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Basti News: बेसन में चावल का आटा...केमिकल से रंगीन हो रहे रसगुल्ले
Wed, 26 Nov 2025 12:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Wed, 26 Nov 2025 12:47 AM IST
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बाजार में बिक रहा बेसन संवाद
बस्ती। खाद्य वस्तुओं में मिलावट का धंधा फिर से जोर पकड़ लिया है। सहालग की आड़ में मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। मुनाफा के लिए धंधेबाजों ने गांव क्षेत्र से खराब रद्दी चावल का टुकड़ा कम दाम में खरीद कर पिसवा लेते हैं और उसे बेसन में मिलाकर बेसन के ही भाव में बेचते हैं। वहीं जानकर बताते हैं कि रंगीन रसगुल्लों में हानिकारक केमिकल भी मिलाए जा रहे हैं। नमूनों के आधार पर पिछले माह 11 लोगों के खिलाफ एडीएम प्रशासन की कोर्ट में रिपोर्ट दी गई है।
सहालग में मांग बढ़ने पर मिलावटखोरों ने भी धंधा तेज कर दिया है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हुए ये धंधेबाज मैदा और बेसन में खराब चावल का आटा व केमिकल युक्त रंग मिला रहे हैं। ऐसे में खरीदारी करें तो सतर्क रहें। बाजार में इस समय बेसन 130 रुपये किलो, मैदा व सूजी 70 रुपये किलो तक बिक रहा है। इनकी मांग अधिक होने की वजह से मिलावट की शिकायतें बढ़ गई हैं।
बाजार के जानकारों के अनुसार, सहालग में मैदा और बेसन की खपत हर आयोजन में होती है। इसी मांग का फायदा उठाते हुए कुछ व्यापारी पुराने या खराब चावल को पीसकर बेसन में मिला रहे हैं और पीला रंग डालकर इसे असली जैसा बना देते हैं। वहीं, मैदा में भी चावल का आटा मिलाया जा रहा है, जिससे इसमें फफूंदी लगने और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहती है। किराना व्यापारी प्रमोद अग्रहरि ने कहा कि त्योहारों पर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। इससे अच्छे व्यापारियों की साख खराब होती है।
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व्यापारी राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि मिलावट की वजह से व्यापार प्रभावित होने लगा है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है। चीफ फूड इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सहालग की सीजन में मिलावटखोरों पर सख्ती के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले ही कई मामले पकड़े जा चुके हैं।
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लिवर को झटका देगा यह मिलावट
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. विजय तिवारी ने बताया कि खाद्य सामग्री में मिलावट का सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। बेसन में मिलाया जा रहा केमिकलयुक्त पीला रंग शरीर के अंदर घाव बनाता है। धीरे-धीरे ये घाव लिवर को खराब करता है। इसके अलावा मिलावट की वजह से एलर्जी की समस्या बढ़ती है। इसलिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए।
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खराब बेसन से बिगड़ गई थी सेहत, हुआ था हंगामा
लालगंज क्षेत्र में खराब बेसन के इस्तेमाल से परिवार के लोग बीमार पड़ गए थे। शादी-विवाह के आयोजन में घर में खराब मसालाा, बेसन आदि की सप्लाई हुई थी। सेहत बिगड़ने पर हड़कंप मचा। बाद में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम गांव में पहुंची। संबंधी के घर से बचे हुए खाद्य सामग्री का सैंपल लिया गया। कहां से सामग्री मंगवाई गई थी, उस दुकानदार से पूछताछ की गई और वहां से भी सैंपल भरकर भेजा गया था।
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ऐसे करते हैं मिलावट
जानकारों ने बताया कि सहालग में बेसन पैकेट और खुले में भी बिक रहा है। धंधेबाज खुले बेसन के साथ पैकेट में भी अपने ब्रांड के नाम पर बेसन तैयार कर रहे, उसमें खराब चावल के टुकड़े पिसवाकर उसे बेसन में मिला देते हैं। रंग डालकर उसे बेसन के कलर में कर दिया जाता है और फिर बाजार में उतार दिया जाता है। 10 रुपये का चावल बेसन बनने के बाद 130 रुपये में बिक जा रहा है। बड़े आयोजन में लोग क्वालिटी पर ध्यान नहीं देते।
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कोट
मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बेसन, मैदा का भी नमूना लिया जाता है। इस माह कई मामले सामने आए, एओ कोर्ट में भेज दिया गया है। अभियान के लिए पांच सदस्यीय टीम लगी हुई है। निगरानी स्वयं कर रहे हैं।
-चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी, बस्ती।
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सहालग में मांग बढ़ने पर मिलावटखोरों ने भी धंधा तेज कर दिया है। लोगों की सेहत से खिलवाड़ करते हुए ये धंधेबाज मैदा और बेसन में खराब चावल का आटा व केमिकल युक्त रंग मिला रहे हैं। ऐसे में खरीदारी करें तो सतर्क रहें। बाजार में इस समय बेसन 130 रुपये किलो, मैदा व सूजी 70 रुपये किलो तक बिक रहा है। इनकी मांग अधिक होने की वजह से मिलावट की शिकायतें बढ़ गई हैं।
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बाजार के जानकारों के अनुसार, सहालग में मैदा और बेसन की खपत हर आयोजन में होती है। इसी मांग का फायदा उठाते हुए कुछ व्यापारी पुराने या खराब चावल को पीसकर बेसन में मिला रहे हैं और पीला रंग डालकर इसे असली जैसा बना देते हैं। वहीं, मैदा में भी चावल का आटा मिलाया जा रहा है, जिससे इसमें फफूंदी लगने और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ने की आशंका रहती है। किराना व्यापारी प्रमोद अग्रहरि ने कहा कि त्योहारों पर मिलावटखोर सक्रिय हो जाते हैं। इससे अच्छे व्यापारियों की साख खराब होती है।
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व्यापारी राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि मिलावट की वजह से व्यापार प्रभावित होने लगा है। इसलिए ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है। चीफ फूड इंस्पेक्टर अनिल कुमार सिंह का कहना है कि सहालग की सीजन में मिलावटखोरों पर सख्ती के लिए अभियान चलाया जा रहा है। इससे पहले ही कई मामले पकड़े जा चुके हैं।
लिवर को झटका देगा यह मिलावट
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. विजय तिवारी ने बताया कि खाद्य सामग्री में मिलावट का सीधा असर पाचन तंत्र पर पड़ता है। बेसन में मिलाया जा रहा केमिकलयुक्त पीला रंग शरीर के अंदर घाव बनाता है। धीरे-धीरे ये घाव लिवर को खराब करता है। इसके अलावा मिलावट की वजह से एलर्जी की समस्या बढ़ती है। इसलिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता को लेकर सतर्कता बरतनी चाहिए।
खराब बेसन से बिगड़ गई थी सेहत, हुआ था हंगामा
लालगंज क्षेत्र में खराब बेसन के इस्तेमाल से परिवार के लोग बीमार पड़ गए थे। शादी-विवाह के आयोजन में घर में खराब मसालाा, बेसन आदि की सप्लाई हुई थी। सेहत बिगड़ने पर हड़कंप मचा। बाद में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम गांव में पहुंची। संबंधी के घर से बचे हुए खाद्य सामग्री का सैंपल लिया गया। कहां से सामग्री मंगवाई गई थी, उस दुकानदार से पूछताछ की गई और वहां से भी सैंपल भरकर भेजा गया था।
ऐसे करते हैं मिलावट
जानकारों ने बताया कि सहालग में बेसन पैकेट और खुले में भी बिक रहा है। धंधेबाज खुले बेसन के साथ पैकेट में भी अपने ब्रांड के नाम पर बेसन तैयार कर रहे, उसमें खराब चावल के टुकड़े पिसवाकर उसे बेसन में मिला देते हैं। रंग डालकर उसे बेसन के कलर में कर दिया जाता है और फिर बाजार में उतार दिया जाता है। 10 रुपये का चावल बेसन बनने के बाद 130 रुपये में बिक जा रहा है। बड़े आयोजन में लोग क्वालिटी पर ध्यान नहीं देते।
कोट
मिलावटखोरों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। बेसन, मैदा का भी नमूना लिया जाता है। इस माह कई मामले सामने आए, एओ कोर्ट में भेज दिया गया है। अभियान के लिए पांच सदस्यीय टीम लगी हुई है। निगरानी स्वयं कर रहे हैं।
-चितरंजन कुमार सिंह, जिला अभिहित अधिकारी, बस्ती।