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मेडिकल कॉलेज में संसाधन भरपूर, विशेषज्ञ व टेक्नीशियन का इंतजार
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मेडिकल कॉलेज ओपेक कैली चिकित्सालय।
- फोटो : BASTI
मेडिकल कॉलेज में संसाधन भरपूर, विशेषज्ञ व टेक्नीशियन का इंतजार
वेंटिलेटर व ऑक्सीजन प्लांट के संचालन के लिए तकनीकी हाथों की जरूरत
बस्ती। तमाम संसाधनों से सुसज्जित मेडिकल कॉलेज की सुविधा ठहरी हुई है। कारण यह कि यहां संसाधन तो भरपूर हैं, मगर इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ व तकनीशियन का इंतजार दो वर्ष से हो रहा है। ऐसे में यहां स्थापित करीब 120 वेंटिलेटर व तीन ऑक्सीजन प्लांट महज स्थापना तक ही रह गए हैं। इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यह अलग बात है कि प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि सब कुछ ठीक है। वह शासन को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं, मगर धरातल पर स्थिति अच्छी नहीं है।
जिले में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली को अधिकृत किया गया है। व्यवस्था को चलाने के लिए 120 वेंटिलेटर युक्त बेड व सिलिंडर से ऑक्सीजन की व्यवस्था दूसरी लहर के समय हुई थी, मगर अब सब कुछ बदल चुका है। अस्पताल में जरूरत पूरी करने के लिए तीन ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराए गए हैं। इन्हें सीधे वेंटिलेटर से जोड़ा गया है।
ऑक्सीजन प्लांट के लिए ऑपरेटर की तैनाती के लिए कॉलेज प्रशासन ने शासन को पत्र भेजा है, मगर अब तक एक भी तकनीशियन नहीं मिल पाया है। जबकि वेंटिलेटर संचालन के लिए करीब 30 तथा ऑक्सीजन प्लांट के लिए 18 ऑपरेटरों की जरूरत है। ऐसे में न तो वेंटिलेटर संचालित हो पा रहा है और न ऑक्सीजन प्लांट।
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जिम्मेदार कहते हैं कि वेंटिलेटर व ऑक्सीजन प्लांट संचालित करने के लिए कुछ लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, मगर यह अल्पकालिक व्यवस्था है। इमरजेंसी में जब डिमांड बढ़ जाएगी तब स्थिति नहीं संभलेगी।
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बोले, प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सभी इस काम को कर सकते हैं। इतना प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह जरूर है कि यहां ऑक्सीजन प्लांट व वेंटिलेटर के लिए तकनीकी हाथ नहीं हैं। शासन को पत्र लिखा गया है।
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वेंटिलेटर व ऑक्सीजन प्लांट के संचालन के लिए तकनीकी हाथों की जरूरत
बस्ती। तमाम संसाधनों से सुसज्जित मेडिकल कॉलेज की सुविधा ठहरी हुई है। कारण यह कि यहां संसाधन तो भरपूर हैं, मगर इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ व तकनीशियन का इंतजार दो वर्ष से हो रहा है। ऐसे में यहां स्थापित करीब 120 वेंटिलेटर व तीन ऑक्सीजन प्लांट महज स्थापना तक ही रह गए हैं। इसका लाभ लोगों को नहीं मिल पा रहा है। यह अलग बात है कि प्राचार्य डॉ. मनोज कुमार का कहना है कि सब कुछ ठीक है। वह शासन को पत्र लिखने की बात कह रहे हैं, मगर धरातल पर स्थिति अच्छी नहीं है।
जिले में कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज से संबद्ध ओपेक चिकित्सालय कैली को अधिकृत किया गया है। व्यवस्था को चलाने के लिए 120 वेंटिलेटर युक्त बेड व सिलिंडर से ऑक्सीजन की व्यवस्था दूसरी लहर के समय हुई थी, मगर अब सब कुछ बदल चुका है। अस्पताल में जरूरत पूरी करने के लिए तीन ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कराए गए हैं। इन्हें सीधे वेंटिलेटर से जोड़ा गया है।
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ऑक्सीजन प्लांट के लिए ऑपरेटर की तैनाती के लिए कॉलेज प्रशासन ने शासन को पत्र भेजा है, मगर अब तक एक भी तकनीशियन नहीं मिल पाया है। जबकि वेंटिलेटर संचालन के लिए करीब 30 तथा ऑक्सीजन प्लांट के लिए 18 ऑपरेटरों की जरूरत है। ऐसे में न तो वेंटिलेटर संचालित हो पा रहा है और न ऑक्सीजन प्लांट।
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जिम्मेदार कहते हैं कि वेंटिलेटर व ऑक्सीजन प्लांट संचालित करने के लिए कुछ लोगों को प्रशिक्षित किया गया है, मगर यह अल्पकालिक व्यवस्था है। इमरजेंसी में जब डिमांड बढ़ जाएगी तब स्थिति नहीं संभलेगी।
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बोले, प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि जरूरत पड़ने पर सभी इस काम को कर सकते हैं। इतना प्रशिक्षण दिया जा चुका है। यह जरूर है कि यहां ऑक्सीजन प्लांट व वेंटिलेटर के लिए तकनीकी हाथ नहीं हैं। शासन को पत्र लिखा गया है।