइसेंस मंडी को सरेंडर कर देंगे। इस मौके पर मिलर्स एसोसिएशन के जय प्रकाश सिंह, बद्री प्रसाद खंडेलवाल, विजय प्रताप सिंह, सिद्धार्थनगर के एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार जायसवाल, बिहारी लाल, बाल गोविंद सिंह, कुुलदीप उपाध्याय सहित तमाम सदस्य मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य निगम के मानक के अनुसार धान की रिकवरी करीब 52-55 प्रतिशत तक आती है। खंडा आदि लेकर यह करीब 58 से 60 फीसदी पहुंच जाती है। बावजूद इसके सरकार मिलरों से 67 प्रतिशत धान की रिकवरी करती है। यानी हर साल करीब 12 प्रतिशत नुकसान में मिलर काम कर रहा है। अब यह संभव नहीं होगा। रिकवरी का प्रतिशत घटाया जाए, जिससे मिलें धान खरीद में सहयोग कर सकें। यही नहीं कुटाई की कीमत बीस वर्ष से दस रुपये ही है। इसमें इस बार बीस रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि भी सरकार ने जोड़ी है, मगर कुटाई की यह कीमत फिर भी कम है। क्योंकि पिछले वर्षों में महंगाई कई गुना बढ़ी है। संसाधन महंगे हुए हैं। फिर भी सरकार अब तक इसे लेकर चुप्पी साधे हुए है। ऐसे में यदि मिलरों से काम लेना है तो सरकार इसे बढ़ाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार मिलों को नोडल एजेंसी अथवा आढ़त के माध्यम से कार्य कराए तो भी मिलें धान खरीद में सहयोग कर सकती हैं। बैठक में मिलर्स एसोसिएशन के रीजनल चेयरमैन जयेंद्र प्रताप सिंह ने पूर्वांचल पैकेज की मांग रखी। कहा सरकार यह जानते हुए कि पूर्वांचल में धान की रिकवरी अच्छी नहीं है, फिर भी मिलरों पर बेवजह दबाव बनाती है। अब मांग पूरी न हुई तो इस बार राइस मिलर्स बाराबंकी की तर्ज पर अपना लाइसेंस मंडी को सरेंडर कर देंगे। इस मौके पर मिलर्स एसोसिएशन के जय प्रकाश सिंह, बद्री प्रसाद खंडेलवाल, विजय प्रताप सिंह, सिद्धार्थनगर के एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष विनोद कुमार जायसवाल, बिहारी लाल, बाल गोविंद सिंह, कुुलदीप उपाध्याय सहित तमाम सदस्य मौजूद रहे।
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