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Basti News: चमक उठेंगे परिक्रमा मार्ग के पौराणिक स्थल
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84 कोसी परिक्रमा मार्ग की सड़क बनने से संवर जाएगा मखौड़ा धाम- संवाद
-पर्यटन क्षेत्र के रूप में होंगे विकसित, बस्ती में 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का निर्माण शुरू
- 56 तीन ब्लॉक क्षेत्रों में बढ़ जाएगी विकास की गति, पर्यटकों का भी होगा आना-जाना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले जिले के पौराणिक स्थल अब चमक उठेंगे। बस्ती जिले में परिक्रमा मार्ग के प्रथम फेज की सड़क के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 56 गांवों से होकर गुजरने वाली सड़क के किनारे प्रभु श्रीराम की स्मृतियों से जुड़े आधा दर्जन पौराणिक स्थल भी हैं। आवागमन सुलभ होने से इनके पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की संभावना बढ़ जाएगी।
परिक्रमा मार्ग की सड़क पुत्र कामेष्टि यज्ञ स्थल मखौड़ा धाम से प्रारंभ हो रही है। यह जिले के परशुरामपुर ब्लॉक का सीमा क्षेत्र है। यहां से सड़क निकलकर विक्रमजोत ब्लॉक के छावनी स्थित रामरेखा मंदिर और दुबौलिया ब्लॉक के हनुमान बाग चकोही पहुंचेगी। इसके बाद सरयू नदी पर पुल बनाकर सड़क को आंबेडकरनगर जिले के शृंगी ऋषि के आश्रम तक बनाया जाना है। पांच जिलों को जोड़ने वाली 231.858 किमी लंबी यह सड़क प्रभु श्रीराम के इन पौराणिक स्थलों की महत्ता बढ़ा देगी। यहां पर्यटन की दृष्टि से आवागमन भी बढ़ेगा।
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मखौड़ा : प्रभु राम के जन्म से पहले हुआ था पुत्रेष्टि यज्ञ
मखौड़ा परिक्रमा मार्ग का शुभारंभ स्थल है। यह वही मनवर नदी का तट है जहां भगवान श्रीराम के जन्म से पहले चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया था। त्रेताकाल से इस स्थल का महत्व है। अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा यहीं से प्रारंभ होती है।
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रामरेखा : माता जानकी और भगवान राम ने किया था विश्राम
रामरेखा एक जलधारा है। यह छावनी कस्बे के निकट स्थित है। मान्यता है कि मिथिला से ब्याज रचाने के बाद अयोध्या लौटते समय माता जानकी और प्रभु श्रीराम ने यहां विश्राम किया था। इस बीच माता जानकी को प्यास लगी तो प्रभु श्रीराम ने अपनी अंगुली से रेखा खींची। इसके बाद जल प्रवाहित होने लगा। तभी से यह स्थल रामरेखा के नाम प्रचलित है। परिक्रमा मार्ग से यह स्थल भी जोड़ा जा रहा है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं का यह पहला पड़ाव भी है।
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हनुमान बाग चकोही : परिक्रमा का दूसरा पड़ाव
हनुमानबाग चकोही 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का दूसरा पड़ाव स्थल है। मान्यता है कि भगवान राम के भक्त हनुमान यहां वास कर अवध नगरी की निगरानी करते थे। इसीलिए यह स्थल हनुमानबाग के नाम से प्रचलित है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु यहां रात भर विश्राम करते हैं। सड़क बन जाने से इस स्थल पर दर्शनार्थियों का आवागमन बढ़ जाएगा।
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शृंंगी ऋषि और शृंगीनारी का आश्रम भी जुड़ेगा
परिक्रमा मार्ग बनने से आंबेडकर नगर स्थित ऋषि शृंगी का आश्रम और बस्ती में स्थित उनकी धर्मपत्नी शृंगीनारी का आश्रम भी सीधे जुड़ जाएगा। अभी तक श्रद्धालुओं को इन दोनों धर्मस्थलों पर पहुंचने के लिए 100 किमी से अधिक दूरी तय करनी पड़ती थी। अब परिक्रमा मार्ग बन जाने से दोनों स्थलों के बीच की दूरी घटकर 25- 30 किमी के बीच हो जाएगी।
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56 गांवों में चिह्नित की जा रही सड़क की जमीन
प्रथम फेज की सड़क के लिए जिले के तीन ब्लॉक क्षेत्रों के 56 गांवों में अधिग्रहित जमीन को चिह्नित करने का कार्य शुरू हो गया है। जिले में प्रस्तावित 40.14 किमी लंबाई में सड़क बनाने के लिए मशीनों से खोदाई कराकर अधिग्रहित जमीन की मार्किंग कराई जा रही है। इसके बाद निर्माण प्रक्रिया और तेज हो जाएगी। सड़क के लिए कुल 6500 काश्तकारों की 45 मीटर चौड़ाई में 180 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जा रही है। निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी एनएच को प्रथम फेज की सड़क बनाने के लिए 1,032 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ है। यह सड़क मखौड़ा धाम व छावनी से महूघाट, रामबाग व सांड़पुर से सरयू नदी पार कर आंबेडकरनगर के शृंगी ऋषि के आश्रम तक बनाई जाएगी।
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अयोध्या समेत पांच-पांच जनपदों को जोड़ेगा परिक्रमा मार्ग
परिक्रमा मार्ग बन जाने से बस्ती, अयोध्या समेत पांच जनपद सीधे जुड़ जाएंगे। बस्ती, आंबेडकर नगर, अयोध्या, बाराबंकी और गोंडा जिले में कुल 231.858 किमी लंबाई में यह सड़क बननी है। इसकी लागत 2,533 करोड़ रुपये हैं।
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ऐसे बनेगी सड़क
परिक्रमा मार्ग की सड़क 10 मीटर विद पिप्ड सोल्डर यानी टू- लेन बनाई जाएगी। जिले में प्रथम फेज की 40.14 किमी तक सड़क बनाने के लिए 1,032 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 10 मीटर चौड़े टू- लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा दोनों तरफ एक-एक मीटर चौड़ी पटरी बनाई जाएगी। इस धन में जमीन का मुआवजा, बिजली के खंभे हटाने, वन विभाग के पौधरोपण, पेयजल आपूर्ति की पाइप लाइन हटाने व अन्य खर्चे भी शामिल हैं।
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सड़क निर्माण के लिए जमीन चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। खेत खाली होते ही अधिग्रहित भूमि कब्जे में ली जा रही है। ताकि निर्माण कार्य शुरू किया जा सकें।
-इं. एसके वर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी एनएच।
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- 56 तीन ब्लॉक क्षेत्रों में बढ़ जाएगी विकास की गति, पर्यटकों का भी होगा आना-जाना
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। 84 कोसी परिक्रमा मार्ग में पड़ने वाले जिले के पौराणिक स्थल अब चमक उठेंगे। बस्ती जिले में परिक्रमा मार्ग के प्रथम फेज की सड़क के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। 56 गांवों से होकर गुजरने वाली सड़क के किनारे प्रभु श्रीराम की स्मृतियों से जुड़े आधा दर्जन पौराणिक स्थल भी हैं। आवागमन सुलभ होने से इनके पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होने की संभावना बढ़ जाएगी।
परिक्रमा मार्ग की सड़क पुत्र कामेष्टि यज्ञ स्थल मखौड़ा धाम से प्रारंभ हो रही है। यह जिले के परशुरामपुर ब्लॉक का सीमा क्षेत्र है। यहां से सड़क निकलकर विक्रमजोत ब्लॉक के छावनी स्थित रामरेखा मंदिर और दुबौलिया ब्लॉक के हनुमान बाग चकोही पहुंचेगी। इसके बाद सरयू नदी पर पुल बनाकर सड़क को आंबेडकरनगर जिले के शृंगी ऋषि के आश्रम तक बनाया जाना है। पांच जिलों को जोड़ने वाली 231.858 किमी लंबी यह सड़क प्रभु श्रीराम के इन पौराणिक स्थलों की महत्ता बढ़ा देगी। यहां पर्यटन की दृष्टि से आवागमन भी बढ़ेगा।
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मखौड़ा : प्रभु राम के जन्म से पहले हुआ था पुत्रेष्टि यज्ञ
मखौड़ा परिक्रमा मार्ग का शुभारंभ स्थल है। यह वही मनवर नदी का तट है जहां भगवान श्रीराम के जन्म से पहले चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराया था। त्रेताकाल से इस स्थल का महत्व है। अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा यहीं से प्रारंभ होती है।
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रामरेखा : माता जानकी और भगवान राम ने किया था विश्राम
रामरेखा एक जलधारा है। यह छावनी कस्बे के निकट स्थित है। मान्यता है कि मिथिला से ब्याज रचाने के बाद अयोध्या लौटते समय माता जानकी और प्रभु श्रीराम ने यहां विश्राम किया था। इस बीच माता जानकी को प्यास लगी तो प्रभु श्रीराम ने अपनी अंगुली से रेखा खींची। इसके बाद जल प्रवाहित होने लगा। तभी से यह स्थल रामरेखा के नाम प्रचलित है। परिक्रमा मार्ग से यह स्थल भी जोड़ा जा रहा है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालुओं का यह पहला पड़ाव भी है।
हनुमान बाग चकोही : परिक्रमा का दूसरा पड़ाव
हनुमानबाग चकोही 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का दूसरा पड़ाव स्थल है। मान्यता है कि भगवान राम के भक्त हनुमान यहां वास कर अवध नगरी की निगरानी करते थे। इसीलिए यह स्थल हनुमानबाग के नाम से प्रचलित है। परिक्रमा के दौरान श्रद्धालु यहां रात भर विश्राम करते हैं। सड़क बन जाने से इस स्थल पर दर्शनार्थियों का आवागमन बढ़ जाएगा।
शृंंगी ऋषि और शृंगीनारी का आश्रम भी जुड़ेगा
परिक्रमा मार्ग बनने से आंबेडकर नगर स्थित ऋषि शृंगी का आश्रम और बस्ती में स्थित उनकी धर्मपत्नी शृंगीनारी का आश्रम भी सीधे जुड़ जाएगा। अभी तक श्रद्धालुओं को इन दोनों धर्मस्थलों पर पहुंचने के लिए 100 किमी से अधिक दूरी तय करनी पड़ती थी। अब परिक्रमा मार्ग बन जाने से दोनों स्थलों के बीच की दूरी घटकर 25- 30 किमी के बीच हो जाएगी।
56 गांवों में चिह्नित की जा रही सड़क की जमीन
प्रथम फेज की सड़क के लिए जिले के तीन ब्लॉक क्षेत्रों के 56 गांवों में अधिग्रहित जमीन को चिह्नित करने का कार्य शुरू हो गया है। जिले में प्रस्तावित 40.14 किमी लंबाई में सड़क बनाने के लिए मशीनों से खोदाई कराकर अधिग्रहित जमीन की मार्किंग कराई जा रही है। इसके बाद निर्माण प्रक्रिया और तेज हो जाएगी। सड़क के लिए कुल 6500 काश्तकारों की 45 मीटर चौड़ाई में 180 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जा रही है। निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी एनएच को प्रथम फेज की सड़क बनाने के लिए 1,032 करोड़ रुपये का बजट आवंटित हुआ है। यह सड़क मखौड़ा धाम व छावनी से महूघाट, रामबाग व सांड़पुर से सरयू नदी पार कर आंबेडकरनगर के शृंगी ऋषि के आश्रम तक बनाई जाएगी।
अयोध्या समेत पांच-पांच जनपदों को जोड़ेगा परिक्रमा मार्ग
परिक्रमा मार्ग बन जाने से बस्ती, अयोध्या समेत पांच जनपद सीधे जुड़ जाएंगे। बस्ती, आंबेडकर नगर, अयोध्या, बाराबंकी और गोंडा जिले में कुल 231.858 किमी लंबाई में यह सड़क बननी है। इसकी लागत 2,533 करोड़ रुपये हैं।
ऐसे बनेगी सड़क
परिक्रमा मार्ग की सड़क 10 मीटर विद पिप्ड सोल्डर यानी टू- लेन बनाई जाएगी। जिले में प्रथम फेज की 40.14 किमी तक सड़क बनाने के लिए 1,032 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसमें 10 मीटर चौड़े टू- लेन सड़क का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा दोनों तरफ एक-एक मीटर चौड़ी पटरी बनाई जाएगी। इस धन में जमीन का मुआवजा, बिजली के खंभे हटाने, वन विभाग के पौधरोपण, पेयजल आपूर्ति की पाइप लाइन हटाने व अन्य खर्चे भी शामिल हैं।
सड़क निर्माण के लिए जमीन चिह्नित करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। खेत खाली होते ही अधिग्रहित भूमि कब्जे में ली जा रही है। ताकि निर्माण कार्य शुरू किया जा सकें।
-इं. एसके वर्मा, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी एनएच।