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पालिका की जल निकासी योजना नामंजूर
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। नगर पालिका द्वारा बनाई गई चार करोड़ की जल निकासी योजना के प्रस्ताव को शासन ने नामंजूर कर दिया है। नतीजतन अब अधूरे करीब पांच किमी लंबे अधूरे नालों का निर्माण अधर में पड़ गया है।
शहरी क्षेत्र के 25 वार्डों में करीब दो लाख आबादी रहती है। यहां की जल निकासी व्यवस्था बेहद खराब है। इसका कारण यह है कि गली-मोहल्लों की नालियां एक तो ठीक ढंग से बनाई नहीं गईं हैं, तो दूसरी ओर बड़े नालों से जोड़ने का काम भी कहीं-कहीं पूरा नहीं हो सका है। इसके साथ ही शहर के करीब सत्तर किमी बड़े नालों को भी ठीक ढंग से नहीं जोड़ा गया है। यह नाले जगह-जगह छोड़ दिए गए हैं, जिससे शहर के कई हिस्सों में पानी निकास नहीं बेहतर ढंग से नहीं होती है।
बारिश के समय में इन मोहल्लों में आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। कई घरों में तो पानी भी घुस जाता है। सबसे खराब स्थिति मालवीय रोड की है। यहां के नाले इस कदर बनाए गए हैं कि पानी निकास बाधित रहती है। कहीं चौड़ा तो कहीं नाली की तरह बनाए गए इन बड़े नालों पर कई जगह लोगों ने मिट्टी डालकर पाट भी लिया है। सबसे ज्यादा दिक्कत भवन निर्माण सामग्री ने पैदा कर रखी है। सड़क पर ही मोरंग व बालू गिराकर यह नालों को चोक कर देते हैं। इन स्थितियों को संज्ञान में लेकर नगर पालिका ने शहरी क्षेत्र के करीब पांच किमी अधूरे नालों को जोड़ने व जगह-जगह किन्हीं कारणों से बंद नालों को दुरुस्त कराने की कवायद करते हुए दो साल पहले सर्वे कराकर चार करोड़ का प्रस्ताव बनाया, जिसे शासन में बजट के लिए भेजा गया, मगर इस प्रस्ताव को शासन ने नामंजूर कर दिया है।
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ईओ अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि जल निकासी योजना में प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे शासन ने नामंजूर कर दिया है। नालों को दुरुस्त कराने के लिए पालिका खुद अपने बजट से व्यवस्था बनाएगी। शहर के नालों को दुरुस्त कराना बेहद आवश्यक है। जिससे शहरी क्षेत्र के जल निकासी समस्या को दूर किया जा सके।
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बस्ती। नगर पालिका द्वारा बनाई गई चार करोड़ की जल निकासी योजना के प्रस्ताव को शासन ने नामंजूर कर दिया है। नतीजतन अब अधूरे करीब पांच किमी लंबे अधूरे नालों का निर्माण अधर में पड़ गया है।
शहरी क्षेत्र के 25 वार्डों में करीब दो लाख आबादी रहती है। यहां की जल निकासी व्यवस्था बेहद खराब है। इसका कारण यह है कि गली-मोहल्लों की नालियां एक तो ठीक ढंग से बनाई नहीं गईं हैं, तो दूसरी ओर बड़े नालों से जोड़ने का काम भी कहीं-कहीं पूरा नहीं हो सका है। इसके साथ ही शहर के करीब सत्तर किमी बड़े नालों को भी ठीक ढंग से नहीं जोड़ा गया है। यह नाले जगह-जगह छोड़ दिए गए हैं, जिससे शहर के कई हिस्सों में पानी निकास नहीं बेहतर ढंग से नहीं होती है।
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बारिश के समय में इन मोहल्लों में आवागमन पूरी तरह ठप हो जाता है। कई घरों में तो पानी भी घुस जाता है। सबसे खराब स्थिति मालवीय रोड की है। यहां के नाले इस कदर बनाए गए हैं कि पानी निकास बाधित रहती है। कहीं चौड़ा तो कहीं नाली की तरह बनाए गए इन बड़े नालों पर कई जगह लोगों ने मिट्टी डालकर पाट भी लिया है। सबसे ज्यादा दिक्कत भवन निर्माण सामग्री ने पैदा कर रखी है। सड़क पर ही मोरंग व बालू गिराकर यह नालों को चोक कर देते हैं। इन स्थितियों को संज्ञान में लेकर नगर पालिका ने शहरी क्षेत्र के करीब पांच किमी अधूरे नालों को जोड़ने व जगह-जगह किन्हीं कारणों से बंद नालों को दुरुस्त कराने की कवायद करते हुए दो साल पहले सर्वे कराकर चार करोड़ का प्रस्ताव बनाया, जिसे शासन में बजट के लिए भेजा गया, मगर इस प्रस्ताव को शासन ने नामंजूर कर दिया है।
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ईओ अखिलेश त्रिपाठी ने कहा कि जल निकासी योजना में प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे शासन ने नामंजूर कर दिया है। नालों को दुरुस्त कराने के लिए पालिका खुद अपने बजट से व्यवस्था बनाएगी। शहर के नालों को दुरुस्त कराना बेहद आवश्यक है। जिससे शहरी क्षेत्र के जल निकासी समस्या को दूर किया जा सके।