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सड़क निर्माण व चौड़ीकरण में गायब हो गईं पटरियां
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सड़क निर्माण व चौड़ीकरण में गायब हो गया फुटपाथ
बस्ती। सड़क सुरक्षा संबंधी नियम-कानून में भी फुटपाथ की अनदेखी की गई है। जिले में इसकी झलक उन कई सड़कों पर दिखती है, जिनका हाल में पुननिर्माण हुआ है फिर चौड़ीकरण किया गया है। इतनी ही नहीं जहां फुटपाथ बने भी वह मौजूदा समय में अतिक्रमण के शिकार हैं। जानकार मानते हैं कि फुटपाथ विहीन सड़कें पैदल यात्रियों के साथ-साथ वाहन चालकों के लिए भी मुश्किलें खड़ी करती हैं। इसलिए जहां अच्छे फुटपाथ नहीं हैं, वहां आधुनिक प्रणालियों से भी यातायात में सुधार नहीं हो सकता।
उदाहरण : एक
लंबे समय खराब पचपेड़िया मार्ग का करीब दो महीने पहले निर्माण हुआ। करीब दो करोड़ की लागत से बनी इस सड़क पर अब वाहन फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन इस सड़क के निर्माण और चौड़ीकरण में फुटपाथ की अनदेखी कर दी गई। नेशनल हाइवे से शहर से जोड़ने का यह प्रमुख मार्ग होने के साथ एक डिग्री कॉलेज और दो बड़े कान्वेंट स्कूल इस मार्ग पर हैं। फुटपाथ न होने से पैदल राहगीर और बच्चों को सड़क पर ही पैदल चलना पड़ता है। जिससे हादसे का डर तो बना ही रहता है, वाहनों की रफ्तार थमने यहां हर रोज दिन में कई बार जाम की भी स्थिति उत्पन्न होती है।
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उदाहरण : दो
जिले को संतकबीरनगर से जोड़ने वाले बस्ती-महुली का मार्ग का करीब छह साल पहले चौड़ीकरण हुआ। चौड़ीकरण से पहले इस पूरी सड़क पर फुटपाथ का निर्माण किया गया था। लेकिन अब फुटपाथ गायब है। पैदल राहगीरों को मजबूरी में सड़क पर ही चलना पड़ता है। करीब तीस किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर महसों, महादेवा, बनकटी, देईसांड़ कस्बे तक में कहीं भी नहीं दिखता है। इसके चलते सड़क बनने के बाद भी सुरक्षित यातायात की मंशा पूरी नहीं हो पाई है। वहीं जगह-जगह हुए अतिक्रमण ने दुकानों और सड़क के बीच की दूरी को भी कम कर दिया है, जो हादसों का अलग से कारण बन रहा है।
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उदाहरण : तीन
लालगंज कस्बा से मुंडेरवा जाने वाली करीब 23 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण अभी बीते नवंबर माह में पूरा हुआ है। इस सड़क पर कहीं भी फुटपाथ नहीं बनाया गया है। सड़क की पटरी के बगल मिट्टी पाट दी गई है। सड़क पर पड़ने वाले महादेवा, लालगंज, कुरियार, बडडांड़, हथियांव कला में सीसी रोड बनाया गया है, लेकिन यहां भी फुटपाथ गायब है। इसके चलते सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए तो जगह ही नहीं बची है। इसके चलते राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और हादसे का डर भी हर समय बना रहता है।
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जहां फुटपाथ वहां हो गया अतिक्रमण
अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई है कि यदि अच्छे फुटपाथ हों तो पैदल यात्री सड़क के बजाय फुटपाथ पर चलना पसंद करते हैं। लेकिन शहर से लेकर गांव तक में जहां भी फुटपाथ हैं, वहां अतिक्रमण की जद हैं। यह स्थिति हाईवे से लेकर जिले के किसी भी सड़क पर देखी जा सकती है। शहर के रोडवेज से लेकर गांधीनगर मुख्य मार्ग पर तो सुबह होते ही दुकानें सज जाती हैं। दोपहर होते-होते ठेले-खोमचे वालों का कब्जा हो जाता है। ऐसे में पैदल चलने वाले लोगों के लिए सड़क पर पैदल चलना मजबूरी बन जाती है। यही नहीं, गांधीनगर मुख्य मार्ग पर सड़क के बीचोबीच गाड़ियां पार्क होती हैं। यह नजारा आपको प्रदेश के किसी अन्य जिले में शायद ही देखने को मिले। यही हाल पुरानी बस्ती, पांडेय बाजार, मंगल बाजार, कटरा, कंपनी बाग समेत अन्य ग्रामीण इलाकों का भी है।
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क्या कहते हैं नागरिक
शहर की सड़कों पर पैदल चलना जान जोखिम में डालने जैसा है। अधिकांश सड़क पर फुटपाथ है ही नहीं और जहां फुटपाथ है भी वहां अतिक्रमण हो चुका है। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
अमरनाथ यादव, निवासी ग्राम भुवनी
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पचपेड़िया रोड पर फुटपाथ न होने से पैदल चलने में काफी समस्या होती है। हर समय हादसे का डर बना रहता है। जिम्मेदारों को चाहिए कि जहां फुटपाथ नहीं है, वहां जल्द इसका निर्माण कराएं।
अमरेश चंद्र तिवारी, निवासी पचपेड़िया
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शहरी क्षेत्र व घनी आबादी और जमीन कम होने की वजह से पटरियां बनाने में दिक्कत आती है। चूंकि शहरों में गाड़ियां बहुत तेज गति से नहीं चलती हैं, इसलिए पटरियों की जरूरत नहीं होती, लेकिन सड़क की सुरक्षा के लिए पटरी बनाना जरूरी होता है। हाईवे व अन्य राजमार्ग पर पटरी बनाया जाना जरूरी है। जहां पटरी नहीं बनी है, उसे दिखवा कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
-शुभनारायण राव, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड
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बस्ती। सड़क सुरक्षा संबंधी नियम-कानून में भी फुटपाथ की अनदेखी की गई है। जिले में इसकी झलक उन कई सड़कों पर दिखती है, जिनका हाल में पुननिर्माण हुआ है फिर चौड़ीकरण किया गया है। इतनी ही नहीं जहां फुटपाथ बने भी वह मौजूदा समय में अतिक्रमण के शिकार हैं। जानकार मानते हैं कि फुटपाथ विहीन सड़कें पैदल यात्रियों के साथ-साथ वाहन चालकों के लिए भी मुश्किलें खड़ी करती हैं। इसलिए जहां अच्छे फुटपाथ नहीं हैं, वहां आधुनिक प्रणालियों से भी यातायात में सुधार नहीं हो सकता।
उदाहरण : एक
लंबे समय खराब पचपेड़िया मार्ग का करीब दो महीने पहले निर्माण हुआ। करीब दो करोड़ की लागत से बनी इस सड़क पर अब वाहन फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन इस सड़क के निर्माण और चौड़ीकरण में फुटपाथ की अनदेखी कर दी गई। नेशनल हाइवे से शहर से जोड़ने का यह प्रमुख मार्ग होने के साथ एक डिग्री कॉलेज और दो बड़े कान्वेंट स्कूल इस मार्ग पर हैं। फुटपाथ न होने से पैदल राहगीर और बच्चों को सड़क पर ही पैदल चलना पड़ता है। जिससे हादसे का डर तो बना ही रहता है, वाहनों की रफ्तार थमने यहां हर रोज दिन में कई बार जाम की भी स्थिति उत्पन्न होती है।
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उदाहरण : दो
जिले को संतकबीरनगर से जोड़ने वाले बस्ती-महुली का मार्ग का करीब छह साल पहले चौड़ीकरण हुआ। चौड़ीकरण से पहले इस पूरी सड़क पर फुटपाथ का निर्माण किया गया था। लेकिन अब फुटपाथ गायब है। पैदल राहगीरों को मजबूरी में सड़क पर ही चलना पड़ता है। करीब तीस किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर महसों, महादेवा, बनकटी, देईसांड़ कस्बे तक में कहीं भी नहीं दिखता है। इसके चलते सड़क बनने के बाद भी सुरक्षित यातायात की मंशा पूरी नहीं हो पाई है। वहीं जगह-जगह हुए अतिक्रमण ने दुकानों और सड़क के बीच की दूरी को भी कम कर दिया है, जो हादसों का अलग से कारण बन रहा है।
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उदाहरण : तीन
लालगंज कस्बा से मुंडेरवा जाने वाली करीब 23 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण अभी बीते नवंबर माह में पूरा हुआ है। इस सड़क पर कहीं भी फुटपाथ नहीं बनाया गया है। सड़क की पटरी के बगल मिट्टी पाट दी गई है। सड़क पर पड़ने वाले महादेवा, लालगंज, कुरियार, बडडांड़, हथियांव कला में सीसी रोड बनाया गया है, लेकिन यहां भी फुटपाथ गायब है। इसके चलते सड़क पर पैदल चलने वालों के लिए तो जगह ही नहीं बची है। इसके चलते राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और हादसे का डर भी हर समय बना रहता है।
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जहां फुटपाथ वहां हो गया अतिक्रमण
अध्ययनों से इस बात की पुष्टि हुई है कि यदि अच्छे फुटपाथ हों तो पैदल यात्री सड़क के बजाय फुटपाथ पर चलना पसंद करते हैं। लेकिन शहर से लेकर गांव तक में जहां भी फुटपाथ हैं, वहां अतिक्रमण की जद हैं। यह स्थिति हाईवे से लेकर जिले के किसी भी सड़क पर देखी जा सकती है। शहर के रोडवेज से लेकर गांधीनगर मुख्य मार्ग पर तो सुबह होते ही दुकानें सज जाती हैं। दोपहर होते-होते ठेले-खोमचे वालों का कब्जा हो जाता है। ऐसे में पैदल चलने वाले लोगों के लिए सड़क पर पैदल चलना मजबूरी बन जाती है। यही नहीं, गांधीनगर मुख्य मार्ग पर सड़क के बीचोबीच गाड़ियां पार्क होती हैं। यह नजारा आपको प्रदेश के किसी अन्य जिले में शायद ही देखने को मिले। यही हाल पुरानी बस्ती, पांडेय बाजार, मंगल बाजार, कटरा, कंपनी बाग समेत अन्य ग्रामीण इलाकों का भी है।
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क्या कहते हैं नागरिक
शहर की सड़कों पर पैदल चलना जान जोखिम में डालने जैसा है। अधिकांश सड़क पर फुटपाथ है ही नहीं और जहां फुटपाथ है भी वहां अतिक्रमण हो चुका है। इस पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
अमरनाथ यादव, निवासी ग्राम भुवनी
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पचपेड़िया रोड पर फुटपाथ न होने से पैदल चलने में काफी समस्या होती है। हर समय हादसे का डर बना रहता है। जिम्मेदारों को चाहिए कि जहां फुटपाथ नहीं है, वहां जल्द इसका निर्माण कराएं।
अमरेश चंद्र तिवारी, निवासी पचपेड़िया
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शहरी क्षेत्र व घनी आबादी और जमीन कम होने की वजह से पटरियां बनाने में दिक्कत आती है। चूंकि शहरों में गाड़ियां बहुत तेज गति से नहीं चलती हैं, इसलिए पटरियों की जरूरत नहीं होती, लेकिन सड़क की सुरक्षा के लिए पटरी बनाना जरूरी होता है। हाईवे व अन्य राजमार्ग पर पटरी बनाया जाना जरूरी है। जहां पटरी नहीं बनी है, उसे दिखवा कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
-शुभनारायण राव, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड