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आंधी-पानी से कई जगह ठप हुई बिजली आपूर्ति
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आंधी-पानी से कई जगह ठप हुई बिजली आपूर्ति
बस्ती। आंधी और बारिश के कारण रविवार को भले गर्मी से लोगों को राहत मिली, लेकिन कई जगह फाल्ट और खंभे टूटने से बिजली गुल रही। लोग बिजली के लिए परेशान रहे। वितरण खंड तृतीय एक्सईएन हेमंत कुमार सिंह ने बताया कि क्षति का आंकलन किया जा रहा है।
आंधी में सबसे ज्यादा नुकसान बिजली लाइनों को हुआ है। तारों पर जगह-जगह पेड़ की डालियां टूट कर गिरीं। विद्युत वितरण खंड प्रथम (टाउन) एक्सईएन संतोष कुमार ने बताया कि शनिवार रात 12 बजे तक फाल्ट ठीक करा लिए गए। गार्डिंग आपूर्ति तार से चिपक जाने के कारण पॉलीटेक्निक फीडर सबसे ज्यादा समय तक बाधित रहा। बताया कि रविवार को शहर से सभी इलाकों में आपूर्ति सामान्य रही। ग्रामीण वितरण खंडों में लाइनें ठीक करने के लिए लाइनमैन रविवार पूरा दिन प्रयास करते रहे।
वहीं दूसरी ओर उप कृषि निदेशक डॉ. एसके त्रिपाठी ने बताया कि धान की नर्सरी डालने के लिए मौसम अनुकूल हो गया है। बारिश से मिट्टी की गर्मी निकल चुकी है। जिले में बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कृषि विज्ञान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरवी सिंह बताते हैं कि 20 मई से 10 जून तक नर्सरी लगाने का समय सबसे मुफीद माना जाता है। किसान कोशिश करें कि इसी समयावधि में अगैती व सामान्य प्रजाति के बीजों की नर्सरी डाल दें। इससे उत्पाद में वृद्धि के साथ उसकी गुणवत्ता भी बेहतरीन होती है।
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बस्ती। आंधी और बारिश के कारण रविवार को भले गर्मी से लोगों को राहत मिली, लेकिन कई जगह फाल्ट और खंभे टूटने से बिजली गुल रही। लोग बिजली के लिए परेशान रहे। वितरण खंड तृतीय एक्सईएन हेमंत कुमार सिंह ने बताया कि क्षति का आंकलन किया जा रहा है।
आंधी में सबसे ज्यादा नुकसान बिजली लाइनों को हुआ है। तारों पर जगह-जगह पेड़ की डालियां टूट कर गिरीं। विद्युत वितरण खंड प्रथम (टाउन) एक्सईएन संतोष कुमार ने बताया कि शनिवार रात 12 बजे तक फाल्ट ठीक करा लिए गए। गार्डिंग आपूर्ति तार से चिपक जाने के कारण पॉलीटेक्निक फीडर सबसे ज्यादा समय तक बाधित रहा। बताया कि रविवार को शहर से सभी इलाकों में आपूर्ति सामान्य रही। ग्रामीण वितरण खंडों में लाइनें ठीक करने के लिए लाइनमैन रविवार पूरा दिन प्रयास करते रहे।
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वहीं दूसरी ओर उप कृषि निदेशक डॉ. एसके त्रिपाठी ने बताया कि धान की नर्सरी डालने के लिए मौसम अनुकूल हो गया है। बारिश से मिट्टी की गर्मी निकल चुकी है। जिले में बीज पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। कृषि विज्ञान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरवी सिंह बताते हैं कि 20 मई से 10 जून तक नर्सरी लगाने का समय सबसे मुफीद माना जाता है। किसान कोशिश करें कि इसी समयावधि में अगैती व सामान्य प्रजाति के बीजों की नर्सरी डाल दें। इससे उत्पाद में वृद्धि के साथ उसकी गुणवत्ता भी बेहतरीन होती है।
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