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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Basti News ›   Not only the young man, but six family members including his wife were also deceived with the promise of a job.

Basti News: युवक ही नहीं उसकी पत्नी समेत छह घर वालों को भी नाैकरी का दिया था झांसा

Wed, 15 Apr 2026 01:26 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 01:26 AM IST
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Not only the young man, but six family members including his wife were also deceived with the promise of a job.
गौर। सिंचाई विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर हुए सात लाख की ठगी मामले में पुलिस जहां पीड़ित व्यक्ति की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी नटवरलाल ने पीड़ित की पत्नी, भाई, बहन, साली और साले को भी सिंचाई विभाग में सहायक ग्रेड-1 पद पर फर्जी चयन सूची तैयार कर थमा दिया है। थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मामले का खुलासा हो रहा है।
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कोतवाली थाना क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी के रहने वाले कुशाग्र श्रीवास्तव की ससुराल गौर थाना क्षेत्र के पिकौरा गांव में है। इसी गांव के रहने वाले आरोपी नटवरलाल अजय कुमार श्रीवास्तव सिंचाई विभाग में तैनात है। मार्च 2025 में पीड़ित कुशाग्र श्रीवास्तव की पत्नी कीर्ति श्रीवास्तव को फोन करके बताया कि बहन सिंचाई विभाग में वैकेंसी आई है। किसी का करना हो तो लाइए हम करा देंगे।
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ससुराल के होने के नाते पीड़ित पति ने पत्नी की बातों पर भरोसा कर लिया और कहा कि ठीक है। कुशाग्र का कहना था कि आरोपी अजय कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जगह काफी निकली है, चार छह लोगों का हो जाएगा। सभी का आधार, फोटो और शैक्षिक प्रमाण पत्र भेज दीजिए। मैं लखनऊ में ऑनलाइन फॉर्म भर दूंगा।
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नटवरलाल की बातों पर भरोसा करते हुए पीड़ित कुशाग्र श्रीवास्तव अपना और पत्नी कीर्ति श्रीवास्तव, बहन आस्था श्रीवास्तव, भाई वैभव श्रीवास्तव, साली पलक श्रीवास्तव और साले आकाश श्रीवास्तव का पूरा डॉक्यूमेंट दे दिया।
इसके बाद गूगल पे के माध्यम से पहले 4.50 लाख रुपये खाते में भेज दिए। उसके बाद ढाई लाख रुपये कैश दे दिए। इस तरह कुल सात लाख रुपये नौकरी के नाम पर आरोपी को दे दिया। कुछ दिन बाद जब नियुक्ति पत्र की मांग करने लगे तो उसने 21 अप्रैल 2025 को फर्जी तरीके से कूटरचित चयन सूची तैयार किया।
जिसमें क्रमांक संख्या 35 पर कुशाग्र श्रीवास्तव का नाम, क्रमांक संख्या 39 पर आकाश श्रीवास्तव और क्रमांक संख्या 92 पर वैभव श्रीवास्तव का नाम अंकित कर फर्जी चयन सूची दे दिया।
इसके बाद तीन मई को दूसरी फर्जी चयन सूची में क्रमांक संख्या चार पर पलक श्रीवास्तव और क्रमांक संख्या 11 पर कीर्ति श्रीवास्तव का नाम अंकित कर दे दिया। तीसरी और अंतिम सूची 22 मई को जारी किया। जिसमें क्रमांक संख्या 69 पर आस्था श्रीवास्तव का नाम अंकित था। सभी फर्जी चयन सूची पाने के बाद पीड़ित कुशाग्र श्रीवास्तव ने जब सिंचाई विभाग में सत्यापन कराया तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
विभाग के लोगों ने बताया कि इस तरह की कोई वैकेंसी नहीं आई है और न ही कोई फॉर्म निकला है, जो भी सूची आपको मिली है, वह पूरी तरह से फर्जी है। यह सुनते ही पीड़ित की जमीन तले पर खिसक गई। फर्जीवाड़े की बात सुनते ही पीड़ित ने अपने पैसे को वापस करने की मांग करने लगा तो आरोपी की मां सुशीला देवी गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। जनवरी 2026 में पीड़ित ने आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत दर्ज कराया। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुआ।

चार माह बीत जाने के बाद एसपी से मुलाकात कर मामले को अवगत कराया। जिस पर एसपी ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए गौर पुलिस को एफआईआर दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी अजय कुमार श्रीवास्तव और उसकी मां सुशीला देवी के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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