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कोरोना से बचाव को लॉकडाउन जरूरी, इसे आगे बढ़ाए सरकार
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‘कोरोना से बचाव को लॉकडाउन जरूरी, इसे आगे बढ़ाए सरकार’
बस्ती। कोरोना वायरस से जंग के लिए सतर्कता व सामाजिक दूरी बेहद जरूरी है। अब लोग कोरोना से बचने के लिए खुद इसका पालन कर सुरक्षित रह सकते हैं। लॉकडाउन के मौजूदा स्वरूप को सरकार आगे बढ़ा दे तो थोड़ी राहत रहेगी। बगैर काम घर से न निकलें। क्योंकि कोरोना से बचाव केवल सोशल डिस्टेंसिंग व घर में रहकर ही किया जा सकता है।
कटरा निवासी एमबीए के छात्र मुकेश कहते हैं कि आम जिंदगी को बचाने की जिम्मेदारी सरकार की है। उसी जिम्मेदारी को निभाते हुए अब तक लॉक डाउन रखा गया है। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत अब भी है, क्योंकि अब ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना का प्रभाव बढ़ रहा है। क्योंकि गांवों में गैर प्रदेशों से कामगार आ रहे हैं। ऐसे में अब सतर्कता जरूरी है। लॉक डाउन पांच की जरूरत अब भी है।
सिविल लाइंस निवासी छात्र अखिलेश कुमार कहते हैं कि 25 मार्च से 29 मई तक का सफर सरकार ने बेहद शालीनता से निकाल दिया, मगर अब लॉकडाउन समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। आम आदमी लॉकडाउन से उब चुका है। यदि सतर्कता न होती तो आज स्थिति कुछ और होती। ऐसे में सरकार को एक बार फिर लॉकडाउन बढ़ा कर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। क्योंकि खतरा टला नहीं है। पहले शहर संवेदनशील थे, अब गांव।
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पुरानी बस्ती निवासी गृहिणी अपराजिता कहती हैं कि आमजन की सुरक्षा की पहल को लेकर सरकार का लॉकडाउन सराहनीय है। कोरोना से जंग लोगों ने घर में बैठकर लड़ी है। कोरोना का प्रभाव कम नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार लॉकडाउन को आगे बढ़ाए। वैसे सरकार ने अपना काम कर आमजन को जागरूक कर दिया है। अब लोगों को जागरूक होना पडे़गा।
गृहिणी किरन धुसिया ने कहा कि लॉकडाउन से तमाम समस्याएं देश के सामने खड़ी हो गई हैं। जिंदगी बची तो इन समस्याओं का निदान मिल जाएगा। अब लॉकडाउन में भी तमाम छूट मिल चुकी है। ऐसे में लोग जागरूक होकर ही जिंदगी की रफ्तार में शामिल हों। क्योंकि कोरोना का संक्रमण बरकरार है। यह कब तक समाप्त होगा, यह कह पाना मुश्किल है। सरकार ने लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ा दिया है। अब खुद उसका पालन कर अपनी व परिवार को सुरक्षित रखें। लॉकडाउन-पांच की जरूरत है।
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बस्ती। कोरोना वायरस से जंग के लिए सतर्कता व सामाजिक दूरी बेहद जरूरी है। अब लोग कोरोना से बचने के लिए खुद इसका पालन कर सुरक्षित रह सकते हैं। लॉकडाउन के मौजूदा स्वरूप को सरकार आगे बढ़ा दे तो थोड़ी राहत रहेगी। बगैर काम घर से न निकलें। क्योंकि कोरोना से बचाव केवल सोशल डिस्टेंसिंग व घर में रहकर ही किया जा सकता है।
कटरा निवासी एमबीए के छात्र मुकेश कहते हैं कि आम जिंदगी को बचाने की जिम्मेदारी सरकार की है। उसी जिम्मेदारी को निभाते हुए अब तक लॉक डाउन रखा गया है। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत अब भी है, क्योंकि अब ग्रामीण क्षेत्र में कोरोना का प्रभाव बढ़ रहा है। क्योंकि गांवों में गैर प्रदेशों से कामगार आ रहे हैं। ऐसे में अब सतर्कता जरूरी है। लॉक डाउन पांच की जरूरत अब भी है।
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सिविल लाइंस निवासी छात्र अखिलेश कुमार कहते हैं कि 25 मार्च से 29 मई तक का सफर सरकार ने बेहद शालीनता से निकाल दिया, मगर अब लॉकडाउन समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। आम आदमी लॉकडाउन से उब चुका है। यदि सतर्कता न होती तो आज स्थिति कुछ और होती। ऐसे में सरकार को एक बार फिर लॉकडाउन बढ़ा कर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। क्योंकि खतरा टला नहीं है। पहले शहर संवेदनशील थे, अब गांव।
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पुरानी बस्ती निवासी गृहिणी अपराजिता कहती हैं कि आमजन की सुरक्षा की पहल को लेकर सरकार का लॉकडाउन सराहनीय है। कोरोना से जंग लोगों ने घर में बैठकर लड़ी है। कोरोना का प्रभाव कम नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार लॉकडाउन को आगे बढ़ाए। वैसे सरकार ने अपना काम कर आमजन को जागरूक कर दिया है। अब लोगों को जागरूक होना पडे़गा।
गृहिणी किरन धुसिया ने कहा कि लॉकडाउन से तमाम समस्याएं देश के सामने खड़ी हो गई हैं। जिंदगी बची तो इन समस्याओं का निदान मिल जाएगा। अब लॉकडाउन में भी तमाम छूट मिल चुकी है। ऐसे में लोग जागरूक होकर ही जिंदगी की रफ्तार में शामिल हों। क्योंकि कोरोना का संक्रमण बरकरार है। यह कब तक समाप्त होगा, यह कह पाना मुश्किल है। सरकार ने लोगों को जागरूकता का पाठ पढ़ा दिया है। अब खुद उसका पालन कर अपनी व परिवार को सुरक्षित रखें। लॉकडाउन-पांच की जरूरत है।