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नंबर प्लेट या मॉडल से छेड़छाड़ भारी पड़ेगा
basti
Updated Tue, 17 Jul 2018 11:46 PM IST
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स्टायलिश नंबर प्लेट।
- फोटो : amar ujala
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बस्ती। कंपनी की मूल बनावट में मनमाना बदलाव सोच रहे हों तो खबरदार हो जाइए। क्योंकि बुधवार से मंडल के तीनों जिले में पुलिस, परिवहन और एनएचएआई, नगर पालिका सहित अन्य संबंधित विभाग की संयुक्त टीम जांच अभियान चलाएगी। यदि नंबर प्लेट पर पंजीकरण के अलावा दूसरा कुछ कभी लिखा पाया गया तो वाहन सीज करते हुए स्वामी पर परिवहन एक्ट के अलावा आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।
डीआईजी डॉ. राकेश शंकर का कहना है कि बाइक व कार के नंबर प्लेट पर द्विअर्थी स्टाइल में नंबर लिखा देखा जा रहा है। कई वाहन पर अजीब लेटर ब्लॉक में नंबर लिखा रहता है, जिसे प्रथमदृष्ट्या पढ़ने पर कुछ और ही शब्द दिखाई देते हैं।
जबकि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और सड़क सुरक्षा अभिकरण की चेतावनी को नजरअंदाज करने वाले ज्यादातर हैं। जबकि ऐसा करने से उनका बीमा क्लेम प्रभावित होता है। बावजूद इसके लोग सुधार के मूड में नहीं हैं। इसलिए अब उन पर कार्रवाई की जाएगी। मोटर-व्हिकल एक्ट का उल्लंघन मानते हुए पुलिस ऐसे नंबर प्लेट लगाने पर 100 रुपये फाइन और दूसरी या इससे अधिक बार पकड़े जाने पर दो हजार रुपये अर्थदंड और जेल का प्रावधान है।
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डीआईजी ने एक वाकया बताते हुए कहा कि इस अभियान के शुरुआत की प्रेरणा उन्हें एसपी महराजगंज तैनाती के दौरान मिली। एक बाइक के पीछे नंबर प्लेट पर लिखा था कि आई त लिखाई। बकौल डीआईजी प्रथम दृष्ट्या समझ में ही नहीं आया कि उस लिखावट का तात्पर्य क्या होगा। जब उस बाइक वाले को रोककर पूछताछ कर गई तब उसने उस इबारत का मर्म बताया। कि जब नंबर आएगा तब लिखाया जाएगा। अर्थात अभी उसकी बाइक का पंजीकरण ही नहीं हुआ है।
स्टाइलिश नंबर की बानगी
गांधीनगर में गुजरते वाहनों पर रोचक तरीके से नंबर लिखे देखे जा रहे हैं। किसी के नंबर प्लेट पर 0104 ऐसे लिखा गया था कि आई लव यू पढ़ा जाए। जबकि उसका असली पंजीकरण नंबर यूपी-.../एच-0104 है। ऐसे ही कई 214 अंक राम जैसा दिख रहा है तो कोई 1255 को आरएसएस की तरह लिखवाए है। इतना ही नहीं प्रेस, हाईकोर्ट, जनपद न्यायालय, पुलिस, सैनिक, राजस्व विभाग, कलेक्ट्रेट, विकास विभाग आदि लिखा देखा जाता है।
हाई सिक्योरिटी नंबर विकल्प
गैरेज मालिकों व मोटर एक्सपर्ट के अनुसार हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट्स लगाने के आदेश का असर अभी न के बराबर है। जबकि ऐसा करने से सभी गाड़ियों के नंबर प्लेट से एकरूपता रहेगी। वहीं, प्लेट पर स्टीकर लगाया जाता है जिस पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन संबंधी पूरा ब्योरा रहता है। नंबर प्लेट से छेड़खानी करने पर प्लेट टूट जाती है। जिसे दोबारा लगवाने के लिए आरटीओ दफ्तर जाना पड़ेगा। इससे चोरों को खतरा काफी हद तक कम होगा।
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डीआईजी डॉ. राकेश शंकर का कहना है कि बाइक व कार के नंबर प्लेट पर द्विअर्थी स्टाइल में नंबर लिखा देखा जा रहा है। कई वाहन पर अजीब लेटर ब्लॉक में नंबर लिखा रहता है, जिसे प्रथमदृष्ट्या पढ़ने पर कुछ और ही शब्द दिखाई देते हैं।
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जबकि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय और सड़क सुरक्षा अभिकरण की चेतावनी को नजरअंदाज करने वाले ज्यादातर हैं। जबकि ऐसा करने से उनका बीमा क्लेम प्रभावित होता है। बावजूद इसके लोग सुधार के मूड में नहीं हैं। इसलिए अब उन पर कार्रवाई की जाएगी। मोटर-व्हिकल एक्ट का उल्लंघन मानते हुए पुलिस ऐसे नंबर प्लेट लगाने पर 100 रुपये फाइन और दूसरी या इससे अधिक बार पकड़े जाने पर दो हजार रुपये अर्थदंड और जेल का प्रावधान है।
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डीआईजी ने एक वाकया बताते हुए कहा कि इस अभियान के शुरुआत की प्रेरणा उन्हें एसपी महराजगंज तैनाती के दौरान मिली। एक बाइक के पीछे नंबर प्लेट पर लिखा था कि आई त लिखाई। बकौल डीआईजी प्रथम दृष्ट्या समझ में ही नहीं आया कि उस लिखावट का तात्पर्य क्या होगा। जब उस बाइक वाले को रोककर पूछताछ कर गई तब उसने उस इबारत का मर्म बताया। कि जब नंबर आएगा तब लिखाया जाएगा। अर्थात अभी उसकी बाइक का पंजीकरण ही नहीं हुआ है।
स्टाइलिश नंबर की बानगी
गांधीनगर में गुजरते वाहनों पर रोचक तरीके से नंबर लिखे देखे जा रहे हैं। किसी के नंबर प्लेट पर 0104 ऐसे लिखा गया था कि आई लव यू पढ़ा जाए। जबकि उसका असली पंजीकरण नंबर यूपी-.../एच-0104 है। ऐसे ही कई 214 अंक राम जैसा दिख रहा है तो कोई 1255 को आरएसएस की तरह लिखवाए है। इतना ही नहीं प्रेस, हाईकोर्ट, जनपद न्यायालय, पुलिस, सैनिक, राजस्व विभाग, कलेक्ट्रेट, विकास विभाग आदि लिखा देखा जाता है।
हाई सिक्योरिटी नंबर विकल्प
गैरेज मालिकों व मोटर एक्सपर्ट के अनुसार हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट्स लगाने के आदेश का असर अभी न के बराबर है। जबकि ऐसा करने से सभी गाड़ियों के नंबर प्लेट से एकरूपता रहेगी। वहीं, प्लेट पर स्टीकर लगाया जाता है जिस पर गाड़ी के रजिस्ट्रेशन संबंधी पूरा ब्योरा रहता है। नंबर प्लेट से छेड़खानी करने पर प्लेट टूट जाती है। जिसे दोबारा लगवाने के लिए आरटीओ दफ्तर जाना पड़ेगा। इससे चोरों को खतरा काफी हद तक कम होगा।