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Basti News: खुदकुशी का एंगिल तलाश रही पुलिस, नहीं मिल रहे ठोस सबूत
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दरोगा अजय। फाइल फोटो
बस्ती। परशुरामपुर थाने से लापता दरोगा अजय गौड़ के मौत के पीछे खुदकुशी की एंगिल ढूंढने की भरसक काेशिश हो रही है। इसमें भी ठोस सबूत का अभी अड़चन आ रहा है। पुलिस अभी इस मुहाने पर नहीं पहुंची है कि दरोगा के खुदकुशी का कोई प्रमाण पेश कर सकें। स्पष्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट न मिलने से मामला और उलझा है।
कयास लगाई जा रही कि डायटम टेस्ट में यदि डूबने से मौत की वजह स्पष्ट हो गई तब तो पुलिस पूरे दावे से खुदकुशी साबित कर सकती है। यह अलग बात है कि दरोगा की पत्नी उनके लापता होने की जानकारी मिलने के बाद से ही अनहोनी की अंदेशा जताने लगी थीं।
सरयू नदी में शव मिलने के बाद से दरोगा के एडीएम भाई अरुण कुमार और पत्नी रंजीता समेत अन्य परिजन भी गहरी साजिश के तहत उनके हत्या किए जाने की बात पर अड़े हुए हैं। परिजनों के सवाल पर पुलिस अभी घिरी हुई है।
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बता दें कि दरोगा अजय गौड़ के लापता होने के दूसरे दिन परशुरामपुर थाने से 50 किमी दूर बस्ती में एसपी आवास के पास कुआनो नदी के अमहट घाट से उनकी बाइक लावारिस हाल में बरामद हुई थी।
दो दिन तक कुआनो नदी में सर्च अभियान चलने के दौरान मौके पर मौजूद पत्नी रंजीता बार-बार यह कहते हुए सुनी गईं कि उनके पति यहां नहीं हैं। उनका कयास तब सच साबित हुआ जब चौथे दिन दरोगा की लाश अयोध्या सीमा से सटे छावनी थाना क्षेत्र में पिहुरा माझा गांव के निकट सरयू नदी में उतराया हुआ मिला।
उस समय पत्नी को मौत का अंदेशा नहीं था लेकिन, दरोगा को बंधक बनाए जाने का दावा वह अंत तक करती रहीं। यह तक कहा कि अमहट पर उनकी बाइक सिर्फ भ्रमित करने के लिए खड़ी की गई है। पत्नी सीसीटीवी फुटेज में थाने से निकलते समय दरोगा के साथ बाइक पर पीछे फालोवर के बैठने की बात कह रही हैं। फालोवर पर उन्होंने संदेह भी जाहिर की है। पुलिस इस बिंदु को अपने जांच से लगभग बाहर कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि फालोवर की भूमिका कहीं भी संदेहास्पद नहीं मिली है। परिजनों के आरोपों से इतर पुलिस की जांच लगभग खुदकुशी के मुहाने पर आकर ठप हो गई है।
अंदरखाने से मिली जानकारी के अनुसार ठोस सबूत के रूप में डायटम टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि पूरे मामले में अनसुलझे सवालों का जवाब पुलिस के पास अभी भी नहीं है। लाश मिलने के बाद जांच के दौरान में सरयू पुल से दो सौ मीटर पहले तक दरोगा को अयोध्या की तरफ बाइक लेकर जाते हुए देखने की बात कही गई है। इसका सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के पास है। इसके आगे दरोगा को सरयू पुल पार करने तक तस्दीक किया गया है। इसी के ठीक नीचे सरयू नदी है। पुल के आगे दरोगा की यात्रा का कोई डिजिटल साक्ष्य नहीं मिला है।
पुलिस का कयास है कि पुल समाप्त होने के बाद पड़ने वाले अवैध कट से दरोगा की बाइक लेकर कोई अन्य शख्स बस्ती पहुंचा है। वह शख्स कौन हैं उसे ढूंढने में पुलिस को सफलता अभी नहीं मिली है। खबर है कि एक संदिग्ध व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में बाइक चोरी के एक मामले में पकड़ा भी जा चुका है। यदि दरोगा की बाइक लाने वाला व्यक्ति वही निकला तो प्रमाण के रूप में उसका फुटेज पुलिस को पेश करना होगा। अभी तक बस्ती से अयोध्या के बीच खंगाले गए सीसीटीवी कैमरों में बाइक लेकर बस्ती आने वाले शख्स की पहचान नहीं हो सकी है।
मोबाइल बरामदगी में भी उलझी है पुलिस : दरोगा के मोबाइल बरामदगी में भी पुलिस उलझी हुई है। जांच में यह पता चला है कि दरोगा की मोबाइल भी किसी अन्य शख्स के पास है। पुलिस मोबाइल बरामद करने में जुटी हुई है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल मिलने के बाद कई राज खुल सकते हैं। हालांकि शुक्रवार को पुलिस मोबाइल बरामदगी के बारे में कुछ बताने से परहेज करने लगी है।
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कयास लगाई जा रही कि डायटम टेस्ट में यदि डूबने से मौत की वजह स्पष्ट हो गई तब तो पुलिस पूरे दावे से खुदकुशी साबित कर सकती है। यह अलग बात है कि दरोगा की पत्नी उनके लापता होने की जानकारी मिलने के बाद से ही अनहोनी की अंदेशा जताने लगी थीं।
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सरयू नदी में शव मिलने के बाद से दरोगा के एडीएम भाई अरुण कुमार और पत्नी रंजीता समेत अन्य परिजन भी गहरी साजिश के तहत उनके हत्या किए जाने की बात पर अड़े हुए हैं। परिजनों के सवाल पर पुलिस अभी घिरी हुई है।
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बता दें कि दरोगा अजय गौड़ के लापता होने के दूसरे दिन परशुरामपुर थाने से 50 किमी दूर बस्ती में एसपी आवास के पास कुआनो नदी के अमहट घाट से उनकी बाइक लावारिस हाल में बरामद हुई थी।
दो दिन तक कुआनो नदी में सर्च अभियान चलने के दौरान मौके पर मौजूद पत्नी रंजीता बार-बार यह कहते हुए सुनी गईं कि उनके पति यहां नहीं हैं। उनका कयास तब सच साबित हुआ जब चौथे दिन दरोगा की लाश अयोध्या सीमा से सटे छावनी थाना क्षेत्र में पिहुरा माझा गांव के निकट सरयू नदी में उतराया हुआ मिला।
उस समय पत्नी को मौत का अंदेशा नहीं था लेकिन, दरोगा को बंधक बनाए जाने का दावा वह अंत तक करती रहीं। यह तक कहा कि अमहट पर उनकी बाइक सिर्फ भ्रमित करने के लिए खड़ी की गई है। पत्नी सीसीटीवी फुटेज में थाने से निकलते समय दरोगा के साथ बाइक पर पीछे फालोवर के बैठने की बात कह रही हैं। फालोवर पर उन्होंने संदेह भी जाहिर की है। पुलिस इस बिंदु को अपने जांच से लगभग बाहर कर चुकी है। पुलिस का कहना है कि फालोवर की भूमिका कहीं भी संदेहास्पद नहीं मिली है। परिजनों के आरोपों से इतर पुलिस की जांच लगभग खुदकुशी के मुहाने पर आकर ठप हो गई है।
अंदरखाने से मिली जानकारी के अनुसार ठोस सबूत के रूप में डायटम टेस्ट की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। हालांकि पूरे मामले में अनसुलझे सवालों का जवाब पुलिस के पास अभी भी नहीं है। लाश मिलने के बाद जांच के दौरान में सरयू पुल से दो सौ मीटर पहले तक दरोगा को अयोध्या की तरफ बाइक लेकर जाते हुए देखने की बात कही गई है। इसका सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस के पास है। इसके आगे दरोगा को सरयू पुल पार करने तक तस्दीक किया गया है। इसी के ठीक नीचे सरयू नदी है। पुल के आगे दरोगा की यात्रा का कोई डिजिटल साक्ष्य नहीं मिला है।
पुलिस का कयास है कि पुल समाप्त होने के बाद पड़ने वाले अवैध कट से दरोगा की बाइक लेकर कोई अन्य शख्स बस्ती पहुंचा है। वह शख्स कौन हैं उसे ढूंढने में पुलिस को सफलता अभी नहीं मिली है। खबर है कि एक संदिग्ध व्यक्ति को पुलिस ने हिरासत में लिया है। बताया जा रहा है कि संबंधित व्यक्ति पूर्व में बाइक चोरी के एक मामले में पकड़ा भी जा चुका है। यदि दरोगा की बाइक लाने वाला व्यक्ति वही निकला तो प्रमाण के रूप में उसका फुटेज पुलिस को पेश करना होगा। अभी तक बस्ती से अयोध्या के बीच खंगाले गए सीसीटीवी कैमरों में बाइक लेकर बस्ती आने वाले शख्स की पहचान नहीं हो सकी है।
मोबाइल बरामदगी में भी उलझी है पुलिस : दरोगा के मोबाइल बरामदगी में भी पुलिस उलझी हुई है। जांच में यह पता चला है कि दरोगा की मोबाइल भी किसी अन्य शख्स के पास है। पुलिस मोबाइल बरामद करने में जुटी हुई है। पुलिस का मानना है कि मोबाइल मिलने के बाद कई राज खुल सकते हैं। हालांकि शुक्रवार को पुलिस मोबाइल बरामदगी के बारे में कुछ बताने से परहेज करने लगी है।