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महिला अस्पताल में खेल, माह भर में 40 गर्भवती रेफर
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गर्भवतियों के रेफर का खेल, तीमारदारों की ढीली हो रही जेब
बस्ती। सरकार की ओर से महिला अस्पताल में गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव कराने के निर्देश को महिला डाक्टरों ही पलीता लगा रही हैं। थोड़ी सी संशय की स्थिति बनते ही गर्भवतियों को तत्काल हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। इससे ड्यूटी में तैनात डॉक्टर को मानसिक तनाव से मुक्ति मिल जाती है। इस रेफर के खेल में निजी अस्पतालों की चांदी हो रही है।
महिला अस्पताल में रेफर का खेल कोई नया नहीं है। हालांकि इस समय स्थिति और खराब हो गई है। जून माह के आंकड़े बताते हैं कि 30 दिन के भीतर कुल 676 गर्भवती अस्पताल में भर्ती हुईं। इनमें से 469 की डिलेवरी कराई गई जबकि 40 को रेफर कर दिया गया। वहीं, 88 मरीज बगैर बताए बेड से गायब हो गए। शेष 69 मरीजों का लेखाजोखा विभागीय अभिलेखों में है ही नहीं। इनके बारे में तर्क दिया जा रहा है कि यह वह गर्भवती महिलाएं थीं जो भर्ती तो हुईं लेकिन उनका समय पूरा नहीं हुआ था। ऐसे में उन्हें लौटा दिया गया। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी का लेखाजोखा यह बताता है कि जून में 2038 गर्भवती इलाज के लिए आई हैं।
सूत्रों का कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर किसी गर्भवती को लेकर रिस्क नहीं लेना चाहते। जरा भी संदेह होने पर रेफर कर दिया जाता है। इसके पीछे कारण है कि अस्पताल के गेट पर ही शहर के मालवीय रोड स्थित कथित नर्सिंग होम की गाड़ी ऐसे मरीजों का इंतजार करती रहती है, अप्रशिक्षित हाथों से गर्भवती का आपरेशन कर दिया जाता है। इस अस्पताल को रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है।
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बहुत कुछ मरीज व तीमारदारों पर निर्भर: सीएमएस
जिला महिला चिकित्सालय के सीएमएस डा. एके सिंह का कहना है कि रेफर में कोई खेल नहीं है। बल्कि मरीजों की स्थिति को देखते हुए उन्हें सुरक्षित करने के लिए डाक्टर ऐसा करते हैं। कथित नर्सिंग होम पर चले जाने की बात तो यह मरीज व उनके तीमारदारों पर निर्भर है कि वे रेफर के बाद कहां इलाज कराते हैं।
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बस्ती। सरकार की ओर से महिला अस्पताल में गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव कराने के निर्देश को महिला डाक्टरों ही पलीता लगा रही हैं। थोड़ी सी संशय की स्थिति बनते ही गर्भवतियों को तत्काल हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। इससे ड्यूटी में तैनात डॉक्टर को मानसिक तनाव से मुक्ति मिल जाती है। इस रेफर के खेल में निजी अस्पतालों की चांदी हो रही है।
महिला अस्पताल में रेफर का खेल कोई नया नहीं है। हालांकि इस समय स्थिति और खराब हो गई है। जून माह के आंकड़े बताते हैं कि 30 दिन के भीतर कुल 676 गर्भवती अस्पताल में भर्ती हुईं। इनमें से 469 की डिलेवरी कराई गई जबकि 40 को रेफर कर दिया गया। वहीं, 88 मरीज बगैर बताए बेड से गायब हो गए। शेष 69 मरीजों का लेखाजोखा विभागीय अभिलेखों में है ही नहीं। इनके बारे में तर्क दिया जा रहा है कि यह वह गर्भवती महिलाएं थीं जो भर्ती तो हुईं लेकिन उनका समय पूरा नहीं हुआ था। ऐसे में उन्हें लौटा दिया गया। जिला महिला अस्पताल की ओपीडी का लेखाजोखा यह बताता है कि जून में 2038 गर्भवती इलाज के लिए आई हैं।
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सूत्रों का कहना है कि अस्पताल के डॉक्टर किसी गर्भवती को लेकर रिस्क नहीं लेना चाहते। जरा भी संदेह होने पर रेफर कर दिया जाता है। इसके पीछे कारण है कि अस्पताल के गेट पर ही शहर के मालवीय रोड स्थित कथित नर्सिंग होम की गाड़ी ऐसे मरीजों का इंतजार करती रहती है, अप्रशिक्षित हाथों से गर्भवती का आपरेशन कर दिया जाता है। इस अस्पताल को रसूखदारों का संरक्षण प्राप्त है।
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बहुत कुछ मरीज व तीमारदारों पर निर्भर: सीएमएस
जिला महिला चिकित्सालय के सीएमएस डा. एके सिंह का कहना है कि रेफर में कोई खेल नहीं है। बल्कि मरीजों की स्थिति को देखते हुए उन्हें सुरक्षित करने के लिए डाक्टर ऐसा करते हैं। कथित नर्सिंग होम पर चले जाने की बात तो यह मरीज व उनके तीमारदारों पर निर्भर है कि वे रेफर के बाद कहां इलाज कराते हैं।