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ताबड़तोड़ चोरियों से लोग परेशान, रडार पर घुमंतू गैंग
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ताबड़तोड़ चोरियां, रडार पर घुमंतू गैंग
बस्ती। संपूर्ण अनलॉक के बाद तेजी से पटरी पर लौट रही सामान्य दिनचर्या में चोरों ने खलल डालना शुरू कर दिया है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब कहीं न कहीं चोरी की घटना न होती हो। महीने भर में छोटी-बड़ी 13 घटनाओं की पुलिस तफ़्तीश कर रही है। कई मामलों में थाने में शिकायत ही नहीं की गई है।
पिछले तीन वर्षों में सितंबर से लेकर फरवरी के बीच होने वाली चोरी की अधिकांश घटनाओं में पेशेवर घुमंतु पाए गए हैं। पुलिस ने अधिकांश घटनाओं का पर्दाफाश किया और उन्हीं के कब्जे से चोरी गए सामान बरामद किए गए। इस आधार पर पुलिस का मानना है कि बरसात के मौसम के बाद आने वाले घुमंतु फिर आ चुके हैं। एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि बाहर से सामान बेचने के बहाने आकर चोरी करने वाले घुमंतुओं पर संदेह है। जल्द इनकी गतिविधि पर लगाम लगाई जाएगी। बावरिया, काछी, पवेरा, कबूतरा जनजाति के घुमंतू चार महीने के लिए ही चोरी करने निकलते हैं। गैंग का एक ग्रुप घनी आबादी से कुछ दूर पहले परिवार सहित डेरा जमा लेता है। फूल, गुब्बारे या छोटा-मोटा सामान फेरी लगाकर बेचते समय वे रेकी करते हैं। एक शहर में वह तीन से चार वारदात करने के लिए रेकी करते है। पूरी डिटेल गिरोह के सरदार को मुहैया कराते हैं। सरदार योजनाबद्ध ढंग से टीम के साथ चोरी की घटना को अंजाम देता है।
पुलिस ने शुरू कराया सत्यापन
एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी बाजारों में टहलने वाले घुमंतुओं का सत्यापन कराया जा रहा है। उनके बारे में बेसिक जानकारी फोटो सहित संकलित कराई जा रही है।
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बस्ती। संपूर्ण अनलॉक के बाद तेजी से पटरी पर लौट रही सामान्य दिनचर्या में चोरों ने खलल डालना शुरू कर दिया है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब कहीं न कहीं चोरी की घटना न होती हो। महीने भर में छोटी-बड़ी 13 घटनाओं की पुलिस तफ़्तीश कर रही है। कई मामलों में थाने में शिकायत ही नहीं की गई है।
पिछले तीन वर्षों में सितंबर से लेकर फरवरी के बीच होने वाली चोरी की अधिकांश घटनाओं में पेशेवर घुमंतु पाए गए हैं। पुलिस ने अधिकांश घटनाओं का पर्दाफाश किया और उन्हीं के कब्जे से चोरी गए सामान बरामद किए गए। इस आधार पर पुलिस का मानना है कि बरसात के मौसम के बाद आने वाले घुमंतु फिर आ चुके हैं। एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि बाहर से सामान बेचने के बहाने आकर चोरी करने वाले घुमंतुओं पर संदेह है। जल्द इनकी गतिविधि पर लगाम लगाई जाएगी। बावरिया, काछी, पवेरा, कबूतरा जनजाति के घुमंतू चार महीने के लिए ही चोरी करने निकलते हैं। गैंग का एक ग्रुप घनी आबादी से कुछ दूर पहले परिवार सहित डेरा जमा लेता है। फूल, गुब्बारे या छोटा-मोटा सामान फेरी लगाकर बेचते समय वे रेकी करते हैं। एक शहर में वह तीन से चार वारदात करने के लिए रेकी करते है। पूरी डिटेल गिरोह के सरदार को मुहैया कराते हैं। सरदार योजनाबद्ध ढंग से टीम के साथ चोरी की घटना को अंजाम देता है।
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पुलिस ने शुरू कराया सत्यापन
एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी बाजारों में टहलने वाले घुमंतुओं का सत्यापन कराया जा रहा है। उनके बारे में बेसिक जानकारी फोटो सहित संकलित कराई जा रही है।
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