{"_id":"6a29b25705939ac4730e58e8","slug":"payments-for-1187-villages-stalled-due-to-the-closure-of-the-e-gram-swaraj-portal-basti-news-c-207-1-bst1005-160294-2026-06-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल बंद होने से 1187 गांवों का भुगतान अटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: ई-ग्राम स्वराज पोर्टल बंद होने से 1187 गांवों का भुगतान अटका
विज्ञापन
बस्ती। जिले की 1187 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप पड़े हैं। इसके पीछे का कारण ई-ग्राम स्वराज पोर्टल है। वर्तमान में पोर्टल खुल नहीं रहा है इससे, प्रस्तावित कार्ययोजनाएं फीड नहीं हो पा रही हैं। बजट आवंटित होने के बावजूद पोर्टल बंद होने और कार्ययोजना अनुमोदन न होने से प्रशासक निराश हैं।
एक तरफ गांवों में विकास कार्य कराने के लिए सरकार ने निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया तो दूसरी तरफ अभी तक कार्ययोजना फीड करने के लिए न तो ई-ग्राम स्वराज्य पोर्टल खुला और न ही सक्षम स्तर से कार्ययोजना अनुमोदन हो सका है। ऐसे में 1187 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप है। पोर्टल पर कार्ययोजना की फीडिंग होने के बाद ही कार्य की आईडी जनरेट होगी, इसके बाद ही विकास कार्य शुरू हो सका। प्रशासक विकास कार्य शुरू न होने से परेशान हैं और दौड़-भाग शुरू कर दिए हैं।
बताया गया कि इससे कई कार्य भी लंबित है। प्रोग्रेस रिपोर्ट से लेकर मॉनीटरिंग व मीटिंग तक नहीं कर पा रहे हैं। बताया गया कि दिसंबर, जनवरी व फरवरी में बनी कार्ययोजना किन्हीं कारण से जो छूट गई थी, उसकी फीडिंग नहीं हो पा रही है। प्रशासकों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कार्ययोजना दिसंबर 2025 में ही खुली बैठक करके बनाई गई थी। कार्ययोजना फीड कराने के लिए कई बार प्रयास किया गया, लेकिन ई-ग्राम स्वराज पोर्टल बंद होने से फीडिंग नहीं हो सकी, इससे सांसत है।
विज्ञापन
बता दें कि 27 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नामित किया गया था। इसी बीच राज्य वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों को करीब एक हजार करोड़ रुपये बजट का आवंटन किया गया था। वर्तमान में करीब 16 करोड़ है जो विभिन्न मद का जिसे भुगतान किया जाना है। बताया गया कि अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रशासक अपने डोंगल से किस-किस कार्य का भुगतान कर सकते हैं, इसको लेकर अभी असमंजस है।
-- -
प्रशासक बोले-
प्रशासक फूलचंद्र का कहना है कि अप्रैल में मिलने वाला बजट मई में आया और अब कार्ययोजना ही फीड नहीं है। पहले से चल रहे कार्यों पर उक्त धनराशि भुगतान करने से विभागीय अधिकारी मौखिक रूप से मना कर रहे हैं। बजट होने के बावजूद विकास कार्य प्रभावित है। प्रशासक राममूरत का कहना है कि अभी डोंगल भी काम नहीं कर रहा है, इससे कई भुगतान रुक गए हैं। पोर्टल चले तो काम हो।
-- -
किस योजना से कराए जाते हैं कौन से कार्य
राज्य वित्त आयोग से आवंटित बजट में से 50 प्रतिशत धनराशि पुरानी परिसंपत्तियों के रखरखाव व 50 प्रतिशत धनराशि नए कार्यों पर खर्च करने की व्यवस्था है। इसी धनराशि से बिजली बिल, प्रधान मानदेय, पंचायत सहायक मानेदय, समूह केयरटेकर का मानदेय भी दिया जाता है। केंद्रीय वित्त आयोग से आवंटित बजट में से 50 प्रतिशत बजट स्वच्छता संबंधी कार्य पर खर्च करने के निर्देश हैं। प्रकाश व्यवस्था के लाइट, इंटरलाकिंग, खड़ंजा निर्माण, साेकपिट, नाली निर्माण व भवनों का निर्माण ग्राम पंचायतें कराती हैं।
कोट
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल अभी नहीं खुला है, जिससे कार्ययोजना फीड नहीं हो सका है। उच्चाधिकारियों से वार्ता करके समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है। जो डोंगल डीएक्टीवेट हुए थे, वह एक्टीवेट हो गए हैं, अप्रूवल के लिए एडीओ पंचायत को निर्देशित किया गया है।
-घनश्याम सागर, डीपीआरओ, बस्ती।
विज्ञापन
एक तरफ गांवों में विकास कार्य कराने के लिए सरकार ने निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया तो दूसरी तरफ अभी तक कार्ययोजना फीड करने के लिए न तो ई-ग्राम स्वराज्य पोर्टल खुला और न ही सक्षम स्तर से कार्ययोजना अनुमोदन हो सका है। ऐसे में 1187 ग्राम पंचायतों में विकास कार्य ठप है। पोर्टल पर कार्ययोजना की फीडिंग होने के बाद ही कार्य की आईडी जनरेट होगी, इसके बाद ही विकास कार्य शुरू हो सका। प्रशासक विकास कार्य शुरू न होने से परेशान हैं और दौड़-भाग शुरू कर दिए हैं।
विज्ञापन
बताया गया कि इससे कई कार्य भी लंबित है। प्रोग्रेस रिपोर्ट से लेकर मॉनीटरिंग व मीटिंग तक नहीं कर पा रहे हैं। बताया गया कि दिसंबर, जनवरी व फरवरी में बनी कार्ययोजना किन्हीं कारण से जो छूट गई थी, उसकी फीडिंग नहीं हो पा रही है। प्रशासकों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कार्ययोजना दिसंबर 2025 में ही खुली बैठक करके बनाई गई थी। कार्ययोजना फीड कराने के लिए कई बार प्रयास किया गया, लेकिन ई-ग्राम स्वराज पोर्टल बंद होने से फीडिंग नहीं हो सकी, इससे सांसत है।
विज्ञापन
बता दें कि 27 मई को ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नामित किया गया था। इसी बीच राज्य वित्त आयोग से ग्राम पंचायतों को करीब एक हजार करोड़ रुपये बजट का आवंटन किया गया था। वर्तमान में करीब 16 करोड़ है जो विभिन्न मद का जिसे भुगतान किया जाना है। बताया गया कि अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि प्रशासक अपने डोंगल से किस-किस कार्य का भुगतान कर सकते हैं, इसको लेकर अभी असमंजस है।
प्रशासक बोले-
प्रशासक फूलचंद्र का कहना है कि अप्रैल में मिलने वाला बजट मई में आया और अब कार्ययोजना ही फीड नहीं है। पहले से चल रहे कार्यों पर उक्त धनराशि भुगतान करने से विभागीय अधिकारी मौखिक रूप से मना कर रहे हैं। बजट होने के बावजूद विकास कार्य प्रभावित है। प्रशासक राममूरत का कहना है कि अभी डोंगल भी काम नहीं कर रहा है, इससे कई भुगतान रुक गए हैं। पोर्टल चले तो काम हो।
किस योजना से कराए जाते हैं कौन से कार्य
राज्य वित्त आयोग से आवंटित बजट में से 50 प्रतिशत धनराशि पुरानी परिसंपत्तियों के रखरखाव व 50 प्रतिशत धनराशि नए कार्यों पर खर्च करने की व्यवस्था है। इसी धनराशि से बिजली बिल, प्रधान मानदेय, पंचायत सहायक मानेदय, समूह केयरटेकर का मानदेय भी दिया जाता है। केंद्रीय वित्त आयोग से आवंटित बजट में से 50 प्रतिशत बजट स्वच्छता संबंधी कार्य पर खर्च करने के निर्देश हैं। प्रकाश व्यवस्था के लाइट, इंटरलाकिंग, खड़ंजा निर्माण, साेकपिट, नाली निर्माण व भवनों का निर्माण ग्राम पंचायतें कराती हैं।
कोट
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल अभी नहीं खुला है, जिससे कार्ययोजना फीड नहीं हो सका है। उच्चाधिकारियों से वार्ता करके समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है। जो डोंगल डीएक्टीवेट हुए थे, वह एक्टीवेट हो गए हैं, अप्रूवल के लिए एडीओ पंचायत को निर्देशित किया गया है।
-घनश्याम सागर, डीपीआरओ, बस्ती।