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अब केडीसी के विद्यार्थी ड्रेस पहने नजर आएंगे
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किसान पीजी कॉलेज की छात्राएं ड्रेस पहनकर पहुंची कॉलेज।
- फोटो : BASTI
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अब केडीसी के विद्यार्थी ड्रेस पहने नजर आएंगे
बस्ती। शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज में एक सितंबर से विद्यार्थी ड्रेसकोड में नजर आएंगे। छात्रों के लिए वालजी सरफरोश रंग की शर्ट और कॉफी रंग का पैंट निर्धारित किया गया है। जबकि छात्राओं के लिए वालजी सरफरोश रंग की कुर्ती, कॉफी रंग का सलवार और वेस्ट कोट निर्धारित किया गया है। काले रंग के जूते और सफेद मोजे सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होंगे।
शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज जिले का सबसे पुराना महाविद्यालय है। इसकी स्थापना समाजसेवी शिवहर्ष उपाध्याय ने 1959 में किया था। 1972 से महाविद्यालय में शैक्षिक कार्य शुरु हुए। महाविद्यालय के पुराने शिक्षक व कर्मचारी बताते हैं कि कई बार ड्रेस कोड लागू करने का प्रयास किया गया लेकिन छात्रसंघ के विरोध के कारण यह कभी धरातल पर नहीं उतर पाया। अक्तूबर 2020 में महाविद्यालय में स्थायी प्राचार्य के रुप में प्रो. रीना पाठक की नियुक्ति हुई। इसके बाद बदलाव की कवायद शुरु हुई। प्राचार्य प्रो. रीना बताती हैं कि ड्रेसकोड महाविद्यालय के अनुशासन को बनाए रखने में मदद करेगा। ड्रेस की मदद से परिसर में घूमने वाले बाहरी लोगों की पहचान आसानी कर उन्हें बाहर निकाला जाएगा। एक सितंबर से कड़ाई से इसका पालन कराया जाएगा।
महाविद्यालय परिसर में खुली कैंटीन
प्राचार्य बताती हैं कि महाविद्यालय में धीरे-धीरे सुधार किया जा रहा है। इसी क्रम में परिसर में एक कैंटीन स्थापित कराया गया है। लेक्चर के बाद या लंच में छात्रों को जलपान करने के लिए अब बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
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बस्ती। शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज में एक सितंबर से विद्यार्थी ड्रेसकोड में नजर आएंगे। छात्रों के लिए वालजी सरफरोश रंग की शर्ट और कॉफी रंग का पैंट निर्धारित किया गया है। जबकि छात्राओं के लिए वालजी सरफरोश रंग की कुर्ती, कॉफी रंग का सलवार और वेस्ट कोट निर्धारित किया गया है। काले रंग के जूते और सफेद मोजे सभी विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य होंगे।
शिवहर्ष किसान पीजी कॉलेज जिले का सबसे पुराना महाविद्यालय है। इसकी स्थापना समाजसेवी शिवहर्ष उपाध्याय ने 1959 में किया था। 1972 से महाविद्यालय में शैक्षिक कार्य शुरु हुए। महाविद्यालय के पुराने शिक्षक व कर्मचारी बताते हैं कि कई बार ड्रेस कोड लागू करने का प्रयास किया गया लेकिन छात्रसंघ के विरोध के कारण यह कभी धरातल पर नहीं उतर पाया। अक्तूबर 2020 में महाविद्यालय में स्थायी प्राचार्य के रुप में प्रो. रीना पाठक की नियुक्ति हुई। इसके बाद बदलाव की कवायद शुरु हुई। प्राचार्य प्रो. रीना बताती हैं कि ड्रेसकोड महाविद्यालय के अनुशासन को बनाए रखने में मदद करेगा। ड्रेस की मदद से परिसर में घूमने वाले बाहरी लोगों की पहचान आसानी कर उन्हें बाहर निकाला जाएगा। एक सितंबर से कड़ाई से इसका पालन कराया जाएगा।
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महाविद्यालय परिसर में खुली कैंटीन
प्राचार्य बताती हैं कि महाविद्यालय में धीरे-धीरे सुधार किया जा रहा है। इसी क्रम में परिसर में एक कैंटीन स्थापित कराया गया है। लेक्चर के बाद या लंच में छात्रों को जलपान करने के लिए अब बाहर जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।
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