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Basti News: थानाध्यक्ष मौत मामले में जल्दबाजी से बच रही पुलिस, साक्ष्यों के मिलान पर जोर
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बस्ती। वाल्टरगंज थानाध्यक्ष सूर्य प्रकाश सिंह की मौत की जांच में पुलिस अब किसी एक सुराग को अंतिम आधार बनाने के बजाय साक्ष्यों के आपसी मिलान पर जोर दे रही है। जांच टीम घटना से पहले की परिस्थितियों के क्रम समझने की कोशिश में है। इसके लिए सामने आ रही हर महत्वपूर्ण जानकारी को दूसरे साक्ष्यों के साथ मिलाकर उसकी पुष्टि की जा रही है।
29 अगस्त की शाम करीब छह बजे जिला मुख्यालय स्थित सरकारी आवास पर वाल्टरगंज थानेदार का शव फंदे से लटका मिला था। घटना की वजह स्पष्ट न होने से पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के सहारे से मामले का खुलासा करने में जुटी है। इसके अलावा उनके साथ रहने वाले हमराहियों, साथ में करने वाले पुलिसकर्मियों, उनके परिजन, मित्रों आदि से पूछताछ की गई है। वहीं, मोबाइल से कुछ सामग्रियों के डिलीट होने की जानकारी मिली थी, जिसके लिए पुलिस ने गोरखपुर की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में मोबाइल फोन का तकनीकी परीक्षण कराया है।
माना जा रहा है कि तकनीकी साक्ष्य ही जांच की दिशा तय करने में अहम होंगे। मोबाइल डाटा की रिकवरी और उसकी समीक्षा पूरी होने के बाद ही जांच की गति तेज होने का दावा किया जा रहा है। उधर, थानेदार की कॉल डिटेल के अनुसार कुछ संदिग्धों की कुंडली खंगाली जा रही है। इनमें एक महिला का नाम भी सामने आ रहा है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस डिजिटल साक्ष्यों का इंतजार कर रही है।
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तथ्य की विश्वसनीयता परखना भी चुनौतीपूर्ण
जांच में किसी तथ्य के सामने आने के बाद पुलिस के लिए अगली चुनौती उसकी विश्वसनीयता परखने की है। घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी को अलग-अलग स्रोतों से मिलाया जा रहा है। किसी जानकारी और दूसरे साक्ष्य के बीच अंतर मिलने पर उसे भी नजरअंदाज करने के बजाय पड़ताल का हिस्सा बनाया जा रहा है।
कोट...
मोबाइल डाटा की समीक्षा की जा रही है। इससे कई सुराग हाथ लगे हैं। उनके आधार पर आगे बढ़ा जा रहा है। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा होने की उम्मीद है।
-डॉ. यशवीर सिंह, एसपी
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29 अगस्त की शाम करीब छह बजे जिला मुख्यालय स्थित सरकारी आवास पर वाल्टरगंज थानेदार का शव फंदे से लटका मिला था। घटना की वजह स्पष्ट न होने से पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के सहारे से मामले का खुलासा करने में जुटी है। इसके अलावा उनके साथ रहने वाले हमराहियों, साथ में करने वाले पुलिसकर्मियों, उनके परिजन, मित्रों आदि से पूछताछ की गई है। वहीं, मोबाइल से कुछ सामग्रियों के डिलीट होने की जानकारी मिली थी, जिसके लिए पुलिस ने गोरखपुर की विधि विज्ञान प्रयोगशाला में मोबाइल फोन का तकनीकी परीक्षण कराया है।
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माना जा रहा है कि तकनीकी साक्ष्य ही जांच की दिशा तय करने में अहम होंगे। मोबाइल डाटा की रिकवरी और उसकी समीक्षा पूरी होने के बाद ही जांच की गति तेज होने का दावा किया जा रहा है। उधर, थानेदार की कॉल डिटेल के अनुसार कुछ संदिग्धों की कुंडली खंगाली जा रही है। इनमें एक महिला का नाम भी सामने आ रहा है, जिसकी पुष्टि के लिए पुलिस डिजिटल साक्ष्यों का इंतजार कर रही है।
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तथ्य की विश्वसनीयता परखना भी चुनौतीपूर्ण
जांच में किसी तथ्य के सामने आने के बाद पुलिस के लिए अगली चुनौती उसकी विश्वसनीयता परखने की है। घटनाक्रम से जुड़ी जानकारी को अलग-अलग स्रोतों से मिलाया जा रहा है। किसी जानकारी और दूसरे साक्ष्य के बीच अंतर मिलने पर उसे भी नजरअंदाज करने के बजाय पड़ताल का हिस्सा बनाया जा रहा है।
कोट...
मोबाइल डाटा की समीक्षा की जा रही है। इससे कई सुराग हाथ लगे हैं। उनके आधार पर आगे बढ़ा जा रहा है। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा होने की उम्मीद है।
-डॉ. यशवीर सिंह, एसपी