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कैली चिकित्सालय से मुंह मोड़ रहे मरीज

Tue, 13 Nov 2018 12:14 AM IST
basti
basti Updated Tue, 13 Nov 2018 12:14 AM IST
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problems in kally hospital
कैली अस्पताल में खराब पड़ा आरओ। - फोटो : amar ujala
बस्ती। कभी मिनी पीजीआई कह लाने वाले ओपेक चिकित्सालय कैली से अब मरीज भी मुंह मोड़ने लगे हैं। यहां न तो पर्याप्त चिकित्सक हैं, और न ही मरीजों के लिए बेहतर प्रबंध। चिकित्सीय सुविधाओं का अभाव है ही एक अदद फिजीशियन और ह्दयरोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं। ओपेक देशों के सहयोग से स्थापित कैली अस्पताल को करीब दो दशक बीत चुके हैं। शुरुआती दौर में यह अस्पताल संजीवनी की तरह काम कर रहा था। कई तरह के विशेषज्ञ और आधुनिक मशीनें थीं। जैसे-जैसे समय बीतता गया, हालत बद से बदतर होती गई। हार्ट के लिए यहां तब विशेषज्ञ थे अब न तो हृदय रोग विशेषज्ञ हैं और न ही फिजिशियन। ऐसे में मरीज भी यहां पहुंचकर खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। 
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सुविधाओं की यदि बात करें तो अस्पताल परिसर में लाखों रुपये खर्च कर लगवाया गया आरओ सिस्टम खराब पड़ा है। इसके ईद-गिर्द इतनी गंदगी है कि लोग संक्रामक बीमारियों की जद में आ सकते हैं। पांच सौ शैय्यायुक्त ओपेक चिकित्सालय में लगा फायर प्वाइंट व्यवस्था को मुंह चिढ़ा रहा है। अस्पताल परिसर में अग्नि सुरक्षा के मद्देनजर कई फायर प्वाइंटर लगाए गए हैं, लेकिन अधिकतर प्वांइटर टूटे हुए हैं।  डॉक्टरों में यहां निदेशक, मुख्य परामर्शदाता, मुख्य चिकित्साधीक्षक, दो सर्जन, दो वरिष्ठ परामर्शदाता, तीन निश्चेतक, दो नेत्र सर्जन, एक ईएनटी सर्जन, दो ऑर्थो सर्जन, एक चर्म रोग विशेषज्ञ, एक रेडियोलॉजिस्ट, एक मानसिक रोग विशेषज्ञ, दो बालरोग विशेषज्ञ, एक चेस्ट फिजिशियन, एक हड्डी रोग विशेषज्ञ, एक पैथालॉजिस्ट, चार ईएमओ, एक एमबीबीएस चिकित्सक अपनी सेवाएं दे रहे हैं।  
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15 सौ की जगह आठ सौ तक सिमटी ओपीडी
लगभग दो दशक पहले स्थापित ओपेक चिकित्सालय कैली में शुरुआती दौर में 15 सौ से ऊपर की ओपीडी होती थी। लेकिन ये आंकड़ा आज सिमटकर महज सात से आठ सौ पर सिमट गया है। इसके पीछे की वजह यह है कि जिस चीज के उपचार के लिए यहां मरीज आते हैं, उसके विशेषज्ञ चिकित्सक यहां हैं ही नहीं। मजबूरन लोगों को प्राइवेट व अन्य जिलों तक की दौड़ लगानी पड़ती है।
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समस्याएं मेरे संज्ञान में हैं: निदेशक
ओपेक चिकित्सालय कैली की निदेशक डॉ मंजू वैश्य शर्मा ने कहा कि समस्याएं संज्ञान में हैं। फिजिशियन के लिए डिमांड की गई है। बताया कि हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। खराब आरओ व फायर प्वांइट को लेकर डॉ. शर्मा ने कहा कि जल्द ही टेंडर प्रक्रिया के तहत ठीक करा दिया जाएगा।
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