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Basti News: सैर-सपाटे की जगह नहीं...बदहाल होते गए शहर के पार्क
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बंद पड़ा वाटर पार्क
बस्ती। शहरवासियों के लिए परिवार और बच्चों के साथ घूमने-फिरने के सीमित विकल्प हैं। पड़ोसी जनपद अयोध्या और गोरखपुर की तर्ज पर यहां न तो नदी या तालाब के किनारे कोई विकसित पर्यटन स्थल है और न ही बड़ा पार्क, जहां लोग सुकून के पल बिता सकें। बच्चों के लिए वाटर पार्क, झूले और छुकछुक रेल जैसी सुविधाएं भी सीमित हैं। ऐसे में शहरवासियों को मनोरंजन के लिए दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है।
करीब छह साल पहले शहर के प्रमुख स्थलों को विकसित करने की मुहिम शुरू हुई थी। इसके तहत कटेश्वर और अमहट में पार्क विकसित किए गए और करोड़ों रुपये खर्च किए गए। हालांकि, नियमित रखरखाव के अभाव में इन पार्कों की सुविधाएं धीरे-धीरे बदहाल होती गईं। कटेश्वर पार्क की स्थिति इसका उदाहरण है।
वर्ष 2019-20 में करीब 3.60 करोड़ रुपये खर्च कर कटेश्वर पार्क को विकसित किया गया था। यहां पाथवे, ओपन जिम, वाटर पार्क, चिल्ड्रेन ट्रेन, हरियाली और फूलों की क्यारियां समेत कई सुविधाएं विकसित की गई थीं। शुरुआत में बड़ी संख्या में लोग पार्क पहुंचने लगे थे। दो साल पहले तक प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,200 लोग यहां आते थे।
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अब स्थिति बदल गई है। पार्क में लगे कई झूले खराब हैं। बोटिंग की व्यवस्था बंद है और जहां बोटिंग होती थी, वहां पानी के नीचे फर्श पर काई जमी है। पानी भी गंदा है। स्लाइडर झूला कई जगह क्षतिग्रस्त है। कुछ टूटे झूलों को रस्सी के सहारे बांधा गया है। ऐसे में बच्चों के लिए इनका इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है।
पार्क में लगीं कलाकृतियां भी कई जगह क्षतिग्रस्त हैं। परिसर में सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। वर्तमान में बैठने की व्यवस्था और कैंटीन के अलावा कुछ छोटे झूले ही उपयोग में हैं। तीन डिब्बों वाली चिल्ड्रेन ट्रेन भी किसी तरह संचालित हो रही है।
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200-300 तक सिमटी रोजाना आने वालों की संख्या
पार्क में प्रवेश के लिए 10 रुपये शुल्क लिया जाता है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 200 से 300 लोग ही पहुंच रहे हैं। इससे नगर पालिका को महीने में करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की आय हो रही है। दो साल पहले यही आय चार से पांच लाख रुपये प्रतिमाह बताई जा रही थी। पार्क में आए सोनू ने बताया कि पहले वाटर पार्क और स्काई झूला चालू थे। गर्मी में वाटर पार्क के कारण बड़ी संख्या में लोग यहां आते थे। अब अधिकांश सुविधाएं बंद होने से पार्क में पहले जैसी भीड़ नहीं रहती। अनिल ने बताया कि प्रवेश शुल्क तो लिया जा रहा है, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बताया गया कि पार्क में झूले, वाटर पार्क, रेलगाड़ी, स्काई झूला और मैगनेट कार आदि के संचालन की व्यवस्था ठेके पर थी। यह व्यवस्था बंद होने के बाद इन सुविधाओं का संचालन प्रभावित हुआ।
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अमहट पार्क में उगी झाड़ियां, बेंच और ओपन जिम ही सहारा
अमहट घाट के पास नगर पालिका ने करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से पार्क विकसित कराया था। निर्माण के दौरान कई अड़चनें आईं और लंबे समय तक काम पूरा नहीं हो सका। बाद में निर्माण पूरा हुआ, लेकिन पार्क में अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं। परिसर में बेंच और ओपन जिम के उपकरण लगाए गए हैं। रखरखाव के अभाव में जगह-जगह झाड़ियां और घास उग आई है। इससे पार्क में लोगों की आवाजाही भी कम हो गई है।
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आवास विकास में भी नहीं विकसित हो सका पार्क
शहर की आवास विकास कॉलोनी में भी पार्क विकसित करने की योजना बनी थी, लेकिन यहां भी अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं। ऐसे में शहर में बच्चों और परिवारों के लिए व्यवस्थित मनोरंजन स्थल की कमी बनी हुई है।
कोटकटेश्वर पार्क में खराब हुए कुछ झूलों को जल्द ठीक कराया जाएगा। अमहट घाट स्थित पार्क में भी सफाई कराई जाएगी।
-अंगद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका परिषद
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करीब छह साल पहले शहर के प्रमुख स्थलों को विकसित करने की मुहिम शुरू हुई थी। इसके तहत कटेश्वर और अमहट में पार्क विकसित किए गए और करोड़ों रुपये खर्च किए गए। हालांकि, नियमित रखरखाव के अभाव में इन पार्कों की सुविधाएं धीरे-धीरे बदहाल होती गईं। कटेश्वर पार्क की स्थिति इसका उदाहरण है।
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वर्ष 2019-20 में करीब 3.60 करोड़ रुपये खर्च कर कटेश्वर पार्क को विकसित किया गया था। यहां पाथवे, ओपन जिम, वाटर पार्क, चिल्ड्रेन ट्रेन, हरियाली और फूलों की क्यारियां समेत कई सुविधाएं विकसित की गई थीं। शुरुआत में बड़ी संख्या में लोग पार्क पहुंचने लगे थे। दो साल पहले तक प्रतिदिन करीब 1,000 से 1,200 लोग यहां आते थे।
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अब स्थिति बदल गई है। पार्क में लगे कई झूले खराब हैं। बोटिंग की व्यवस्था बंद है और जहां बोटिंग होती थी, वहां पानी के नीचे फर्श पर काई जमी है। पानी भी गंदा है। स्लाइडर झूला कई जगह क्षतिग्रस्त है। कुछ टूटे झूलों को रस्सी के सहारे बांधा गया है। ऐसे में बच्चों के लिए इनका इस्तेमाल जोखिम भरा हो सकता है।
पार्क में लगीं कलाकृतियां भी कई जगह क्षतिग्रस्त हैं। परिसर में सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है। वर्तमान में बैठने की व्यवस्था और कैंटीन के अलावा कुछ छोटे झूले ही उपयोग में हैं। तीन डिब्बों वाली चिल्ड्रेन ट्रेन भी किसी तरह संचालित हो रही है।
200-300 तक सिमटी रोजाना आने वालों की संख्या
पार्क में प्रवेश के लिए 10 रुपये शुल्क लिया जाता है। वर्तमान में प्रतिदिन करीब 200 से 300 लोग ही पहुंच रहे हैं। इससे नगर पालिका को महीने में करीब डेढ़ से दो लाख रुपये की आय हो रही है। दो साल पहले यही आय चार से पांच लाख रुपये प्रतिमाह बताई जा रही थी। पार्क में आए सोनू ने बताया कि पहले वाटर पार्क और स्काई झूला चालू थे। गर्मी में वाटर पार्क के कारण बड़ी संख्या में लोग यहां आते थे। अब अधिकांश सुविधाएं बंद होने से पार्क में पहले जैसी भीड़ नहीं रहती। अनिल ने बताया कि प्रवेश शुल्क तो लिया जा रहा है, लेकिन उसके अनुरूप सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बताया गया कि पार्क में झूले, वाटर पार्क, रेलगाड़ी, स्काई झूला और मैगनेट कार आदि के संचालन की व्यवस्था ठेके पर थी। यह व्यवस्था बंद होने के बाद इन सुविधाओं का संचालन प्रभावित हुआ।
अमहट पार्क में उगी झाड़ियां, बेंच और ओपन जिम ही सहारा
अमहट घाट के पास नगर पालिका ने करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से पार्क विकसित कराया था। निर्माण के दौरान कई अड़चनें आईं और लंबे समय तक काम पूरा नहीं हो सका। बाद में निर्माण पूरा हुआ, लेकिन पार्क में अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं। परिसर में बेंच और ओपन जिम के उपकरण लगाए गए हैं। रखरखाव के अभाव में जगह-जगह झाड़ियां और घास उग आई है। इससे पार्क में लोगों की आवाजाही भी कम हो गई है।
आवास विकास में भी नहीं विकसित हो सका पार्क
शहर की आवास विकास कॉलोनी में भी पार्क विकसित करने की योजना बनी थी, लेकिन यहां भी अपेक्षित सुविधाएं विकसित नहीं हो सकीं। ऐसे में शहर में बच्चों और परिवारों के लिए व्यवस्थित मनोरंजन स्थल की कमी बनी हुई है।
कोटकटेश्वर पार्क में खराब हुए कुछ झूलों को जल्द ठीक कराया जाएगा। अमहट घाट स्थित पार्क में भी सफाई कराई जाएगी।
-अंगद गुप्ता, ईओ, नगर पालिका परिषद