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सौ रुपये के स्टांप पर अनुबंध की होगी जांच
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 01 Jan 2016 12:40 AM IST
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बस्ती। मंडल में सांसद और विधायक निधि से स्कूलों को दिए जाने वाले धन का
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स्कूलों के प्रबंधकों से नियम विरुद्ध सौ रुपये के स्टांप पर लाखों रुपये
के अनुबंध करा लेने के मामले में कमिश्नर पीके सिंह ने डीआईजी स्टांप को
पिछले तीन वर्षों में हुए अनुबंध पत्रों की जांच तीनों जनपदों के एआईजी
स्टांप से कराने और कार्रवाई का निर्देश दिया है। कमिश्नर की ओर से यह
कार्रवाई ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेकर गई है।
क्षेत्र के विकास के लिए सरकार सांसदों को सांसद निधि से प्रति वर्ष पांच करोड़ और विधायक निधि से विधायकों को प्रति वर्ष डेढ़ करोड़ की धनराशि मुहैया कराती है। इस रकम से निजी स्कूलों के शैक्षिक विकास के लिए कक्ष, बरामदा और लाइब्रेरी सहित अन्य निर्माण के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
नियमानुसार सांसद और विधायक निधि से स्कूलों में होने वाले निर्माण कार्यों की कार्यदादई संस्था कोई एजेंसी न होकर स्कूलों के प्रबंधक होते हैं। सरकार ने धन आवंटन से पहले स्कूल प्रबंधकों से रजिस्टर्ड अनुबंध कराने का प्रावधान किया, जिससे धन का उपयोग हो सके और अनुबंध की वैधता बनी रहे।
सरकार की मंशा इसके पीछे राजस्व प्राप्ति की भी है। नए नियम के तहत अगर किसी संपत्ति का रजिस्टर्ड अनुबंध होता है तो सरकार को प्रति अनुबंध दस से बीस हजार रुपये रजिस्ट्री फीस के रूप में मिलते हैं।
रिपोर्ट मिल रही है कि मंडल के तीनों जनपदों में रजिस्टर्ड अनुबंध न कराकर स्कूल प्रबंधकों से मात्र रुपये के स्टांप पर अनुबंध करा लिया जाता है। इसी खबर को संज्ञान में लेकर कमिश्नर पीके सिंह ने गुरुवार को डीआईजी स्टांप को डीआरडीए कार्यालय में इसकी जांच के निर्देश दिए हैं।
कमिश्नर ने बताया कि डीआईजी स्टांप को वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 में किए गए अनुंबध की जांच कराकर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। साथ ही इस बात के भी निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई अनुबंध रजिस्टर्ड नहीं मिलता है तो उसे रजिस्टर्ड कराने की कार्रवाई करें।
क्षेत्र के विकास के लिए सरकार सांसदों को सांसद निधि से प्रति वर्ष पांच करोड़ और विधायक निधि से विधायकों को प्रति वर्ष डेढ़ करोड़ की धनराशि मुहैया कराती है। इस रकम से निजी स्कूलों के शैक्षिक विकास के लिए कक्ष, बरामदा और लाइब्रेरी सहित अन्य निर्माण के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये देने का प्रावधान है।
नियमानुसार सांसद और विधायक निधि से स्कूलों में होने वाले निर्माण कार्यों की कार्यदादई संस्था कोई एजेंसी न होकर स्कूलों के प्रबंधक होते हैं। सरकार ने धन आवंटन से पहले स्कूल प्रबंधकों से रजिस्टर्ड अनुबंध कराने का प्रावधान किया, जिससे धन का उपयोग हो सके और अनुबंध की वैधता बनी रहे।
सरकार की मंशा इसके पीछे राजस्व प्राप्ति की भी है। नए नियम के तहत अगर किसी संपत्ति का रजिस्टर्ड अनुबंध होता है तो सरकार को प्रति अनुबंध दस से बीस हजार रुपये रजिस्ट्री फीस के रूप में मिलते हैं।
रिपोर्ट मिल रही है कि मंडल के तीनों जनपदों में रजिस्टर्ड अनुबंध न कराकर स्कूल प्रबंधकों से मात्र रुपये के स्टांप पर अनुबंध करा लिया जाता है। इसी खबर को संज्ञान में लेकर कमिश्नर पीके सिंह ने गुरुवार को डीआईजी स्टांप को डीआरडीए कार्यालय में इसकी जांच के निर्देश दिए हैं।
कमिश्नर ने बताया कि डीआईजी स्टांप को वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 में किए गए अनुंबध की जांच कराकर कार्रवाई का निर्देश दिया गया है। साथ ही इस बात के भी निर्देश दिए गए हैं कि अगर कोई अनुबंध रजिस्टर्ड नहीं मिलता है तो उसे रजिस्टर्ड कराने की कार्रवाई करें।