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Basti News: भगवान भरोसे नगर पालिका... नाला निर्माण हुआ न ही मुकम्मल सफाई
Mon, 30 Sep 2024 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Mon, 30 Sep 2024 12:53 AM IST
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नगर पालिका के साकेतपुरी वार्ड में जाम पड़ी नाली।
बारिश के समय तमाशबीन बनकर दुश्वारियां देख रहे जिम्मेदार
अधिकतर नालों की नहीं हुई वर्षों से मरम्मत, पानी का बहाव बाधित
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर की समस्याओं का निदान निकालने वाली नगर पालिका खुद भगवान भरोसे हो गई है। निर्माण और मरम्मत के लिए नगर पालिका के पास पर्याप्त बजट नहीं है। नगर पालिका का यह रोना पिछले दो साल से बना हुआ है। बारिश में जब शहर में जलभराव का संकट गहराता है तो नगर पालिका लोगों को समस्या से उबारने में हाथ खड़े कर देती है।
शहर में 40 किमी तक मुख्य नाले का निर्माण हुआ है। इसके अलावा मोहल्लों, काॅलोनियों में एक हजार किमी से अधिक लंबाई में छोटी नालियां बनाई गई हैं। मगर, वर्षों से नालियों-नालों के मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है। जबकि लंबा समय होने के कारण इनकी सतह सड़कों से काफी नीचे हो गई हैं।
ऐसे में पुराने नाले और नालियां पानी का बहाव नहीं कर पा रहे हैं। जैसे ही बारिश हो रही है यह ऊफना कर पानी में डूब जा रहे हैं। नतीजा नालियों का पानी उलटा घरों में जा रहा है। नगर पालिका बजट का अभाव बताकर निर्माण एवं मरम्मत कराने से हाथ खड़े कर दे रही है। इस वजह से शहर के मोहल्लों में जलभराव का संकट गहरा गया है।
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शहर के मुख्य नाले अधिकतर जगहों पर कच्ची खोदाई कर बनाए गए हैं। इन्हें पक्का करने की कोई योजना तैयार नहीं हुई है। इससे अधिक बहाव के दौरान नालों के किनारे कटान भी हो रही है। शहरी क्षेत्र के अधिकतर मुख्य नालों के बगल से आवागमन हो रहा है। बावजूद इसके इन्हें पक्का निर्माण कर ढकने की व्यवस्था नहीं बनाई जा रही है। इससे अक्सर कोई न कोई दुर्घटना हो रही है। जरा चूक होने पर वाहन सहित लोग खुले नाले में गिर जा रहे हैं। मंगला कॉलोनी, तुरकहिया आदि जगहों पर 20 फीट चौड़ाई में बना खुला नाला दुर्घटना का सबब बना है।
...
ईओ और इंजीनियर भी नहीं
दो साल से नगर पालिका की निर्माण इकाई ठप हो गई है। कभी एक सहायक अभियंता और दो अवर अभियंता से गुलजार रहने वाली नगर पालिका के पास इधर एक भी इंजीनियर नहीं हैं। पीडब्ल्यूडी के उधार के इंजीनियर से किसी तरह छिटपुट कार्य कराया जा रहा है। साल भर से अधिशासी अधिकारी भी यहां तैनात नहीं किए जा रहे हैं। पिछले माह एक महिला ईओ का स्थानांतरण यहां के लिए हुआ भी तो एक ही दिन बाद वह गैर जनपद स्थानांतरित होकर चली गईं। वर्तमान प्रभारी ईओ के रूप में अतिरिक्त एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। खबर है कि यहां बजट न होने के कारण ईओ एवं इंजीनियर आने को तैयार नहीं होते हैं।
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बीडीए को बनानी पड़ रही सड़क और नाली
नगर पालिका क्षेत्र के कुछ प्रमुख नाला और सड़क का निर्माण बीडीए को करना पड़ रहा है। नगर पालिका के पास बजट न होने की वजह से जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से दुश्वारियां कम करने के लिए बीडीए को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। हाल ही में रेलवे स्टेशन मार्ग के निर्माण पर किसी तरह नगर पालिका ने 60 लाख रुपये धन का इंतजाम किया। इस धन से सड़क बनाई जा रही है। मगर, दोनों तरफ नाला निर्माण की व्यवस्था नगर पालिका के पास नहीं है। जबकि यह जलभराव वाला क्षेत्र है। ऐसे में बीडीए को नाला निर्माण का जिम्मा उठाना पड़ा है। शहर के मुख्य मालवीय मार्ग के नवीनीकरण के लिए भी नगर पालिका के पास बजट नहीं है। इस सड़क को भी बनाने का जिम्मा बीडीए ने उठाया है। हालांकि, इस पर अभी निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
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कोट
बजट के अलावा ईओ और इंजीनियरों की डिमांड शासन से कई बार की जा चुकी है। उपलब्ध बजट और संसाधन में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। अतिरिक्त बजट के लिए शासन स्तर पर प्रयास चल रहा है।
-नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद
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अधिकतर नालों की नहीं हुई वर्षों से मरम्मत, पानी का बहाव बाधित
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। शहर की समस्याओं का निदान निकालने वाली नगर पालिका खुद भगवान भरोसे हो गई है। निर्माण और मरम्मत के लिए नगर पालिका के पास पर्याप्त बजट नहीं है। नगर पालिका का यह रोना पिछले दो साल से बना हुआ है। बारिश में जब शहर में जलभराव का संकट गहराता है तो नगर पालिका लोगों को समस्या से उबारने में हाथ खड़े कर देती है।
शहर में 40 किमी तक मुख्य नाले का निर्माण हुआ है। इसके अलावा मोहल्लों, काॅलोनियों में एक हजार किमी से अधिक लंबाई में छोटी नालियां बनाई गई हैं। मगर, वर्षों से नालियों-नालों के मरम्मत का कार्य नहीं हुआ है। जबकि लंबा समय होने के कारण इनकी सतह सड़कों से काफी नीचे हो गई हैं।
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ऐसे में पुराने नाले और नालियां पानी का बहाव नहीं कर पा रहे हैं। जैसे ही बारिश हो रही है यह ऊफना कर पानी में डूब जा रहे हैं। नतीजा नालियों का पानी उलटा घरों में जा रहा है। नगर पालिका बजट का अभाव बताकर निर्माण एवं मरम्मत कराने से हाथ खड़े कर दे रही है। इस वजह से शहर के मोहल्लों में जलभराव का संकट गहरा गया है।
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शहर के मुख्य नाले अधिकतर जगहों पर कच्ची खोदाई कर बनाए गए हैं। इन्हें पक्का करने की कोई योजना तैयार नहीं हुई है। इससे अधिक बहाव के दौरान नालों के किनारे कटान भी हो रही है। शहरी क्षेत्र के अधिकतर मुख्य नालों के बगल से आवागमन हो रहा है। बावजूद इसके इन्हें पक्का निर्माण कर ढकने की व्यवस्था नहीं बनाई जा रही है। इससे अक्सर कोई न कोई दुर्घटना हो रही है। जरा चूक होने पर वाहन सहित लोग खुले नाले में गिर जा रहे हैं। मंगला कॉलोनी, तुरकहिया आदि जगहों पर 20 फीट चौड़ाई में बना खुला नाला दुर्घटना का सबब बना है।
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ईओ और इंजीनियर भी नहीं
दो साल से नगर पालिका की निर्माण इकाई ठप हो गई है। कभी एक सहायक अभियंता और दो अवर अभियंता से गुलजार रहने वाली नगर पालिका के पास इधर एक भी इंजीनियर नहीं हैं। पीडब्ल्यूडी के उधार के इंजीनियर से किसी तरह छिटपुट कार्य कराया जा रहा है। साल भर से अधिशासी अधिकारी भी यहां तैनात नहीं किए जा रहे हैं। पिछले माह एक महिला ईओ का स्थानांतरण यहां के लिए हुआ भी तो एक ही दिन बाद वह गैर जनपद स्थानांतरित होकर चली गईं। वर्तमान प्रभारी ईओ के रूप में अतिरिक्त एसडीएम को जिम्मेदारी सौंपी गई है। खबर है कि यहां बजट न होने के कारण ईओ एवं इंजीनियर आने को तैयार नहीं होते हैं।
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बीडीए को बनानी पड़ रही सड़क और नाली
नगर पालिका क्षेत्र के कुछ प्रमुख नाला और सड़क का निर्माण बीडीए को करना पड़ रहा है। नगर पालिका के पास बजट न होने की वजह से जिला प्रशासन के हस्तक्षेप से दुश्वारियां कम करने के लिए बीडीए को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। हाल ही में रेलवे स्टेशन मार्ग के निर्माण पर किसी तरह नगर पालिका ने 60 लाख रुपये धन का इंतजाम किया। इस धन से सड़क बनाई जा रही है। मगर, दोनों तरफ नाला निर्माण की व्यवस्था नगर पालिका के पास नहीं है। जबकि यह जलभराव वाला क्षेत्र है। ऐसे में बीडीए को नाला निर्माण का जिम्मा उठाना पड़ा है। शहर के मुख्य मालवीय मार्ग के नवीनीकरण के लिए भी नगर पालिका के पास बजट नहीं है। इस सड़क को भी बनाने का जिम्मा बीडीए ने उठाया है। हालांकि, इस पर अभी निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
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कोट
बजट के अलावा ईओ और इंजीनियरों की डिमांड शासन से कई बार की जा चुकी है। उपलब्ध बजट और संसाधन में विकास कार्य कराए जा रहे हैं। अतिरिक्त बजट के लिए शासन स्तर पर प्रयास चल रहा है।
-नेहा वर्मा, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद