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साहबों को नहीं दिखती यहां की गंदगी

Sun, 22 Jul 2018 12:09 AM IST
basti
basti Updated Sun, 22 Jul 2018 12:09 AM IST
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officers are careless
वार्ड में टूटी नालियां। - फोटो : amar ujala
बस्ती। नगर पालिका परिषद हर माह विशेष सफाई अभियान चलाता है। हर वार्ड में सफाई और एंटी लार्वा छिड़काव का दावा करता है लेकिन मुख्य मार्ग से सटे विशुनपुरवा वार्ड से गुजरते समय लोग मुंह और नाक ढककर निकलते हैं। यहां की गलियों में पसरा कूड़ा दावे की पोल खोल रहा है।
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 नगर पालिका परिषद चरणबद्ध ढंग से स्वच्छता का अभियान छेड़े है। चार चरणों में अब तक करीब छह लाख रुपये केवल छिड़काव व फॉगिंग के नाम पर खर्च कर दिए गए हैं। शहर के विशुनपुरवा वार्ड का इंदिरा नगर इलाका इससे अछूता है। यहां नालियां टूट चुकी हैं, जबकि सड़क निर्माण भी अब तक अधूरा है। जबकि शहर को सुंदर बनाने के लिए नगर पालिका जिम्मेदार है। इस जिम्मेदारी को निभाने में अब तक करोड़ों रुपये की सड़क व नाली बनाई जा चुकी है। चार चरणों में अप्रैल से अब तक एंटी लार्वा का छिड़काव व फॉगिंग भी कराई गई, मगर आज भी ऐसे तमाम वार्ड व मुहल्ले हैं, जो पालिका के इस अभियान से अछूते हैं। हालांकि यहां के नागरिक जागरूक हैं और अपनी बात वे पालिका से लगायत प्रशासन तक पहुंचा चुके हैं, मगर किसी ने भी इनकी बातों पर कान नहीं धरा।  नगर पालिका परिषद के ईओ डॉ. मणि भूषण त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने माह भर पहले यहां का चार्ज लिया है। वे अभी शहर को भी ठीक से नहीं समझ पाए हैं। यदि किसी वार्ड में कोई दिक्कत है तो उसकी जानकारी पालिका में दी जाए तो उसे व्यवस्थित करा दिया जाएगा।
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वार्ड के निवासी राजेश गुप्ता कहते हैं कि पालिका तो करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाती है, मगर विकास के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी होती है। वार्ड का यह इलाका विकास से अछूता है। सड़क बनी जरूर मगर अब भी अधूरी है। बरसात में यहां से गुजरना मुश्किल होता है।       
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छात्रा रिया श्रीवास्तव ने बताया कि पालिका केवल विकास का ढिंढोरा पीटती है। पैसा खर्च तो होता है, मगर कहां नागरिक तो कम से कम नहीं जानते। जिम्मेदार भी चुप्पी साधे रहते हैं, जब मामला उठने लगता है तो उनकी नींद टूटती है। जन प्रतिनिधियों का तो शहर से कोई लेना-देना नहीं है।
मोहल्ले की निवासी श्रद्धा तिवारी पालिका की व्यवस्था से बेहद मर्माहत हैं। कहती हैं कि यहां गंदगी का अंबार है तो सड़क व नाली जर्जर है। बारिश होने पर यहां सड़क पानी में डूब जाती है। कितनी शिकायत की जाए मगर किसी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।       

विशुनपुरवा निवासी जेएन पाठक कहते हैं कि नागरिकों का प्रयास यहां कोई मायने नहीं है। जनप्रतिनिधि विकास को लेकर केवल वादे करते हैं। मौका आने पर वादे से भी मुकर जाते हैं। अधिकारियों से कोई विकास से कुछ लेना देेना नहीं है। सरकार की आंख भी जन प्रतिनिधि ही हैं, मगर वे विकास की ओर से आंख बंद किए हुए हैं।       
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