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ललही छठ पर व्रती माताओं ने की कामना-दीर्घायु हो पुत्र, प्रशस्त हो उन्नति का मार्ग
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छठ की पूजा करती महिलाएं
- फोटो : BASTI
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ललही छठ पर व्रती माताओं ने की कामना-दीर्घायु हो पुत्र, प्रशस्त हो उन्नति का मार्ग
बस्ती। ललही छठ पर्व पर रविवार को महिलाओं ने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखा और पूजन कर प्रसाद वितरण किया। शहर के अमहट घाट के पास महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। इसके अलावा विभिन्न घाटों और अन्य स्थलों पर मेले जैसा माहौल था।
व्रती महिलाएं सिर पर रखी थाली में सजे हुए महुआ, दूध, गंगाजल, फल, मिष्ठान्न, नारियल, दही आदि रखकर सिर पर लेकर गांव के बाहर तय स्थान पर पहुंचीं। विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजन-अर्चन के बाद छठ माता की कथा श्रवण किया गया। इस मौके पर व्रती महिलाओं ने बताया कि दोपहर बाद तिन्नी के चावल और दही को प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं। पंडित जय प्रकाश द्विवेदी बताते हैं कि बलराम जयंती के मौके पर पुत्र के लिए रखा गया व्रत उत्तम फलदाई होता है। खास बात यह है कि इस व्रत में बिना जोता हुआ अनाज ही खाने का विधान है। वहीं कुश और महुआ के पत्ते का पूजन कर इस पर महुआ, तिन्नी के चावल, गुड और दही का प्रसाद वितरित करती हैं। नए कपड़ों पर माताएं हल्दी की छाप भी लगाती हैं।
भानपुर, बनकटी, हर्रैया प्रतिनिधि के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि हलषष्ठी का व्रत रखकर पूजन करने वाली महिलाओं के पुत्र समस्त विघ्नों से मुक्त होते हैं। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। बलराम का प्रमुख शस्त्र हल था इसलिए इसे हलषष्ठी कहते हैं।
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कुश के समक्ष महुआ, तिन्नी का चावल, भैंस का दूध, दही, चंदन रखकर माता की उपासना की गई। उनकी लंबी आयु के लिए मंगल गीत गाया गया। महिलाओं ने दही, महुवा और तिन्नी के चावल को महुआ के पत्ते पर रखकर खाया और व्रत समाप्त किया। बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के खोरिया, बरहुआ, देईसाड़, बानपुर, डेल्हापार, दौलतपुर, पुरनपुर, भरवलिया, कोनी, घुघसा, पसड़ा आदि में महिलाओं ने तालाब, पोखरा, कुंआ आदि जगहों पर छठ माता की पूजा किया। पुरानी बस्ती प्रतिनिधि के अनुसार परसा कुंहकुंह, पकड़ी चंदा, ससना, नगहरा, छितौनी, ओड़वारा, पिपराराम किशुन, बरहुचा, बायपोखर, जिगनी, जिगिना, घरसोहिया, देवरियामाफी, बेलसुही, हटवाशुक्ल आदि में महिला ने छठ पूजा किया। परंपरा अनुसार महिलाओं ने एक दूसरे को छठ माता की कथा सुनाई। व्रत में सूर्यास्त से पहले साग और तिन्नी का चावल बनाकर भोजन के रूप में प्रसाद वितरित किया गया।
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बस्ती। ललही छठ पर्व पर रविवार को महिलाओं ने पुत्र की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत रखा और पूजन कर प्रसाद वितरण किया। शहर के अमहट घाट के पास महिलाओं का हुजूम उमड़ पड़ा। इसके अलावा विभिन्न घाटों और अन्य स्थलों पर मेले जैसा माहौल था।
व्रती महिलाएं सिर पर रखी थाली में सजे हुए महुआ, दूध, गंगाजल, फल, मिष्ठान्न, नारियल, दही आदि रखकर सिर पर लेकर गांव के बाहर तय स्थान पर पहुंचीं। विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजन-अर्चन के बाद छठ माता की कथा श्रवण किया गया। इस मौके पर व्रती महिलाओं ने बताया कि दोपहर बाद तिन्नी के चावल और दही को प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं। पंडित जय प्रकाश द्विवेदी बताते हैं कि बलराम जयंती के मौके पर पुत्र के लिए रखा गया व्रत उत्तम फलदाई होता है। खास बात यह है कि इस व्रत में बिना जोता हुआ अनाज ही खाने का विधान है। वहीं कुश और महुआ के पत्ते का पूजन कर इस पर महुआ, तिन्नी के चावल, गुड और दही का प्रसाद वितरित करती हैं। नए कपड़ों पर माताएं हल्दी की छाप भी लगाती हैं।
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भानपुर, बनकटी, हर्रैया प्रतिनिधि के अनुसार धार्मिक मान्यता है कि हलषष्ठी का व्रत रखकर पूजन करने वाली महिलाओं के पुत्र समस्त विघ्नों से मुक्त होते हैं। यह व्रत भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। बलराम का प्रमुख शस्त्र हल था इसलिए इसे हलषष्ठी कहते हैं।
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कुश के समक्ष महुआ, तिन्नी का चावल, भैंस का दूध, दही, चंदन रखकर माता की उपासना की गई। उनकी लंबी आयु के लिए मंगल गीत गाया गया। महिलाओं ने दही, महुवा और तिन्नी के चावल को महुआ के पत्ते पर रखकर खाया और व्रत समाप्त किया। बनकटी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के खोरिया, बरहुआ, देईसाड़, बानपुर, डेल्हापार, दौलतपुर, पुरनपुर, भरवलिया, कोनी, घुघसा, पसड़ा आदि में महिलाओं ने तालाब, पोखरा, कुंआ आदि जगहों पर छठ माता की पूजा किया। पुरानी बस्ती प्रतिनिधि के अनुसार परसा कुंहकुंह, पकड़ी चंदा, ससना, नगहरा, छितौनी, ओड़वारा, पिपराराम किशुन, बरहुचा, बायपोखर, जिगनी, जिगिना, घरसोहिया, देवरियामाफी, बेलसुही, हटवाशुक्ल आदि में महिला ने छठ पूजा किया। परंपरा अनुसार महिलाओं ने एक दूसरे को छठ माता की कथा सुनाई। व्रत में सूर्यास्त से पहले साग और तिन्नी का चावल बनाकर भोजन के रूप में प्रसाद वितरित किया गया।